इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस को 2 महीने CCTV फुटेज रखने पर लगाई फटकार
Jitendra Shrivastava | Jan 09, 2026, 23:50 IST
dgp cctv footage rule
उत्तर प्रदेश DGP के 2 महीने CCTV फुटेज रखने के नियम पर सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई है। इस नियम को कोर्ट के आदेश का उल्लंघन मानते हुए कड़ी आपत्ति भी जताई।
ALLAHABAD. उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) के जारी आदेश में CCTV फुटेज को केवल 2 से 2.5 महीने तक सुरक्षित रखने की बात कही गई है। इसे इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बैंच) ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन माना और DGP के आदेश पर कड़ी आपत्ति जताई है।
कोर्ट का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के 2020 के आदेश में कम से कम 6 महीने से 18 महीने तक फुटेज को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया था। इस मुद्दे पर अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) द्वारा जारी किए आदेश पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। इसमें राज्य के पुलिस थानों में CCTV फुटेज को केवल 2 से 2.5 महीने तक सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया था।
इस आदेश का विरोध करते हुए अदालत ने इसे सुप्रीम कोर्ट के 2020 के आदेश के खिलाफ बताया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि CCTV फुटेज को कम से कम 6 महीने और अधिकतम 18 महीने तक सुरक्षित रखा जाए।
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अदालत ने यह सवाल उठाया कि कैसे DGP ने कोर्ट के आदेश के बावजूद इतना कम समय (2-2.5 महीने) तय किया। कोर्ट ने इसे प्रथमदृष्टया अवमानना करार दिया, क्योंकि इसमें देश के सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन किया गया था। उच्च न्यायालय ने इस आदेश को अवमानना माना और उत्तर प्रदेश सरकार से इस पर विस्तृत जवाब मांगा है।
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CCTV फुटेज को सही तरीके से रिकॉर्ड और सुरक्षित रखना न्यायिक प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह फुटेज न्यायालय में सबूत के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। खासकर जब यह किसी गिरफ्तारी, पूछताछ या पुलिस की कार्रवाई से संबंधित हो।
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि राज्यों को CCTV फुटेज को पर्याप्त समय तक सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक स्टोरेज व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। DGP के आदेश से यह संदेश जाता है कि यह स्टोर करने का समय अपर्याप्त हो सकता है, जो आगे चलकर कानूनी विवादों का कारण बन सकता है।
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मामले में एक महिला याचिकाकर्ता को अवैध हिरासत में रखने और पुलिस द्वारा उससे दुर्व्यवहार किए जाने का आरोप था। महिला के साथ पुलिस द्वारा की गई मारपीट और अपमान की घटनाओं की पुष्टि करने के लिए CCTV फुटेज की जरूरत थी, लेकिन उच्च न्यायालय ने पाया कि संबंधित पुलिस थाने ने नियमों का पालन नहीं किया।
यहां तक कि यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि महिला को थाने बुलाने का कानूनी आधार क्या था। यह स्थिति BNSS की धारा 179(2) का उल्लंघन करती है, जिसमें कहा गया है कि किसी महिला को उसके निवास स्थान के अलावा कहीं और नहीं बुलाया जा सकता।
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आरोपों में यह भी दावा किया गया था कि पुलिसकर्मियों ने रिश्वत मांगी थी, लेकिन जांच के बाद केवल दो पुलिसकर्मियों को रिजर्व पुलिस लाइन भेजा गया। कोर्ट ने इसे ढीला रवैया मानते हुए कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि यह कार्यवाही अपर्याप्त थी।
अदालत ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव से तीन सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें यह स्पष्ट करना होगा कि DGP के आदेश के खिलाफ क्यों ऐसा कदम उठाया गया और क्या BNSS की धारा 179(2) का पालन किया गया। इसके अलावा, महिला याचिकाकर्ता को थाने बुलाने का कारण भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।
कोर्ट का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के 2020 के आदेश में कम से कम 6 महीने से 18 महीने तक फुटेज को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया था। इस मुद्दे पर अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन
इस आदेश का विरोध करते हुए अदालत ने इसे सुप्रीम कोर्ट के 2020 के आदेश के खिलाफ बताया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि CCTV फुटेज को कम से कम 6 महीने और अधिकतम 18 महीने तक सुरक्षित रखा जाए।
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DGP का आदेश कोर्ट की अवमानना
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CCTV फुटेज के महत्व को समझना
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि राज्यों को CCTV फुटेज को पर्याप्त समय तक सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक स्टोरेज व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। DGP के आदेश से यह संदेश जाता है कि यह स्टोर करने का समय अपर्याप्त हो सकता है, जो आगे चलकर कानूनी विवादों का कारण बन सकता है।
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महिला याचिकाकर्ता के मामले में कानून
यहां तक कि यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि महिला को थाने बुलाने का कानूनी आधार क्या था। यह स्थिति BNSS की धारा 179(2) का उल्लंघन करती है, जिसमें कहा गया है कि किसी महिला को उसके निवास स्थान के अलावा कहीं और नहीं बुलाया जा सकता।
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