इंडिया बुल्स के MD को अवमानना नोटिस, 22 जुलाई को पेश होने के आदेश
Neel Tiwari | May 15, 2025, 15:20 IST
The sootr
सुप्रीम कोर्ट ने सम्मान कैपिटल लिमिटेड के प्रबंध MD के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू कर दी। यह कार्रवाई तब की गई जब अदालत ने पाया कि कंपनी ने कोर्ट के स्पष्ट स्थगन आदेश (stay order) के बावजूद एक घर खरीदार के खिलाफ ऋण वसूली की प्रक्रिया जारी रखी।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में सम्मान कैपिटल लिमिटेड (जिसे पहले इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड के नाम से जाना जाता था) के प्रबंध निदेशक के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। शीर्ष अदालत ने यह कदम तब उठाया जब यह पाया गया कि कोर्ट द्वारा दिए गए स्पष्ट स्थगन (स्टे) आदेश के बावजूद कंपनी ने एक घर खरीदार के खिलाफ ऋण वसूली की प्रक्रिया जारी रखी। अदालत ने इसे न्यायालय के आदेश की खुली अवहेलना माना और कंपनी के एमडी को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होकर जवाब देने का निर्देश दिया है।
खबर यह भी : OBC Reservation की Supreme Court में हुई सुनवाई | चीफ जस्टिस तय करेंगे अगली तारीख
यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की शिकायत नहीं है बल्कि एक बड़े घोटाले की संभावित कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में रियल एस्टेट कंपनियों और बैंकों के बीच संदिग्ध गठजोड़ की जांच का आदेश सीबीआई को दे चुका है। कोर्ट ने यह टिप्पणी भी की थी कि कुछ बिल्डर कंपनियां और बैंक मिलकर उन घर खरीदारों से 'फिरौती' वसूल रहे हैं जो पहले से ही वित्तीय संकट का सामना कर रहे हैं। अब जब सम्मान कैपिटल का नाम इस संदर्भ में सामने आया है, तो यह संकेत मिलता है कि यह कंपनी भी इस संदिग्ध गठजोड़ का हिस्सा हो सकती है।
खबर यह भी : MPPSC, अवैध फीस वसूली समेत इन मुद्दों पर आज जबलपुर हाईकोर्ट में होगी सुनवाई
इस मामले में आवेदक के वकील ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि न्यायालय द्वारा लोन वसूली पर रोक लगाने के बावजूद सम्मान कैपिटल ने अपनी वसूली प्रक्रिया बंद नहीं की, बल्कि और अधिक आक्रामक रवैया अपनाया। वकील ने यह भी आरोप लगाया कि कंपनी ने कुछ असामाजिक तत्वों को घर पर भेजकर खरीदार पर दबाव डालने का प्रयास किया, जिससे आवेदक और उसके परिवार को मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। यह आचरण न केवल अमानवीय है बल्कि सीधे तौर पर न्यायालय के आदेश का उल्लंघन भी है।
खबर यह भी : अपर कलेक्टर के नाम पर वसूली का ऑर्डर चस्पा, नोटिस देख सदमे में आया शख्स!
इस पूरे घटनाक्रम पर गौर करते हुए जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने सम्मान कैपिटल के प्रबंध निदेशक को कारण बताओ नोटिस जारी किया। पीठ ने कहा, "प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि कंपनी ने हमारे आदेश का पालन नहीं किया है, इसलिए यह निर्देश दिया जाता है कि एमडी अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हों और स्पष्ट करें कि उनके खिलाफ कोर्ट की अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए?" यह निर्देश न केवल उस व्यक्ति विशेष के लिए, बल्कि पूरे कॉरपोरेट जगत के लिए एक कड़ा संदेश है कि कोर्ट के आदेश की अवहेलना सहन नहीं की जाएगी।
खबर यह भी : Supreme Court के एक आदेश के चलते गई थी नौकरी | अब सरकार करेगी समायोजन | Chhattisgarh
सुनवाई के दौरान अदालत ने आवेदक को तत्काल अंतरिम राहत देते हुए यह भी स्पष्ट आदेश दिया कि उसके खिलाफ ऋण वसूली की कोई भी प्रक्रिया अब नहीं चलाई जाएगी। इस आदेश के साथ अदालत ने यह सुनिश्चित किया कि जब तक यह मामला न्यायिक प्रक्रिया से नहीं गुजरता, तब तक आवेदक को किसी भी प्रकार की धमकी, दबाव या कानूनी कार्यवाही का सामना न करना पड़े। यह फैसला देशभर के उन हजारों घर खरीदारों के लिए आशा की किरण है, जो बैंकों और बिल्डरों की मिलीभगत से परेशान हैं।
खबर यह भी : खजाने से करोड़ों उड़ाने वालों पर सरकार की नजरें इनायत, केस दर्ज कराया, वसूली भूली
अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 22 जुलाई 2025 तय की है। इस दिन सम्मान कैपिटल के एमडी को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा और अपने आचरण के लिए सफाई देनी होगी। यह सुनवाई महज एक कंपनी या एक वादी का मामला नहीं रह गया है, बल्कि अब यह संपूर्ण रियल एस्टेट और वित्तीय व्यवस्था की पारदर्शिता और जिम्मेदारी का परीक्षण बन गया है। घर खरीदार, सामाजिक कार्यकर्ता और आर्थिक क्षेत्र के विशेषज्ञ इस फैसले को नज़दीकी से देख रहे हैं, क्योंकि इसका असर देशभर में चल रहे हजारों होम लोन मामलों पर भी पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट का यह सख्त रवैया इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अब घर खरीदारों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। रियल एस्टेट कंपनियों और फाइनेंस संस्थानों को न्यायपालिका के आदेशों का सम्मान करना ही होगा, अन्यथा उन्हें कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ेगा। यह मामला आने वाले समय में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है, जिससे प्रेरणा लेकर अन्य पीड़ित भी न्याय के लिए आगे आ सकें।
अवमानना नोटिस
खबर यह भी : OBC Reservation की Supreme Court में हुई सुनवाई | चीफ जस्टिस तय करेंगे अगली तारीख
'बिल्डर-बैंक गठजोड़' पर पहले से सुप्रीम कोर्ट की पैनी नजर
खबर यह भी : MPPSC, अवैध फीस वसूली समेत इन मुद्दों पर आज जबलपुर हाईकोर्ट में होगी सुनवाई
स्टे ऑर्डर के बावजूद, भेजे असामाजिक तत्व
The sootr
खबर यह भी : अपर कलेक्टर के नाम पर वसूली का ऑर्डर चस्पा, नोटिस देख सदमे में आया शख्स!
क्यों न हो कोर्ट की अवमानना में कार्रवाई?
खबर यह भी : Supreme Court के एक आदेश के चलते गई थी नौकरी | अब सरकार करेगी समायोजन | Chhattisgarh
कोई भी वसूली कार्रवाई न की जाए, कोर्ट का आदेश
खबर यह भी : खजाने से करोड़ों उड़ाने वालों पर सरकार की नजरें इनायत, केस दर्ज कराया, वसूली भूली
अगली सुनवाई पर पूरे रियल एस्टेट सेक्टर की नजर
सुप्रीम कोर्ट का यह रुख बनेगा घर खरीदारों की ताकत
अवमानना नोटिस
नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता
By Sanjay Gupta, Sandeep Kumar
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
By Neel Tiwari
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari