ISRO और श्रीहरिकोटा की सैर करेंगे एमपी के छात्र, सैटेलाइट की दुनिया को करीब से समझेंगे
Kaushiki | Apr 13, 2026, 11:14 IST
isro
मध्यप्रदेश के सतना के 17 मेधावी छात्र ISRO और श्रीहरिकोटा जाएंगे। एमपी बोर्ड के इन बच्चों का चयन विज्ञान मंथन यात्रा के लिए हुआ है। यह यात्रा 20 अप्रैल से शुरू होगी।
मध्यप्रदेश के सतना के मेधावी छात्रों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है। मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (MP CST) की विज्ञान मंथन यात्रा के तहत व्यंकट-वन स्कूल के 17 स्टूडेंट्स का सिलेक्शन हुआ है।
ये होनहार बच्चे अब बेंगलुरु स्थित ISRO हेडक्वार्टर और श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर की सैर करेंगे। 95% से ज्यादा नंबर लाने वाले इन छात्रों को रॉकेट साइंस और अंतरिक्ष की बारीकियों को लाइव समझने का शानदार मौका मिलेगा।
ये शानदार साइंटिफिक जर्नी 20 अप्रैल से शुरू होकर 27 अप्रैल तक चलेगी। इस दौरान बच्चे बेंगलुरु स्थित इसरो (ISRO) के मुख्यालय का दौरा करेंगे। साथ ही वे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC) भी जाएंगे।
वहां वे देखेंगे कि रॉकेट और सैटेलाइट कैसे काम करते हैं। इस टीम की लीडरशिप केमिस्ट्री के टीचर डॉ. रामानुज पाठक करेंगे। उनके साथ फिजिक्स की टीचर नविता जायसवाल भी मौजूद रहेंगी।
इस यात्रा के लिए चयन की प्रक्रिया बहुत ही कड़ी होती है। केवल वही छात्र इसके लिए एलिजिबल होते हैं जिनके नंबर 95% से अधिक हों। इसमें एमपी बोर्ड, सीबीएसई और आईसीएसई के विज्ञान छात्र शामिल होते हैं। 10वीं, 11वीं और 12वीं कक्षा के मेधावी छात्रों को प्रॉयोरिटी दी जाती है। ये बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने की एक बहुत अच्छी पहल है।
विज्ञान मंथन यात्रा (Vigyan Manthan Yatra) सिर्फ एक टूर या सैर-सपाटा नहीं है। चयनित विद्यार्थियों के लिए बाद में एक विशेष परीक्षा आयोजित की जाएगी। जो छात्र इस परीक्षा को पास करेंगे, उन्हें स्कॉलरशिप दी जाएगी। उन्हें अगले 5 साल तक पर मंथ 12 सौ से 15 सौ रुपए मिलेंगे।
इससे उनकी आगे की पढ़ाई में काफी मदद मिल सकेगी। स्कूल के प्राचार्य केएस बघेल ने इस अचीवमेंट पर खुशी जताई है। उन्होंने बताया कि इस टूर का मेन ऑब्जेक्टिव साइंटिफिक कांशसनेस फैलाना है। ये योजना 11वीं फाइव ईयर प्लान के तहत शुरू की गई थी।
ISRO का फुल फॉर्म Indian Space Research Organisation है। सरल शब्दों में कहें तो यह भारत की एक सरकारी संस्था है जो अंतरिक्ष यान, सैटेलाइट और रॉकेट बनाने का काम करती है। इसका हेडक्वार्टर बेंगलुरु में है।
इसरो का काम है नई-नई टेक्नोलॉजी विकसित करना, जैसे कि चंद्रयान या मंगलयान। यह वो 'दिमाग' है जो पूरी प्लानिंग करता है कि भारत स्पेस की दुनिया में कैसे आगे बढ़ेगा।
श्रीहरिकोटा असल में एक जगह का नाम है, जो आंध्र प्रदेश के तट पर स्थित एक छोटा सा आइलैंड है। यहां पर इसरो का Sathish Dhawan Space Centre (SDSC) बना हुआ है। आप इसे भारत का 'रॉकेट पोर्ट' कह सकते हैं।
इसरो जो भी रॉकेट या सैटेलाइट बनाता है, उसे लॉन्च करने के लिए श्रीहरिकोटा लाया जाता है। यहां से रॉकेट अंतरिक्ष में उड़ान भरते हैं। समुद्र के किनारे होने के कारण यह जगह रॉकेट लॉन्चिंग के लिए सबसे सुरक्षित और सही मानी जाती है।
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ये होनहार बच्चे अब बेंगलुरु स्थित ISRO हेडक्वार्टर और श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर की सैर करेंगे। 95% से ज्यादा नंबर लाने वाले इन छात्रों को रॉकेट साइंस और अंतरिक्ष की बारीकियों को लाइव समझने का शानदार मौका मिलेगा।
ISRO-श्रीहरिकोटा टूर का पूरा शेड्यूल
वहां वे देखेंगे कि रॉकेट और सैटेलाइट कैसे काम करते हैं। इस टीम की लीडरशिप केमिस्ट्री के टीचर डॉ. रामानुज पाठक करेंगे। उनके साथ फिजिक्स की टीचर नविता जायसवाल भी मौजूद रहेंगी।
व्यंकट-वन स्कूल के इन बच्चों ने किया नाम रोशन
- व्यंकट-वन स्कूल के कई होनहार बच्चों ने इस लिस्ट में जगह बनाई है।
- 12वीं कक्षा से तोषी, पल्लवी, ऋषिका और रुद्राक्ष का चयन हुआ है।
- 11वीं से आदित्य, अखंड, कंचन, रितिक और नेहा को अवसर मिला है।
- वहीं 10वीं कक्षा से कृष्णा, मोहिना, प्राची, राधे और अंशराज शामिल हैं।
- ये सभी बच्चे अंतरिक्ष विज्ञान को करीब से देखने के लिए उत्साहित हैं।
किसे मिलता है विज्ञान मंथन यात्रा का मौका
साइंटिफिक कॉन्शसनेस को बढ़ावा देना है लक्ष्य
इससे उनकी आगे की पढ़ाई में काफी मदद मिल सकेगी। स्कूल के प्राचार्य केएस बघेल ने इस अचीवमेंट पर खुशी जताई है। उन्होंने बताया कि इस टूर का मेन ऑब्जेक्टिव साइंटिफिक कांशसनेस फैलाना है। ये योजना 11वीं फाइव ईयर प्लान के तहत शुरू की गई थी।
ISRO क्या है?
इसरो का काम है नई-नई टेक्नोलॉजी विकसित करना, जैसे कि चंद्रयान या मंगलयान। यह वो 'दिमाग' है जो पूरी प्लानिंग करता है कि भारत स्पेस की दुनिया में कैसे आगे बढ़ेगा।
श्रीहरिकोटा क्या है?
इसरो जो भी रॉकेट या सैटेलाइट बनाता है, उसे लॉन्च करने के लिए श्रीहरिकोटा लाया जाता है। यहां से रॉकेट अंतरिक्ष में उड़ान भरते हैं। समुद्र के किनारे होने के कारण यह जगह रॉकेट लॉन्चिंग के लिए सबसे सुरक्षित और सही मानी जाती है।
ये खबरें भी पढ़ें...
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