साल के सबसे लंबे दिन होने जा रहा है कुछ ऐसा, जो बदल देगा मौसम का मिजाज
Kaushiki | Jun 18, 2026, 14:30 IST
21 june longest day
आज 21 जून को साल का सबसे लंबा दिन होने जा रहा है। भारत में दिन की अवधि 13 घंटे से ज्यादा रहेगी। इस दिन कई खगोलीय और ज्योतिषीय संयोग बन रहे हैं। ज्योतिषियों के मुताबिक आठ नक्षत्र आने वाले 120 दिनों की अच्छी बारिश का संकेत दे रहे हैं।
21 June Longest Day: साल का एक ऐसा दिन आने वाला है जब दिन सबसे बड़ा होगा। आज 21 जून को आकाश में कई अद्भुत संयोग एक साथ दिखाई देंगे। यह दिन वैज्ञानिक और धार्मिक दोनों नजरिए से बेहद खास माना जाता है। भारत में इस दिन धूप की अवधि 13 घंटे से ज्यादा की होगी।
इसके बाद रातें धीरे-धीरे लंबी होने लगेंगी और दिन छोटे होने लगेंगे। विज्ञान के मुताबिक, इस समय पृथ्वी सूर्य के सबसे नजदीक वाले कोण पर होती है। इस घटना को विज्ञान की भाषा में ग्रीष्म अयनांत (Summer Solstice) भी कहा जाता है। आम जनता के लिए यह दिन बहुत ही उत्सुकता भरा होता है।
इस दिन लोगों को काम करने के लिए दिन का ज्यादा समय मिलता है। मौसम में इस बदलाव के बाद गर्मी का असर भी कम होने लगता है। इस दिन के बाद से ही मानसून की हवाएं सक्रिय होने लगती हैं।
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विज्ञान इस खगोलीय घटना को बहुत ही आसान तरीके से समझाता है। रीजनल साइंस सेंटर के प्रमुख साकेत सिंह कौरव ने इस पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हमारी पृथ्वी अपने अक्ष पर 23.5 डिग्री झुकी हुई है। इसी झुकाव के कारण मौसम बदलते हैं और दिन-रात छोटे-बड़े होते हैं।
आज 21 जून को सूर्य की किरणें कर्क रेखा पर बिल्कुल सीधी पड़ती हैं। सूर्य का यह प्रकाश उत्तरी गोलार्ध पर सबसे ज्यादा समय तक रहता है। यही वजह है कि यहां साल का सबसे लंबा दिन होता है। इसके साथ ही इस तारीख को साल की सबसे छोटी रात होती है।
यह पूरी तरह से एक प्राकृतिक और खगोलीय भौगोलिक घटना चक्र है। दुनिया भर के वैज्ञानिक इस दिन पृथ्वी की गति का अध्ययन करते हैं। बच्चों को भी स्कूलों में इस घटना के बारे में पढ़ाया जाता है।
![21 June Longest Day]()
कैसे तय होगा 120 दिनों की
धार्मिक मान्यताओं में भी इस दिन का बहुत बड़ा स्थान बताया गया है। ज्योतिषियों के मुताबिक, इस दिन सूर्यदेव अपनी दिशा में बदलाव करते हैं। पंडितों का कहना है कि सूर्य इस दिन उत्तरायण से दक्षिणायन होते हैं। इसके अगले दिन यानी 22 जून को सूर्य आद्रा नक्षत्र में जाएंगे।
सूर्य का आद्रा नक्षत्र में प्रवेश रात 8 बजकर 32 मिनट पर होगा। आद्रा नक्षत्र के स्वामी भगवान रुद्र यानी शिवजी माने जाते हैं। इन्हें आंधी, तूफान और भारी वर्षा का मुख्य देवता कहा जाता है। सूर्य का इस नक्षत्र में जाना वर्षा ऋतु के आगमन का संकेत है।
पंडितों के मुताबिक, आठ नक्षत्र मिलकर पूरे वर्षा काल का चक्र चलाते हैं। यह वर्षा काल लगभग 120 दिनों की अवधि का होता है। इस बार के नक्षत्र संकेत दे रहे हैं कि देश में अच्छी बारिश होगी।
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बारिश के मौसम को समझने के लिए आठ नक्षत्रों (नक्षत्रों की चाल) का अध्ययन किया जाता है। इनमें आद्रा, पुनर्वसु, पुष्य, अश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी और हस्त शामिल हैं। इन सभी नक्षत्रों का अपना एक अलग महत्व और स्वरूप होता है।
ज्योतिष के मुताबिक, मघा नक्षत्र तक वर्षा अपनी युवा अवस्था में होती है। इसका मतलब है कि इस दौरान बहुत तेज और अच्छी बारिश होती है। इसके बाद पूर्वा फाल्गुनी और उत्तरा फाल्गुनी में यह बूढ़ी होने लगती है। इसका मतलब है कि बारिश की रफ्तार थोड़ी कम होने लगती है।
आखिर में हस्त नक्षत्र के साथ ही पूरे वर्षा काल का समापन होता है। इस बार इन सभी नक्षत्रों की स्थिति किसानों के लिए अनुकूल है। समय पर बारिश होने से फसलों की पैदावार बहुत अच्छी होने वाली है।
![पूरे साल में 21 जून का दिन ही क्यों सबसे बड़ा होता है, जानिए इसके पीछे का कारण - why 21st june is the biggest day in a year solstice northern hemisphere]()
इस खास अवधि में केवल सूर्य ही नहीं बल्कि बुध ग्रह भी चमकेगा। बुध ग्रह की स्थिति में भी बहुत बड़ा बदलाव होने जा रहा है। आगामी 27 जून को बुध ग्रह कर्क राशि में प्रवेश कर जाएगा। इससे पहले बुध वक्री होकर मिथुन राशि में गोचर करेगा।
मिथुन राशि में सूर्य और बुध दोनों एक साथ आकर बैठेंगे। इन दोनों ग्रहों के मिलने से बेहद शुभ बुधादित्य राजयोग बनेगा। इसके साथ ही बुध के अपनी राशि में होने से भद्र राजयोग बनेगा। इन दोनों राजयोगों को ज्योतिष में बहुत शक्तिशाली माना जाता है।
इन शुभ योगों (बुध और सूर्य की युति) के बनने से देश के कारोबार में तरक्की होगी। कृषि क्षेत्र के साथ-साथ व्यापार में भी बड़ा धन लाभ होगा। बाजार में रौनक आएगी और लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
धार्मिक ग्रंथों में इस समय को बहुत ही पवित्र माना गया है। मत्स्य पुराण के मुताबिक, यह समय देवताओं की पूजा के लिए उत्तम है। इस काल में की गई पूजा का फल कई गुना मिलता है।
पौराणिक कथाओं के मुताबिक, इसी काल में वैवस्वत मन्वंतर की शुरुआत हुई थी। इसलिए धार्मिक दृष्टि से यह समय बेहद शुभ और फलदायी होता है। इस दौरान लोग पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य करते हैं।
मत्स्य पुराण के अनुसार (सूर्य का राशि परिवर्तन) इस समय देव-आराधना का विशेष काल शुरू होता है। लोग अपने घरों में सुख-शांति के लिए विशेष अनुष्ठान करवाते हैं। यह समय आध्यात्मिक शांति और मानसिक ऊर्जा बढ़ाने के लिए सर्वश्रेष्ठ है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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इसके बाद रातें धीरे-धीरे लंबी होने लगेंगी और दिन छोटे होने लगेंगे। विज्ञान के मुताबिक, इस समय पृथ्वी सूर्य के सबसे नजदीक वाले कोण पर होती है। इस घटना को विज्ञान की भाषा में ग्रीष्म अयनांत (Summer Solstice) भी कहा जाता है। आम जनता के लिए यह दिन बहुत ही उत्सुकता भरा होता है।
इस दिन लोगों को काम करने के लिए दिन का ज्यादा समय मिलता है। मौसम में इस बदलाव के बाद गर्मी का असर भी कम होने लगता है। इस दिन के बाद से ही मानसून की हवाएं सक्रिय होने लगती हैं।
Longest Day of the Year 2023: क्यों 21 जून है साल का सबसे लंबा दिन, यहां परछाई भी छोड़ देती है साथ! - Longest Day of the Year 2023 Why June 21
क्या है सबसे बड़े दिन का असली वैज्ञानिक कारण
आज 21 जून को सूर्य की किरणें कर्क रेखा पर बिल्कुल सीधी पड़ती हैं। सूर्य का यह प्रकाश उत्तरी गोलार्ध पर सबसे ज्यादा समय तक रहता है। यही वजह है कि यहां साल का सबसे लंबा दिन होता है। इसके साथ ही इस तारीख को साल की सबसे छोटी रात होती है।
यह पूरी तरह से एक प्राकृतिक और खगोलीय भौगोलिक घटना चक्र है। दुनिया भर के वैज्ञानिक इस दिन पृथ्वी की गति का अध्ययन करते हैं। बच्चों को भी स्कूलों में इस घटना के बारे में पढ़ाया जाता है।
21 June Longest Day
कैसे तय होगा 120 दिनों की बारिश का हाल
सूर्य का आद्रा नक्षत्र में प्रवेश रात 8 बजकर 32 मिनट पर होगा। आद्रा नक्षत्र के स्वामी भगवान रुद्र यानी शिवजी माने जाते हैं। इन्हें आंधी, तूफान और भारी वर्षा का मुख्य देवता कहा जाता है। सूर्य का इस नक्षत्र में जाना वर्षा ऋतु के आगमन का संकेत है।
पंडितों के मुताबिक, आठ नक्षत्र मिलकर पूरे वर्षा काल का चक्र चलाते हैं। यह वर्षा काल लगभग 120 दिनों की अवधि का होता है। इस बार के नक्षत्र संकेत दे रहे हैं कि देश में अच्छी बारिश होगी।
21 June Longest Day
कौन से आठ नक्षत्र तय करेंगे मानसून का पूरा स्वरूप
ज्योतिष के मुताबिक, मघा नक्षत्र तक वर्षा अपनी युवा अवस्था में होती है। इसका मतलब है कि इस दौरान बहुत तेज और अच्छी बारिश होती है। इसके बाद पूर्वा फाल्गुनी और उत्तरा फाल्गुनी में यह बूढ़ी होने लगती है। इसका मतलब है कि बारिश की रफ्तार थोड़ी कम होने लगती है।
आखिर में हस्त नक्षत्र के साथ ही पूरे वर्षा काल का समापन होता है। इस बार इन सभी नक्षत्रों की स्थिति किसानों के लिए अनुकूल है। समय पर बारिश होने से फसलों की पैदावार बहुत अच्छी होने वाली है।
पूरे साल में 21 जून का दिन ही क्यों सबसे बड़ा होता है, जानिए इसके पीछे का कारण - why 21st june is the biggest day in a year solstice northern hemisphere
बुधादित्य-भद्र राजयोग से क्या असर पड़ेगा
मिथुन राशि में सूर्य और बुध दोनों एक साथ आकर बैठेंगे। इन दोनों ग्रहों के मिलने से बेहद शुभ बुधादित्य राजयोग बनेगा। इसके साथ ही बुध के अपनी राशि में होने से भद्र राजयोग बनेगा। इन दोनों राजयोगों को ज्योतिष में बहुत शक्तिशाली माना जाता है।
इन शुभ योगों (बुध और सूर्य की युति) के बनने से देश के कारोबार में तरक्की होगी। कृषि क्षेत्र के साथ-साथ व्यापार में भी बड़ा धन लाभ होगा। बाजार में रौनक आएगी और लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
मत्स्य पुराण में क्या कहा गया है
पौराणिक कथाओं के मुताबिक, इसी काल में वैवस्वत मन्वंतर की शुरुआत हुई थी। इसलिए धार्मिक दृष्टि से यह समय बेहद शुभ और फलदायी होता है। इस दौरान लोग पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य करते हैं।
मत्स्य पुराण के अनुसार (सूर्य का राशि परिवर्तन) इस समय देव-आराधना का विशेष काल शुरू होता है। लोग अपने घरों में सुख-शांति के लिए विशेष अनुष्ठान करवाते हैं। यह समय आध्यात्मिक शांति और मानसिक ऊर्जा बढ़ाने के लिए सर्वश्रेष्ठ है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
FAQ
- 21 जून को साल का सबसे लंबा दिन क्यों माना जाता है?
21 जून को पृथ्वी अपने अक्ष पर झुकाव के कारण सूर्य के सामने ऐसी स्थिति में होती है जहां सूर्य की किरणें कर्क रेखा पर सीधी पड़ती हैं। इसलिए उत्तरी गोलार्ध में दिन सबसे लंबा होता है। - सूर्य के आद्रा नक्षत्र में प्रवेश करने का क्या महत्व है?
सूर्य का आद्रा नक्षत्र में प्रवेश वर्षा ऋतु की शुरुआत का प्रतीक है। इसके स्वामी भगवान रुद्र हैं, और ज्योतिष में इसे अच्छी बारिश का मुख्य संकेतक माना जाता है। - ज्योतिष में बुधादित्य और भद्र राजयोग का बिजनेस पर क्या असर बताया गया है?
सूर्य और बुध की युति से बनने वाले बुधादित्य और भद्र राजयोग के कारण बाजार में सकारात्मक बदलाव आते हैं। इससे कृषि और व्यापार क्षेत्र में भारी समृद्धि के आसार बनते हैं।
इस मंदिर में महिलाएं पीरियड्स में भी करती हैं पूजा, गर्भगृह में पुरुषों का प्रवेश वर्जित
गीता में कृष्ण ने क्यों कहा मैं वृक्षों में पीपल हूं, जानें पीपल पूजा के नियम
अब फ्री में नहीं देख सकेंगे उज्जैन महाकाल मंदिर में लाइट एंड साउंड शो, लगेगा टिकट
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