30 या 31 मई? कब है अधिक मास की पूर्णिमा, नोट करें स्नान-दान का शुभ मुहूर्त
Kaushiki | May 23, 2026, 15:52 IST
Adhik Maas Purnima 2026
साल 2026 में अधिक मास की पूर्णिमा तिथि 30 और 31 मई दोनों दिन पड़ रही है। ज्योतिषविदों के मुताबिक, पूर्णिमा का व्रत 30 मई को रखा जाएगा। वहीं, नदियों में पवित्र स्नान और दान-पुण्य का काम 31 मई को करना बेहद उत्तम रहेगा।
Adhik Maas Purnima 2026: क्या आप भी इस बार (2026) अधिक मास की पूर्णिमा की सही तारीख को लेकर परेशान हैं? इस साल ये तिथि दो दिनों में बंटने के कारण लोग उलझन में हैं कि व्रत कब रखें और स्नान-दान कब करें।
हिंदू पंचांग के मुताबिक, पुरुषोत्तम मास की यह पूर्णिमा आपके जीवन के सारे कष्टों को दूर कर सकती है। इस विशेष दिन भगवान विष्णु और चंद्र देव की असीम कृपा बरसती है। आइए जानें पूर्णिमा के लिए कौन सा दिन सही रहेगा और इस दिन कौन से उपाय कर सकते हैं।
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हिंदू कैलेंडर में इस बार अधिक मास की पूर्णिमा को लेकर चर्चा है। लोग असमंजस में हैं कि यह 30 मई को है या 31 मई को। इंटरनेट पर इसे खूब सर्च किया जा रहा है। पंचांग के मुताबिक, पूर्णिमा तिथि आज 30 मई को सुबह 11 बजकर 57 मिनट पर शुरू होगी।
ये तिथि अगले दिन यानी 31 मई को दोपहर 02 बजकर 14 मिनट तक रहेगी। इस वजह से ये दोनों दिनों में बंट गई है। ऐसे में विद्वानों का कहना है कि पूर्णिमा का व्रत 30 मई को ही रखा जाना चाहिए। इसी दिन रात को चंद्रमा की पूजा भी की जाएगी। इसके बाद अगले दिन 31 मई की सुबह स्नान और दान करना सबसे सही रहेगा।
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हिंदू धर्म में अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। पुरुषोत्तम भगवान विष्णु का ही एक नाम है। इस महीने के स्वामी खुद भगवान विष्णु हैं। इसलिए इसका महत्व बहुत ज्यादा बढ़ जाता है।
इसके पीछे एक बेहद रोचक पौराणिक कथा भी जुड़ी हुई है। पुराने समय में सूर्य और चंद्र कैलेंडर के तालमेल को बिठाने के लिए इस महीने को बनाया गया। लेकिन इस अतिरिक्त महीने (अधिक मास) का कोई स्वामी नहीं था।
स्वामी न होने के कारण सभी लोग इसकी निंदा करते थे। इससे दुखी होकर यह महीना भगवान विष्णु के पास गया। उसने अपनी परेशानी भगवान श्री हरि को बताई। श्री हरि को उस पर दया आ गई।
भगवान विष्णु ने इस महीने को अपना नाम दे दिया। उन्होंने इसे पुरुषोत्तम मास कहा। उन्होंने वरदान दिया कि इस महीने में की गई पूजा का फल कई गुना ज्यादा मिलेगा। तभी से इसकी पूर्णिमा बहुत खास बन गई।
इस दिन चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से पूरा होता है। धरती पर सकारात्मक ऊर्जा का संचार बहुत बढ़ जाता है। इस दिन की गई साधना सीधे ईश्वर तक पहुँचती है। मन की हर इच्छा पूरी होती है।
![Adhik Maas Purnima]()
अधिक मास की पूर्णिमा पर
शास्त्रों के मुताबिक, इस शुभ दिन पर सुबह जल्दी उठना बहुत जरूरी है। सुबह उठकर सबसे पहले पूजा का संकल्प लें। यदि संभव हो, तो किसी पवित्र नदी में स्नान करने जरूर जाएं। अगर नदी न हो, तो घर पर ही नहाएं।
घर के नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिला लें। स्नान करने से पहले पानी को सिर से लगाकर प्रणाम करें। इसके बाद ही साफ और हल्के रंग के कपड़े पहनें। फिर सूर्य देव को जल अर्पित करें।
अब अपने घर के मंदिर में भगवान विष्णु की पूजा शुरू करें। उन्हें पीले रंग के फल और पीली मिठाइयां चढ़ाएं। धूप, दीप और सुगंधित चंदन भी अर्पित करें। पीले कपड़े पहनकर पूजा करना और भी शुभ होता है।
इसके बाद भगवान श्री हरि के मंत्रों का शांत मन से जाप करें। आप चाहें तो सत्यनारायण भगवान की कथा भी सुन सकते हैं। इस तरह पूजा करने से घर की सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं।
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शास्त्रों के मुताबिक, यदि आपके शादीशुदा जीवन में तनाव रहता है, तो यह दिन बहुत काम का है। इस दिन कुछ आसान उपाय करके आप खुशियां पा सकते हैं। सुबह नहाने के बाद किसी बरगद या पीपल के पेड़ के पास जाएं।
पीपल या बरगद की जड़ में साफ जल अर्पित करें। इसके बाद पेड़ के चारों तरफ पीला धागा बांधें। धागा बांधते समय मन में अपने जीवनसाथी के लिए अच्छा सोचें। पेड़ के पास बैठकर मंत्रों का जाप करें।
वहाँ बैठकर "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें। आप चाहें तो "ॐ गौरीशंकराय नमः" मंत्र का भी जाप कर सकते हैं। इससे वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है। आपसी रिश्ते और ज्यादा मजबूत होते हैं।
इस दिन प्रकृति की सेवा करना भी बहुत अच्छा माना जाता है। अपने हाथों से एक छोटा पौधा जरूर लगाएं। गरीब लोगों को अन्न और वस्त्र का दान करें। इससे आपके परिवार में हमेशा शांति बनी रहेगी।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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हिंदू पंचांग के मुताबिक, पुरुषोत्तम मास की यह पूर्णिमा आपके जीवन के सारे कष्टों को दूर कर सकती है। इस विशेष दिन भगवान विष्णु और चंद्र देव की असीम कृपा बरसती है। आइए जानें पूर्णिमा के लिए कौन सा दिन सही रहेगा और इस दिन कौन से उपाय कर सकते हैं।
Adhik Maas Purnima 2026 Date: ज्येष्ठ अधिकमास की पूर्णिमा कब है? 2 दिन का पड़ा चक्कर, जानें व्रत, स्नान-दान तारीख और मुहूर्त - News18 हिंदी
कब रखें अधिक मास की पूर्णिमा
ये तिथि अगले दिन यानी 31 मई को दोपहर 02 बजकर 14 मिनट तक रहेगी। इस वजह से ये दोनों दिनों में बंट गई है। ऐसे में विद्वानों का कहना है कि पूर्णिमा का व्रत 30 मई को ही रखा जाना चाहिए। इसी दिन रात को चंद्रमा की पूजा भी की जाएगी। इसके बाद अगले दिन 31 मई की सुबह स्नान और दान करना सबसे सही रहेगा।
Adhik Maas Purnima 2026: 30 या 31 मई, कब है अधिक मास की पूर्णिमा? जानें सही तिथि और शुभ मुहू्र्त - adhik maas purnima 2026 date 30 or 31 may shubh muhurt puja vidhi upay tvisu - AajTak
पुरुषोत्तम मास की पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
इसके पीछे एक बेहद रोचक पौराणिक कथा भी जुड़ी हुई है। पुराने समय में सूर्य और चंद्र कैलेंडर के तालमेल को बिठाने के लिए इस महीने को बनाया गया। लेकिन इस अतिरिक्त महीने (अधिक मास) का कोई स्वामी नहीं था।
स्वामी न होने के कारण सभी लोग इसकी निंदा करते थे। इससे दुखी होकर यह महीना भगवान विष्णु के पास गया। उसने अपनी परेशानी भगवान श्री हरि को बताई। श्री हरि को उस पर दया आ गई।
भगवान विष्णु ने इस महीने को अपना नाम दे दिया। उन्होंने इसे पुरुषोत्तम मास कहा। उन्होंने वरदान दिया कि इस महीने में की गई पूजा का फल कई गुना ज्यादा मिलेगा। तभी से इसकी पूर्णिमा बहुत खास बन गई।
इस दिन चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से पूरा होता है। धरती पर सकारात्मक ऊर्जा का संचार बहुत बढ़ जाता है। इस दिन की गई साधना सीधे ईश्वर तक पहुँचती है। मन की हर इच्छा पूरी होती है।
Adhik Maas Purnima
अधिक मास की पूर्णिमा पर भगवान विष्णु की पूजा
घर के नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिला लें। स्नान करने से पहले पानी को सिर से लगाकर प्रणाम करें। इसके बाद ही साफ और हल्के रंग के कपड़े पहनें। फिर सूर्य देव को जल अर्पित करें।
अब अपने घर के मंदिर में भगवान विष्णु की पूजा शुरू करें। उन्हें पीले रंग के फल और पीली मिठाइयां चढ़ाएं। धूप, दीप और सुगंधित चंदन भी अर्पित करें। पीले कपड़े पहनकर पूजा करना और भी शुभ होता है।
इसके बाद भगवान श्री हरि के मंत्रों का शांत मन से जाप करें। आप चाहें तो सत्यनारायण भगवान की कथा भी सुन सकते हैं। इस तरह पूजा करने से घर की सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं।
Jyeshtha Adhik Purnima 2026: ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा की तारीख को लेकर हो रहा कंफ्यूजन यहां तुरंत दूर करें, आइए जानें कब होगी ये दुर्लभ पूर्णिमा - jyeshtha adhik ...
शांति के लिए कौन से उपाय करें
पीपल या बरगद की जड़ में साफ जल अर्पित करें। इसके बाद पेड़ के चारों तरफ पीला धागा बांधें। धागा बांधते समय मन में अपने जीवनसाथी के लिए अच्छा सोचें। पेड़ के पास बैठकर मंत्रों का जाप करें।
वहाँ बैठकर "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें। आप चाहें तो "ॐ गौरीशंकराय नमः" मंत्र का भी जाप कर सकते हैं। इससे वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है। आपसी रिश्ते और ज्यादा मजबूत होते हैं।
इस दिन प्रकृति की सेवा करना भी बहुत अच्छा माना जाता है। अपने हाथों से एक छोटा पौधा जरूर लगाएं। गरीब लोगों को अन्न और वस्त्र का दान करें। इससे आपके परिवार में हमेशा शांति बनी रहेगी।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
FAQ
- साल 2026 में अधिक मास की पूर्णिमा कब है और व्रत किस दिन रखा जाएगा?
साल 2026 में अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) की पूर्णिमा तिथि 30 मई और 31 मई दोनों दिन रहेगी। पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 30 मई 2026 को सुबह 11:57 बजे शुरू हो जाएगी, इसलिए पूर्णिमा का व्रत 30 मई को ही रखा जाएगा। इसी रात को चंद्र देव की पूजा और अर्घ्य देने का विधान पूरा किया जाएगा। - अधिक मास पूर्णिमा पर पवित्र नदी में स्नान और दान करने का
शुभ मुहूर्त क्या है?
अधिक मास पूर्णिमा पर उदयातिथि के महत्व के कारण स्नान और दान का कार्य 31 मई 2026 को किया जाएगा। इस दिन पूर्णिमा तिथि दोपहर 02:14 बजे तक रहेगी। सुबह के समय किसी पवित्र नदी में या घर के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना और ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को पीले अनाज, वस्त्र और मिठाइयों का दान करना अत्यंत फलदायी रहेगा। - अधिक मास की पूर्णिमा पर क्या उपाय करने चाहिए?
शास्त्रों के मुताबिक, वैवाहिक जीवन में खुशहाली और स्थिरता के लिए अधिक मास की पूर्णिमा के दिन पीपल या बरगद के पेड़ की जड़ में जल अर्पित करना चाहिए। इसके बाद वृक्ष के चारों ओर परिक्रमा करते हुए श्रद्धापूर्वक पीला सूती धागा बांधना चाहिए और "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" या "ॐ गौरीशंकराय नमः" मंत्र का जाप करना चाहिए। इस दिन पौधे लगाने से भी पारिवारिक क्लेश दूर होते हैं।
पूजा की थाली से लेकर मन की शांति तक, जानें कपूर जलाने के फायदे
चारधाम यात्रा में क्या है केदारनाथ मंदिर का महत्व, भगवान शिव से जुड़ी है मान्यताएं
चारधाम यात्रा में उमड़ रहा आस्था का सैलाब, खराब मौसम भी नहीं रोक पाया श्रद्धालुओं के कदम
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