आज मनाया जाएगा भाई-बहन के प्रेम का पर्व Bhai Dooj 2025, जानें तिलक करने का सही समय
Kaushiki | Oct 22, 2025, 10:14 IST
hindu-festivals-2025-bhai-dooj-2025-date-shubh-muhurat-tilak-time
भाई दूज का त्योहार इस बार 23 अक्टूबर को मनाया जाएगा। ये त्योहार भाई-बहन के गहरे प्यार और भाई की लंबी उम्र की दुआ से जुड़ा होता है। इस दिन बहनें अपने भाई को तिलक लगाती हैं और उसकी खुशियों व अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हैं।
Latest Religious News:दिवाली की रौनक खत्म होते ही हर किसी को इंतजार होता है भाई-बहन के प्यार भरे त्योहार भाई दूज का। यह पर्व न केवल प्रेम का प्रतीक है, बल्कि इसका संबंध धर्मराज यम और उनकी बहन यमुना से भी जुड़ा है।
इसीलिए इसे 'यम द्वितीया' भी कहा जाता है। यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। द्वितीया तिथि का उदय आज 23 अक्टूबर को हो रहा है, इसलिए इसी दिन भाई दूज मनाना शास्त्र सम्मत है। वैदिक पंचांग के आधार पर यहां जानें सही तिथि और तिलक लगाने का सबसे शुभ समय।
ये खबर भी पढ़ें...
आज धूमधाम से मनाया जाएगा गोवर्धन पर्व , जानें गौ माता की पूजा विधि और इंद्र के अहंकार की कहानी
आचार्य आनंद भारद्वाज के मुताबिक, भाई दूज का पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है।
बहनें अपने भाई की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए जो तिलक लगाती हैं, उसका सबसे ज्यादा फल शुभ मुहूर्त में ही मिलता है। 23 अक्टूबर को तिलक लगाने का सबसे सही समय है:
इस समय बहनें पूरे विधि-विधान से भाई को तिलक कर सकती हैं, आरती उतार सकती हैं और उनके कल्याण की कामना करते हुए पूजा-अर्चना कर सकती हैं।
गोवर्धन पूजा 2025 : गोबर से पहाड़ बनाने की परंपरा क्यों? जानें इसके पीछे का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व
भाई दूज (bhai dooj) का त्योहार भाई और बहन के रिश्ते की मजबूती और प्यार का प्रतीक है। इसके पीछे एक पौराणिक कहानी है:
माना जाता है कि मृत्यु के देवता यमराज अपनी बहन यमुना से बहुत प्यार करते थे, लेकिन अपने काम में व्यस्तता के कारण उनसे मिलने नहीं जा पाते थे।
एक दिन जब कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर पहुंचे, तो यमुना ने अपने भाई का खूब सत्कार किया। उन्हें प्रेम से भोजन कराया और माथे पर तिलक लगाकर उनकी आरती उतारी। जाते समय यमराज ने यमुना से वरदान मांगने को कहा।
यमुना ने मांगा कि इस दिन हर साल आप मेरे घर आओ और जो भाई इस दिन अपनी बहन से तिलक करवाए, उसे अकाल मृत्यु का भय न हो। यमराज ने यह वरदान दिया और तभी से इस तिथि को यम द्वितीया और भाई दूज के रूप में मनाया जाने लगा।
![भाई दूज 2025: पढ़ें भाई दूज का महत्व और अर्थ | MyPandit]()
इस दिन तिलक करवाने वाले भाई को अकाल मृत्यु का भय नहीं सताता और बहन के सौभाग्य की वृद्धि होती है। तिलक करने के बाद बहनें भाई को प्रेम स्वरूप नारियल का गोला (सूखा नारियल) उपहार में देती हैं।
पौराणिक कथा के मुताबिक यमुना ने भी अपने भाई यमराज को नारियल ही भेंट किया था। यह पर्व हमें सिखाता है कि रिश्ते सिर्फ खून के नहीं होते, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव से भी बनते हैं।
सनातन धर्म में नारियल को 'श्रीफल' भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है 'शुभ और पवित्र फल'। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, नारियल को बहुत शुद्ध माना जाता है और इसे भगवान गणेश व माता लक्ष्मी को भी अर्पित किया जाता है।
भाई दूज पर बहन जब भाई को नारियल देती है, तो इसका मतलब है कि वह उसके जीवन में पवित्रता और शुभता का वास चाहती है। इसे रक्षा का प्रतीक भी माना जाता है, जो भाई को सभी संकटों से बचाता है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें। धार्मिक अपडेट | Hindu News
ये खबर भी पढ़ें...
दिवाली की रात क्यों की जाती है उल्लू की पूजा? जानें इस पक्षी का आध्यात्मिक महत्व
प्राचीन काल में छठ पूजा को किस नाम से जाना जाता था? जानें पूजा से जुड़ी वो बात जो कर देगी हैरान
इसीलिए इसे 'यम द्वितीया' भी कहा जाता है। यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। द्वितीया तिथि का उदय आज 23 अक्टूबर को हो रहा है, इसलिए इसी दिन भाई दूज मनाना शास्त्र सम्मत है। वैदिक पंचांग के आधार पर यहां जानें सही तिथि और तिलक लगाने का सबसे शुभ समय।
ये खबर भी पढ़ें...
आज धूमधाम से मनाया जाएगा गोवर्धन पर्व , जानें गौ माता की पूजा विधि और इंद्र के अहंकार की कहानी
भाई दूज 2025 की सही तिथि क्या है
द्वितीया तिथि का आरंभ: 22 अक्टूबर 2025, रात 8 बजकर 17 मिनट पर हुआ। द्वितीया तिथि का समापन: 23 अक्टूबर 2025, रात 10 बजकर 47 मिनट कर रहेगा।
तिलक लगाने का सबसे शुभ मुहूर्त
भाई को टीका करने का मुहूर्त
|
भाई दूज पूजा विधि
- बहनें सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा की थाली तैयार करें, जिसमें चावल, रोली/कुमकुम, मिठाई, नारियल, सुपारी, और दीपक रखें।
- भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बिठाएं।
- बहन सबसे पहले भाई के माथे पर रोली/कुमकुम का तिलक लगाएं।
- तिलक के ऊपर चावल (अक्षत) लगाएं।
- दीपक जलाकर भाई की आरती उतारें और उनकी लंबी उम्र की कामना करें।
- भाई को मिठाई खिलाएं और सूखा नारियल (गोला) भेंट करें।
- भाई अपनी सामर्थ्य अनुसार बहन को प्रेम स्वरूप उपहार या दक्षिणा दें।
- यम और यमुना की भाई दूज कथा पढ़ें या सुनें।
गोवर्धन पूजा 2025 : गोबर से पहाड़ बनाने की परंपरा क्यों? जानें इसके पीछे का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व
क्यों मनाया जाता है भाई दूज
माना जाता है कि मृत्यु के देवता यमराज अपनी बहन यमुना से बहुत प्यार करते थे, लेकिन अपने काम में व्यस्तता के कारण उनसे मिलने नहीं जा पाते थे।
एक दिन जब कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर पहुंचे, तो यमुना ने अपने भाई का खूब सत्कार किया। उन्हें प्रेम से भोजन कराया और माथे पर तिलक लगाकर उनकी आरती उतारी। जाते समय यमराज ने यमुना से वरदान मांगने को कहा।
यमुना ने मांगा कि इस दिन हर साल आप मेरे घर आओ और जो भाई इस दिन अपनी बहन से तिलक करवाए, उसे अकाल मृत्यु का भय न हो। यमराज ने यह वरदान दिया और तभी से इस तिथि को यम द्वितीया और भाई दूज के रूप में मनाया जाने लगा।
भाई दूज 2025: पढ़ें भाई दूज का महत्व और अर्थ | MyPandit
इस दिन तिलक करवाने वाले भाई को अकाल मृत्यु का भय नहीं सताता और बहन के सौभाग्य की वृद्धि होती है। तिलक करने के बाद बहनें भाई को प्रेम स्वरूप नारियल का गोला (सूखा नारियल) उपहार में देती हैं।
पौराणिक कथा के मुताबिक यमुना ने भी अपने भाई यमराज को नारियल ही भेंट किया था। यह पर्व हमें सिखाता है कि रिश्ते सिर्फ खून के नहीं होते, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव से भी बनते हैं।
सनातन धर्म में नारियल को 'श्रीफल' भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है 'शुभ और पवित्र फल'। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, नारियल को बहुत शुद्ध माना जाता है और इसे भगवान गणेश व माता लक्ष्मी को भी अर्पित किया जाता है।
भाई दूज पर बहन जब भाई को नारियल देती है, तो इसका मतलब है कि वह उसके जीवन में पवित्रता और शुभता का वास चाहती है। इसे रक्षा का प्रतीक भी माना जाता है, जो भाई को सभी संकटों से बचाता है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें। धार्मिक अपडेट | Hindu News
ये खबर भी पढ़ें...
दिवाली की रात क्यों की जाती है उल्लू की पूजा? जानें इस पक्षी का आध्यात्मिक महत्व
प्राचीन काल में छठ पूजा को किस नाम से जाना जाता था? जानें पूजा से जुड़ी वो बात जो कर देगी हैरान
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari