आमरस का भोग लगते ही बीमार हो जाते हैं भगवान जगदीश, जानें पूरी कथा

Kaushiki | May 28, 2026, 13:10 IST
Share
Kota Jagdish Mandir Tradition
Kota Jagdish Mandir Tradition

राजस्थान के कोटा में रामपुरा स्थित जगदीश मंदिर में एक बेहद अनोखी परंपरा निभाई जा रही है। यहां ज्येष्ठ पूर्णिमा पर 200 किलो आमरस का भोग लगाने के बाद भगवान बीमार हो जाते हैं। अब अगले 14 दिनों तक मंदिर के पट आम जनता के लिए बंद रहेंगे।

राजस्थान के कोटा शहर में स्थित ऐतिहासिक जगदीश मंदिर में ज्येष्ठ पूर्णिमा के पावन मौके पर एक प्राचीन परंपरा निभाई जाती है। इस अनूठी रस्म के तहत इंसानों की तरह भगवान भी बीमार पड़ जाते हैं। भीषण गर्मी में ठंडे जल से स्नान और आमरस का भारी भोग लगते ही भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं।

इसके बाद उनके स्वास्थ्य सुधार के लिए अगले दो हफ्तों तक मंदिर के कपाट पूरी तरह बंद रखे जाते हैं। यहां दूर-दूर से लोग इस अनोखे प्राचीन परंपरा के बारे में जानने के लिए आते हैं। आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की पूरी कहानी।

200 kg आमरस के भोग से भगवान बीमार! 14 दिन मंदिर बंद, 300 साल पुरानी अनोखी  परंपरा - lord jagannath sick leave in kota jagdish temple after consume 200  kg aamras 300 years tradition tvisu - AajTak
200 kg आमरस के भोग से भगवान बीमार! 14 दिन मंदिर बंद, 300 साल पुरानी अनोखी परंपरा - lord jagannath sick leave in kota jagdish temple after consume 200 kg aamras 300 years tradition tvisu - AajTak


भगवान जगदीश क्यों होते हैं बीमार

स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह परंपरा करीब 250 सालों से चली आ रही है। ज्येष्ठ महीने में उत्तर भारत में बहुत तेज और भीषण गर्मी पड़ती है। ऐसे में भगवान जगदीश स्वामी को गर्मी से राहत देने के लिए विशेष पूजा होती है। पुजारी सबसे पहले भगवान का 51 पवित्र जल कलशों से अभिषेक करते हैं। साथ ही भगवान को पंचामृत से भी स्नान कराया जाता है।

इसके तुरंत बाद उन्हें शुद्ध और मीठे आमरस का भोग लगता है। भगवान को लगभग आमरस अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि ठंडे पानी और भारी आमरस से भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं। इसके बाद मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं।

Kota Jagdish Temple Tradition & Interesting Facts | Snan Yatra Utsav
Kota Jagdish Temple Tradition & Interesting Facts | Snan Yatra Utsav


बीमार होने के बाद उनकी देखभाल कैसे की जाती है

भगवान के बीमार होते ही मंदिर में सन्नाटा पसर जाता है। मंदिर प्रशासन उनके आराम का पूरा ध्यान बहुत गंभीरता से रखता है। गर्भगृह में किसी भी तरह का शोर मचाना पूरी तरह मना होता है।

यहां तक कि मंदिर की घंटियों को भी कपड़े से बांध दिया जाता है। झालर और दूसरे वाद्य यंत्रों को भी ढंक कर रख दिया जाता है। पूरे मंदिर परिसर में शांति का माहौल बना दिया जाता है।

अगले 14 दिनों तक भगवान पूरी तरह विश्राम यानी रेस्ट मोड में रहते हैं। इस दौरान केवल मुख्य पुजारी को ही अंदर जाने की अनुमति होती है। आम जनता के लिए दर्शन पूरी तरह से बंद रहते हैं।

यहां भक्ति की शक्ति से आए भगवान, कैमरी के जगदीश धाम मेले में उमड़ रहे  श्रद्धालु | Jagdish Dham Kemri Karauli Mela
यहां भक्ति की शक्ति से आए भगवान, कैमरी के जगदीश धाम मेले में उमड़ रहे श्रद्धालु | Jagdish Dham Kemri Karauli Mela


अस्वस्थ भगवान को कैसे ठीक किया जाता है

स्थानीय पुजारी के मुताबिक, भगवान का रोज प्रतीकात्मक स्वास्थ्य परीक्षण होता है। बीमार होने के कारण भगवान को रोज का सामान्य भोजन नहीं दिया जाता।

उनके खाने-पीने में भारी बदलाव किया जाता है। स्वस्थ करने के लिए भगवान को रोज सुबह-शाम एक खास काढ़ा पिलाया जाता है। ये काढ़ा गरम दूध, सूखे मेवे और काली मिर्च से बनता है।

माना जाता है कि इससे भगवान का स्वास्थ्य जल्दी ठीक होता है। इस दौरान श्रद्धालु मंदिर की चौखट तक तो आ सकते हैं। लेकिन वे अपने आराध्य देव के दर्शन बिल्कुल नहीं कर पाते। इसके बाद भी लोगों की श्रद्धा में कोई कमी नहीं आती है।

250 साल पुरानी अनूठी परम्परा: 14 दिन क्वारंटीन रहेंगे भगवान जगदीश, वैद्य  जांचने आएंगे स्वास्थ्य | Story Of Jagdish Mandir Kota Rajasthan
250 साल पुरानी अनूठी परम्परा: 14 दिन क्वारंटीन रहेंगे भगवान जगदीश, वैद्य जांचने आएंगे स्वास्थ्य | Story Of Jagdish Mandir Kota Rajasthan


इस प्राचीन मंदिर का इतिहास

इतिहासकारों के मुताबिक, इस ऐतिहासिक मंदिर की स्थापना महाराज अपलाचारी स्वामी ने की थी। वह करीब ढाई सौ साल पहले सुदूर दक्षिण भारत से यात्रा करके कोटा आए थे। उस पुराने जमाने में यातायात के साधन बहुत ही कम और सीमित हुआ करते थे।

ऐसे में हाड़ौती क्षेत्र के आम लोग ओडिशा के जगन्नाथ पुरी की यात्रा नहीं कर पाते थे। स्थानीय भक्तों की इसी सुविधा के लिए रामपुरा में इस भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया। यहां भगवान कृष्ण, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की काष्ठ मूर्तियां विराजमान हैं।

आज भी इस मंदिर में महाराज अपलाचारी के परिवार की छठी पीढ़ी पूरी निष्ठा से सेवा कर रही है। वर्तमान में एसके श्रीनिवास जी मंदिर की पूरी व्यवस्था को संभाल रहे हैं।

यह मंदिर कोटा की प्राचीन धरोहर और अटूट आस्था का एक बहुत बड़ा प्रतीक माना जाता है। फिर 14 दिन बाद भगवान के स्वस्थ होने पर यहां भव्य उत्सव मनाया जाता है।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

ये खबर भी पढ़ें...

पूजा की थाली से लेकर मन की शांति तक, जानें कपूर जलाने के फायदे

चारधाम यात्रा में क्या है केदारनाथ मंदिर का महत्व, भगवान शिव से जुड़ी है मान्यताएं

गर्मी में शिवलिंग पर ठंडा जल चढ़ाने के पीछे क्या है धार्मिक मान्यता, जानें सही नियम

30 या 31 मई? कब है अधिक मास की पूर्णिमा, नोट करें स्नान-दान का शुभ मुहूर्त

Tags:
  • राजस्थान
  • कोटा
  • इतिहास
  • पूर्णिमा
  • भगवान जगदीश स्वामी
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा