पुरी जगन्नाथ मंदिर में बिना कुकर कैसे बनता है महाप्रसाद, एक चूल्हे पर रखे जाते हैं 7 बर्तन
Kaushiki | Jul 02, 2026, 13:17 IST
Jagannath Temple Kitchen
ओडिशा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर की रसोई दुनिया में सबसे बड़ी है। यहां एक चूल्हे पर सात बर्तन एक के ऊपर एक रखकर प्रसाद पकता है। इसमें सबसे ऊपर वाले बर्तन का भोजन सबसे पहले पक जाता है, जो प्राचीन विज्ञान का बेजोड़ उदाहरण है।
Jagannath Rath Yatra: ओडिशा के पुरी में स्थित प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर अपने अनसुलझे रहस्यों के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। इस साल 16 जुलाई से यहां की विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा शुरू होने जा रही है। इस पावन मौके पर मंदिर की विशाल रसोई का एक अनोखा चमत्कार हर तरफ चर्चा में है।
यहां भगवान के महाप्रसाद को पकाने के लिए एक ही चूल्हे पर सात मिट्टी के बर्तनों को एक के ऊपर एक रखा जाता है। विज्ञान के नियमों के बिल्कुल उलट, यहां सबसे ऊपर रखे बर्तन का भोजन सबसे पहले पककर तैयार होता है। आइए जानते हैं आस्था के इस दिव्य चमत्कार के पीछे छिपी प्राचीन भारतीय इंजीनियरिंग का असली सच।
![Jagannath Rath Yatra]()
भगवान जगन्नाथ के मंदिर की रसोई को दुनिया की सबसे बड़ी रसोई कहते हैं। यहां हर दिन हजारों-लाखों भक्तों के लिए महाप्रसाद तैयार किया जाता है। इस विशाल रसोई में भोजन पकाने के लिए पारंपरिक चूल्हों का उपयोग होता है। आज भी यहां सूखी लकड़ियों की आग से ही खाना पकाया जाता है।
यहां महाप्रसाद पकाने का तरीका बेहद अनोखा और हैरान करने वाला है। रसोइये चूल्हे पर एक के ऊपर एक सात मिट्टी के बर्तन रखते हैं। ये सभी सात बर्तन बिल्कुल सीधी कतार में ऊपर तक रखे जाते हैं। विज्ञान के नियम के मुताबिक, नीचे वाले बर्तन में गर्मी पहले पहुंचनी चाहिए।
![Jagannath Rath Yatra: 7 बर्तन, एक चूल्हा...हैरान कर देने वाला है जगन्नाथ मंदिर की रसोई का ये रहस्य - jagannath mandir puri rasoi mystery 7 pots science steam mahaprasad secret tvisg - AajTak]()
अद्भुत बात यह है कि यहां सबसे नीचे का खाना पहले नहीं पकता। चूल्हे पर रखे सातवें नंबर यानी सबसे ऊपर का भोजन पहले पकता है। इसके बाद छठे और पांचवें बर्तन का खाना धीरे-धीरे पकने लगता है। सबसे आखिर में सबसे नीचे वाले बर्तन का खाना पककर तैयार होता है।
यह प्रक्रिया देखने में किसी बड़े दिव्य चमत्कार की तरह लगती है। लेकिन हमारे पूर्वजों ने इसके पीछे एक बेहतरीन वैज्ञानिक सोच छिपाई थी। प्राचीन भारतीय इंजीनियरों की इस कला को स्टीम ट्रैप तकनीक कहा जाता है। यह तकनीक भाप के सही दबाव के सिद्धांत पर काम करती है।
![जगन्नाथ रथयात्रा : पुरी मंदिर के 25 चमत्कार और रहस्य]()
इन सातों मिट्टी के बर्तनों की बनावट बहुत ही विशेष होती है। इन्हें इस तरह गढ़ा जाता है कि भाप सीधे ऊपर की ओर बढ़ती है। नीचे से उठने वाली गर्म भाप किनारों से होकर सबसे ऊपर पहुंचती है। सबसे ऊपर वाले बर्तन का ढक्कन पूरी तरह से बंद रखा जाता है।
ढक्कन बंद होने के कारण गर्म भाप सबसे ऊपर ही जमा हो जाती है। वहां भाप का दबाव बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। यह दबाव बिल्कुल आज के मॉडर्न प्रेशर कुकर की तरह काम करता है। ज्यादा दबाव के कारण ही सबसे ऊपर का खाना सबसे पहले पक जाता है।
इस तकनीक से हमारे पूर्वज विज्ञान से भली-भांति फेमिलिअर थे। उन्हें मिट्टी की क्षमता और ऊष्मा के सिद्धांतों का पूरा ज्ञान था। बिना किसी आधुनिक मशीन के उन्होंने इतना बेहतरीन ढांचा तैयार किया था। आज के वैज्ञानिक भी इस प्राचीन सोच को देखकर दंग रह जाते हैं।
![उल्टी दिशा में उड़ता झंडा और अद्भुत नीलचक्र... जानिए जगन्नाथ पुरी के वो 5 रहस्य जिनका जवाब विज्ञान भी नहीं दे पाया | Jagannath mandir mystery kitchen prasad temple ...]()
श्री जगन्नाथ मंदिर की इस अद्भुत रसोई और महाप्रसाद को लेकर हिंदू धर्मग्रंथों में पौराणिक कथा मिलती है। मान्यताओं के मुताबिक, भगवान जगन्नाथ की इस भव्य रसोई में बनने वाले भोजन की मुख्य मार्गदर्शक और मालकिन स्वयं माता लक्ष्मी हैं। कथा के मुताबिक, भगवान जगन्नाथ साक्षात भगवान विष्णु के रूप हैं।
ऐसा माना जाता है कि महाप्रभु जगन्नाथ हर दिन चारों धाम की यात्रा करते हैं। वे बद्रीनाथ में स्नान करते हैं, द्वारका में वस्त्र बदलते हैं, पुरी में भोजन करते हैं और रामेश्वरम में विश्राम करते हैं। चूंकि पुरी भगवान का भोजन स्थल है, इसलिए यहां की रसोई का दायित्व माता लक्ष्मी ने खुद संभाला है।
पौराणिक कथा कहती है कि रसोई में रसोइये तो केवल माध्यम हैं। मान्यताओं के मुताबिक, भोजन पकाते समय माता लक्ष्मी अदृश्य रूप से वहां उपस्थित रहती हैं। वे स्वयं अन्नपूर्णा बनकर हर बर्तन और स्वाद की देखरेख करती हैं। यही कारण है कि जैसे ही इस भोजन को भगवान जगन्नाथ को अर्पित किया जाता है, यह साधारण भोजन से महाप्रसाद बन जाता है।
भोग लगते ही इसमें से एक ऐसी अलौकिक और दिव्य खुशबू आने लगती है, जो इंसानी हाथों से बनना असंभव है। माता लक्ष्मी की इसी असीम कृपा के कारण यहां का भोजन कभी कम नहीं पड़ता।
![Jagannath Rath Yatra 2023: रोजाना नए मिट्टी के बर्तनों से बनाया जाता है महाप्रसाद, इन दो कुओं का पानी होता है इस्तेमाल]()
एमपी में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की ओंकारेश्वर में पूजा-अर्चना, मोहन सरकार के काम को सराहा
आज से शुरू हुआ आषाढ़ का महीना, सूर्य और भगवान वामन की पूजा का है खास महत्व
शिवलिंग की पूजा से मिलते हैं अद्भुत लाभ, जानें शिव महापुराण में क्या है लिखा
आखिर क्यों दूर्वा के बिना अधूरी है बप्पा की पूजा, कश्यप ऋषि से जुड़ा है राज
यहां भगवान के महाप्रसाद को पकाने के लिए एक ही चूल्हे पर सात मिट्टी के बर्तनों को एक के ऊपर एक रखा जाता है। विज्ञान के नियमों के बिल्कुल उलट, यहां सबसे ऊपर रखे बर्तन का भोजन सबसे पहले पककर तैयार होता है। आइए जानते हैं आस्था के इस दिव्य चमत्कार के पीछे छिपी प्राचीन भारतीय इंजीनियरिंग का असली सच।
Jagannath Rath Yatra
दुनिया की सबसे बड़ी रसोई
यहां महाप्रसाद पकाने का तरीका बेहद अनोखा और हैरान करने वाला है। रसोइये चूल्हे पर एक के ऊपर एक सात मिट्टी के बर्तन रखते हैं। ये सभी सात बर्तन बिल्कुल सीधी कतार में ऊपर तक रखे जाते हैं। विज्ञान के नियम के मुताबिक, नीचे वाले बर्तन में गर्मी पहले पहुंचनी चाहिए।
Jagannath Rath Yatra: 7 बर्तन, एक चूल्हा...हैरान कर देने वाला है जगन्नाथ मंदिर की रसोई का ये रहस्य - jagannath mandir puri rasoi mystery 7 pots science steam mahaprasad secret tvisg - AajTak
जगन्नाथ मंदिर की रसोई का विज्ञान
यह प्रक्रिया देखने में किसी बड़े दिव्य चमत्कार की तरह लगती है। लेकिन हमारे पूर्वजों ने इसके पीछे एक बेहतरीन वैज्ञानिक सोच छिपाई थी। प्राचीन भारतीय इंजीनियरों की इस कला को स्टीम ट्रैप तकनीक कहा जाता है। यह तकनीक भाप के सही दबाव के सिद्धांत पर काम करती है।
जगन्नाथ रथयात्रा : पुरी मंदिर के 25 चमत्कार और रहस्य
कैसे काम करती है स्टीम ट्रैप तकनीक
ढक्कन बंद होने के कारण गर्म भाप सबसे ऊपर ही जमा हो जाती है। वहां भाप का दबाव बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। यह दबाव बिल्कुल आज के मॉडर्न प्रेशर कुकर की तरह काम करता है। ज्यादा दबाव के कारण ही सबसे ऊपर का खाना सबसे पहले पक जाता है।
इस तकनीक से हमारे पूर्वज विज्ञान से भली-भांति फेमिलिअर थे। उन्हें मिट्टी की क्षमता और ऊष्मा के सिद्धांतों का पूरा ज्ञान था। बिना किसी आधुनिक मशीन के उन्होंने इतना बेहतरीन ढांचा तैयार किया था। आज के वैज्ञानिक भी इस प्राचीन सोच को देखकर दंग रह जाते हैं।
उल्टी दिशा में उड़ता झंडा और अद्भुत नीलचक्र... जानिए जगन्नाथ पुरी के वो 5 रहस्य जिनका जवाब विज्ञान भी नहीं दे पाया | Jagannath mandir mystery kitchen prasad temple ...
जगन्नाथ मंदिर के महाप्रसाद की कथा
ऐसा माना जाता है कि महाप्रभु जगन्नाथ हर दिन चारों धाम की यात्रा करते हैं। वे बद्रीनाथ में स्नान करते हैं, द्वारका में वस्त्र बदलते हैं, पुरी में भोजन करते हैं और रामेश्वरम में विश्राम करते हैं। चूंकि पुरी भगवान का भोजन स्थल है, इसलिए यहां की रसोई का दायित्व माता लक्ष्मी ने खुद संभाला है।
पौराणिक कथा कहती है कि रसोई में रसोइये तो केवल माध्यम हैं। मान्यताओं के मुताबिक, भोजन पकाते समय माता लक्ष्मी अदृश्य रूप से वहां उपस्थित रहती हैं। वे स्वयं अन्नपूर्णा बनकर हर बर्तन और स्वाद की देखरेख करती हैं। यही कारण है कि जैसे ही इस भोजन को भगवान जगन्नाथ को अर्पित किया जाता है, यह साधारण भोजन से महाप्रसाद बन जाता है।
भोग लगते ही इसमें से एक ऐसी अलौकिक और दिव्य खुशबू आने लगती है, जो इंसानी हाथों से बनना असंभव है। माता लक्ष्मी की इसी असीम कृपा के कारण यहां का भोजन कभी कम नहीं पड़ता।
Jagannath Rath Yatra 2023: रोजाना नए मिट्टी के बर्तनों से बनाया जाता है महाप्रसाद, इन दो कुओं का पानी होता है इस्तेमाल
महाप्रसाद से जुड़े कुछ अद्भुत तथ्य
- कभी कम नहीं पड़ता भोजन
जगन्नाथ मंदिर में हर दिन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बदलती रहती है। कभी यहाँ हजारों तो कभी लाखों की संख्या में भक्त उमड़ पड़ते हैं। प्रसाद हमेशा एक तय मात्रा में ही पकाया जाता है। इसके बावजूद महाप्रसाद कभी भी किसी भक्त के लिए कम नहीं पड़ता। - नहीं बर्बाद होता अन्न का दाना
दिन खत्म होने के बाद मंदिर में थोड़ा भी प्रसाद व्यर्थ नहीं जाता। जितने भी लोग आते हैं, सभी तृप्त होकर यहाँ से जाते हैं। मंदिर के कपाट बंद होने तक पूरा प्रसाद आदरपूर्वक समाप्त हो जाता है। इसे भी भगवान जगन्नाथ की एक असीम कृपा माना जाता है। - मां लक्ष्मी की पौराणिक मान्यता
मान्यता है कि इस रसोई की देखरेख खुद माता लक्ष्मी करती हैं। वे स्वयं अन्नपूर्णा बनकर यहाँ के भोजन की पवित्रता बनाए रखती हैं। जब भगवान जगन्नाथ को यह भोग लगाया जाता है, तब नजारा बदलता है। भोग लगते ही पूरे परिसर में एक अलौकिक खुशबू फैल जाती है। - बर्तनों का दोबारा नहीं होता उपयोग
इस पावन रसोई में शुद्धता और नियम का कड़ाई से पालन होता है। महाप्रसाद बनाने के लिए हर बार नए मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल होता है। एक बार इस्तेमाल हो चुकी हांडी को दोबारा चूल्हे पर नहीं रखते। हर दिन कुम्हार नए बर्तन मंदिर की रसोई में पहुंचाते हैं।
FAQ
- जगन्नाथ मंदिर की रसोई में खाना पकाने की क्या विशेषता है?
यहां एक चूल्हे पर एक के ऊपर एक सात मिट्टी के बर्तन रखे जाते हैं। स्टीम ट्रैप तकनीक के कारण सबसे ऊपर वाले बर्तन का भोजन सबसे पहले पककर तैयार होता है। - क्या
जगन्नाथ मंदिर का महाप्रसाद कभी कम पड़ता है?
मंदिर में आने वाले भक्तों की संख्या चाहे कितनी भी अधिक हो, महाप्रसाद कभी कम नहीं पड़ता। भगवान की कृपा से यहां अन्न का एक भी दाना व्यर्थ नहीं जाता है। - क्या महाप्रसाद पकाने के लिए पुराने बर्तनों का प्रयोग होता है?
नहीं, यहां शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है। महाप्रसाद बनाने के लिए हर बार बिल्कुल नए और ताजे मिट्टी के बर्तनों यानी हांडियों का ही उपयोग किया जाता है।
एमपी में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की ओंकारेश्वर में पूजा-अर्चना, मोहन सरकार के काम को सराहा
आज से शुरू हुआ आषाढ़ का महीना, सूर्य और भगवान वामन की पूजा का है खास महत्व
शिवलिंग की पूजा से मिलते हैं अद्भुत लाभ, जानें शिव महापुराण में क्या है लिखा
आखिर क्यों दूर्वा के बिना अधूरी है बप्पा की पूजा, कश्यप ऋषि से जुड़ा है राज
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari