सरकारी स्कूलों में AI सिखाने के दावों का सच, कंप्यूटर लैब छोड़ो, 66% स्कूलों में इंटरनेट भी नहीं
thesootr Desk | Apr 07, 2026, 14:45 IST
AI CODING EDUCATION
देश के सरकारी स्कूलों में AI और कोडिंग पढ़ाने की बात हो रही है। लेकिन 66% स्कूलों में इंटरनेट और सिर्फ 34% में कंप्यूटर लैब है। MP, राजस्थान, छत्तीसगढ़ की स्थिति और भी खराब है।
समझें क्या है पूरा मामला
नई दिल्ली। देश के सरकारी स्कूलों में AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कोडिंग और डिजिटल कौशल सिखाने की योजना बन रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी इसी दिशा में जोर देती है। लेकिन जमीनी हकीकत देखने पर पता चल रहा हैं कि सामने एक बड़ी डिजिटल दीवार खड़ी है।
यू-डायस प्लस (U-DISE+) यानी यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस के नए रिपोर्ट में जारी आंकड़े इसी सच को उजागर कर रहैं हैं। बता दें, कक्षा 6 और उससे ऊपर की कक्षाओं वाले 3 लाख 94 हजार 924 सरकारी स्कूल हैं। इनमें से सिर्फ 34 प्रतिशत यानी करीब 1 लाख 34 हजार स्कूलों में कंप्यूटर लैब है। 66 प्रतिशत स्कूलों में इंटरनेट की सुविधा जरूर है, लेकिन लैब नहीं होने से यह इंटरनेट बच्चों के किसी काम का नहीं।
उत्तर प्रदेश में 49 हजार 418 सरकारी स्कूल हैं। इनमें से सिर्फ 3 हजार 953 यानी 8 प्रतिशत में कंप्यूटर लैब मौजूद है। इंटरनेट की सुविधा 18 हजार 284 स्कूलों यानी 37 प्रतिशत में है।
मध्यप्रदेश में 34 हजार 152 स्कूलों में से 3 हजार 756 यानी 11 प्रतिशत में लैब है। इंटरनेट 12 हजार 977 यानी 38 प्रतिशत में है। राजस्थान में 38 हजार 19 स्कूलों में से 14 हजार 67 यानी 37 प्रतिशत में लैब है और 27 हजार 753 यानी 73 प्रतिशत में इंटरनेट है।
वहीं छत्तीसगढ़ में 18 हजार 91 स्कूलों में 2 हजार 713 यानी 15 प्रतिशत में लैब है, जबकि इंटरनेट 11 हजार 940 यानी 66 प्रतिशत में उपलब्ध है। बिहार की बात करें तो 38 हजार 355 स्कूलों में से 7 हजार 287 यानी 19 प्रतिशत में लैब है और 32 हजार 985 यानी 86 प्रतिशत में इंटरनेट है।
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हालांकि सभी राज्यों की स्थिति एक जैसे नहीं हैं। पंजाब में 99 प्रतिशत स्कूल यानी 6 हजार 425 स्कूलों में से 6 हजार 360 में लैब और इंटरनेट सुविधा मौजूद है। दिल्ली में 1 हजार 157 स्कूलों में से 1 हजार 146 यानी 94 प्रतिशत में लैब है और 99 प्रतिशत में इंटरनेट।
तमिलनाडु में 13 हजार 346 स्कूलों में से 12 हजार 945 यानी 97 प्रतिशत में लैब और 12 हजार 678 यानी 95 प्रतिशत में इंटरनेट है। वहीं केरल में 2 हजार 426 स्कूलों में से 1 हजार 990 यानी 82 प्रतिशत में लैब है।
इससे साफ दिखता है कि दक्षिण भारत और छोटे राज्य बड़े हिंदी भाषी राज्यों से काफी आगे हैं।
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सीबीएससी (Central Board of Secondary Education) से मान्यता प्राप्त लगभग सभी निजी स्कूलों में कंप्यूटर लैब उपलब्ध है। इसी कारण जब इनकी तुलना सरकारी स्कूलों से की जाती है तो बड़ा फर्क नजर आता है। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे जो ज्यादातर गरीब और ग्रामीण तबके से होते हैं, डिजिटल शिक्षा में पिछड़ते जा रहे हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में कंप्यूटर साइंस, डेटा साइंस और कम्प्यूटेशनल स्किल्स को पाठ्यक्रम में शामिल करने पर जोर दिया गया है। लेकिन बुनियादी ढांचा तैयार हुए बिना ये संभव कैसे होगा?
इसमें एक और बड़ी समस्या है। ज्यादातर राज्यों में कंप्यूटर शिक्षा के लिए अलग कैडर नहीं बनाया गया है। केंद्र की योजनाओं के तहत सामान्य शिक्षकों को ही 40 प्रतिशत तक कंप्यूटर प्रशिक्षण दिया जाता है। लेकिन प्रशिक्षित शिक्षक के बिना लैब होना भी पूरी तरह कारगर नहीं होगा। राजस्थान समेत कुछ राज्यों में कंप्यूटर अनुदेशक जरूर तैयार हुए हैं, लेकिन यह काफी नहीं है।
AI और डिजिटल कौशल की पढ़ाई का सपना तब तक पूरा नहीं होगा जब तक कंप्यूटर लैब, इंटरनेट और प्रशिक्षित शिक्षक एक साथ मौजूद न हों। नीति में AI है, लेकिन जमीन पर अभाव है। यह डिजिटल दीवार जब तक नहीं टूटेगी, सरकारी स्कूलों के बच्चे डिजिटल दुनिया में पिछड़ते रहेंगे।
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यह खबर देश के करोड़ों सरकारी स्कूली बच्चों के भविष्य से जुड़ी है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21A देश के हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकार देता है। लेकिन जब सिर्फ 34 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर लैब है, तो डिजिटल और AI शिक्षा की बात करना केवल कागजी घोषणा बन जाती है। यह खबर शिक्षा में बढ़ती असमानता को उजागर करती है। अमीर-गरीब, शहरी और ग्रामीण के बीच डिजिटल खाई (Digital India)सामाजिक न्याय के लिए खतरा बन सकती है। नीति-निर्माताओं, शिक्षकों, अभिभावकों और नागरिकों सभी को यह पता होना चाहिएह कि सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच कितना फासला है।
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- देश के सरकारी स्कूलों में AI (Artificial Intelligence) और कोडिंग पढ़ाने की योजना बनाई जा रही है।
- लेकिन केवल 34% सरकारी स्कूलों में ही कंप्यूटर लैब मौजूद है।
- 66% स्कूलों में इंटरनेट की सुविधा है, पर लैब के बिना यह बेकार है।
- MP, राजस्थान, छत्तीसगढ़ जैसे बड़े राज्यों में स्थिति बेहद खराब है।
- कंप्यूटर शिक्षकों का अलग कैडर न होने से पूरी योजना पर सवाल खड़े होने लगे है।
AI का सपना, जमीनी सच्चाई
यू-डायस प्लस (U-DISE+) यानी यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस के नए रिपोर्ट में जारी आंकड़े इसी सच को उजागर कर रहैं हैं। बता दें, कक्षा 6 और उससे ऊपर की कक्षाओं वाले 3 लाख 94 हजार 924 सरकारी स्कूल हैं। इनमें से सिर्फ 34 प्रतिशत यानी करीब 1 लाख 34 हजार स्कूलों में कंप्यूटर लैब है। 66 प्रतिशत स्कूलों में इंटरनेट की सुविधा जरूर है, लेकिन लैब नहीं होने से यह इंटरनेट बच्चों के किसी काम का नहीं।
बड़े राज्यों की बड़ी लापरवाही
मध्यप्रदेश में 34 हजार 152 स्कूलों में से 3 हजार 756 यानी 11 प्रतिशत में लैब है। इंटरनेट 12 हजार 977 यानी 38 प्रतिशत में है। राजस्थान में 38 हजार 19 स्कूलों में से 14 हजार 67 यानी 37 प्रतिशत में लैब है और 27 हजार 753 यानी 73 प्रतिशत में इंटरनेट है।
वहीं छत्तीसगढ़ में 18 हजार 91 स्कूलों में 2 हजार 713 यानी 15 प्रतिशत में लैब है, जबकि इंटरनेट 11 हजार 940 यानी 66 प्रतिशत में उपलब्ध है। बिहार की बात करें तो 38 हजार 355 स्कूलों में से 7 हजार 287 यानी 19 प्रतिशत में लैब है और 32 हजार 985 यानी 86 प्रतिशत में इंटरनेट है।
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कुछ राज्य आगे, बाकी पीछे
तमिलनाडु में 13 हजार 346 स्कूलों में से 12 हजार 945 यानी 97 प्रतिशत में लैब और 12 हजार 678 यानी 95 प्रतिशत में इंटरनेट है। वहीं केरल में 2 हजार 426 स्कूलों में से 1 हजार 990 यानी 82 प्रतिशत में लैब है।
इससे साफ दिखता है कि दक्षिण भारत और छोटे राज्य बड़े हिंदी भाषी राज्यों से काफी आगे हैं।
Digital Literacy Madhya Pradesh | Peepul India
CBSE स्कूलों से तुलना और भी तकलीफदेह
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में कंप्यूटर साइंस, डेटा साइंस और कम्प्यूटेशनल स्किल्स को पाठ्यक्रम में शामिल करने पर जोर दिया गया है। लेकिन बुनियादी ढांचा तैयार हुए बिना ये संभव कैसे होगा?
कंप्यूटर शिक्षक ही नहीं हैं
सपने बड़े, जमीन तैयार नहीं
Delhi schools to teach AI from class VI onwards, details here - EducationTimes.com
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