NEWS STRIKE: जंतर मंतर वाली एकता टूटने वाली है? कॉकरोच v/s आरक्षण राजनीति
Harish Divekar | Jul 28, 2026, 07:00 IST
Photograph: (THESOOTR)
कॉकरोच जनता पार्टी और युवा आंदोलन ने जाति, धर्म से ऊपर उठकर डिजिटल माध्यमों से नई एकता बनाई है। इसके बाद आरक्षण राजनीति की बहस भी तेज हो गई है।
News Strike:कॉकरोच जनता पार्टी के बाद स्टूडेंट्स का एक और आंदोलन अब सरकार की नींद उड़ाने जा रहा है। ये आंदोलन सीजेपी को तोड़ने की कोशिश है या नई एकता का प्रतीक इसका आकलन करना जरूरी है।
जेन जी के आगे जिस तरह से केंद्र सरकार ने घुटने टेके हैं वो ये साबित करता है कि स्टूडेंट्स और युवा आज भी किसी भी देश की सबसे बड़ी ताकत है।
केंद्र से लेकर राज्य सरकारें तक ये महिला वोटर्स पर फोकस करते रहे। इधर एक पोस्ट के दम पर युवा एकजुट हो गए और देखते ही देखते आंदोलन में भी तब्दील हो गए।
ये आंदोलन इससे पहले और अब तक हुए आंदोलनों से बेशक अलग था। जिस पर जेन जी की छाप थी। डिजिटल मीडिया की रीलबाजी थी, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि युवा और स्टूडेंट्स की ताकत वही थी। जिसकी डिजिटल काट बड़े-बड़े कंप्यूटर यौद्धा भी नहीं ढूंढ पाए। अब उसी डिजिटल हथियार के सहारे एक नई आवाज उठने वाली है।
अब तक आपने राजनीतिक दलों की राजनीति देखी। मजहब और धर्म की सियासत देखी। इसके बाद राजनीति लगातार बटती चली गई। पहले एससी, एसएसटी, ओबीसी, सामान्य में बंटे।
इतने पर भी बात नहीं बनी तो जातियों में बंट गए। अब हाल ये है कि तकरीबन हर जाति के अलग नेता हैं, अलग चेहरे हैं। जातिगत जनगणना को हम उसी राजनीति का एक्सटेंशन कह सकते हैं।
इस बीच युवाओं का एक आंदोलन हुआ। हम सब ने देखा। आंदोलन का बदलता अंदाज, बदलते तेवर। जिसमें युवाओं ने लाठियां खाई तो जमकर रीलें भी बनाई। नाचे गाए भी। कभी फैन्सी ड्रेस वाला आलाम दिखा तो कभी म्यूजिक कॉन्सर्ट दिखा।
आंदोलन के साथ कड़वी और मीठी कई यादें जुड़ी हैं और कभी न भूलने वाला एक इतिहास भी कि मोदी सरकार ने युवा शक्ति के आगे घुटने टेके और अपने मंत्री का इस्तीफा करवाया।
इस आंदोलन की आपने बहुत सारी रील्स सोशल मीडिया पर देखी ही होंगी इसलिए उस अंदाज और मिजाज पर बात करने का कोई फायदा नहीं। सीधे मुद्दे पर आते हैं।
मुद्दा ये कि इस आंदोलन धर्म और जाति की राजनीति की हवा निकालकर रख दी। जो दल खुद को सनातन, हिंदूवादी या सेकुलर कहकर अपनी पीठ थपथपाते रहे हैं। उनके लिए ये आंदोलन आइना दिखाने वाला था।
क्योंकि जंतरमंतर पर बैठे युवा में किसी ने अपने धर्म की बात नहीं की। अपनी जाति का हवाला नहीं दिया। आंदोलन से जुड़ी किसी भी रील को आप हिंदुत्व या अल्पसंख्यक के दायरे में बांध नहीं पाएंगे। सब एक थे शायद इसलिए बड़ी जंग जीत गए।
लेकिन अब कॉकरोच जनता पार्टी खुद एक फिनोमिना बन गई है। जो कांग्रेस, सपा और दूसरा विपक्षी दल नहीं कर पाया वो अदने से कॉकरोच नाम वाले संगठन ने कर दिखाया। पर अब अब इस आंदोलन पर भी राजनीति का साया हावी हो चुका है।
कॉकरोचों के सरदारों के सामने खुद को राजनीतिक दलों से दूर रखने की बड़ी चुनौती है। बहुत संभव है कि इनमें से बहुतों को पॉलिटिकल पार्टीज से न्योता आ भी चुका हो।
कांग्रेस और आप ने इस आंदोलन को पूरी तरह हाईजैक करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन इससे भी बड़ा एक चैलैंज इन कॉकरोचों को फेस करना है।
ये चैलेंज है खेमों में बंटने का। उनके आंदोलन में बेशक हिंदू मुस्लमान, सामान्य और गैर सामान्य वर्ग का भेद नहीं हुआ। पर उन्हीं के आंदोलन को सीढ़ी बनाकर युवाओं को भी खेमों में बांटने की कोशिश शुरू हो चुकी है।
इसका सबूत है आरक्षण हटाओ आंदोलन के हैंडल्स। कॉकरोच जनता पार्टी की भयानक कामयाबी ने जो दरवाजा खोला है। उससे जुड़े रास्ते पर चल पड़ा है इस नाम का हैंडल।
इंस्टाग्राम पर इस हैंडल की पहली पोस्ट पांच ही दिन पुरानी नजर आती है। यानी हम कह सकते हैं कि ये हैंडल पांच ही दिन पुराना है। रिजर्वेशन हटाओ मूवमेंट यानी कि आरएचए नाम से बने इस हैंडल ने कुल 108 पोस्ट किए हैं।
इतने कम दिनों में इस हैंडल के 4 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स हो चुके हैं। इस सेगमेंट की स्क्रिप्ट लिखे जाने तक कुल फॉलोअर्स थे 4.5 मिलियन।
खास बात ये है कि जैसे ही पोस्ट वायरल होना शुरू हुई। सवर्णों से जुड़े दूसरे हैंडल्स ने भी इसे प्रमोट करना शुरू कर दिया। ब्राह्मण एकता मंच नाम के फेसबुक अकाउंट ने लिखा कि महज 24 घंटे में इस हैंडल के 30लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हो चुके हैं। ये भी लिखा है कि कुछ दिनों में ही ये संख्या करोड़ों में होगी।
राजपूत ऑफिशियल ग्रुप नाम के हैंडल ने भी इस अकाउंट के बारे में पोस्ट किया और लिखा कि हम रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन का सपोर्ट करते हैं।
अब देखिए रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन की ताजा पोस्ट क्या कहती है। इस पोस्ट में साफ साफ लिखा है कि हम किसी पॉलिटिकल पार्टी से अफिलिएटेड नहीं हैं।
देश के कई मतदाताओं की तरह हम मानते हैं कि सरकार बदलने से रिजर्वेशन सिस्टम में भी बदलाव आ सकता है और बीजेपी ऐसा करने में फेल हो गई। इसके बाद भी अपने बारे में बहुत कुछ लिखा गया है। जिसकी एक लाइन कहती है कि हमारा फोकस पॉलिसी पर है न कि किसी पार्टी पर।
अब जरा इस पोस्ट पर आए कमेंट्स को भी देख लीजिए। कुछ लोगों ने कमेंट सेक्शन में दावा किया है कि कोई भी पार्टी रिजर्वेशन नहीं हटा पाएगी, जबकि कुछ ने सपोर्ट किया है।
कुछ लोगों ने ये भी सजेस्ट किया है कि सबसे पहले कास्टिज्म को खत्म करना चाहिए फिर रिजर्वेशन को। कमेंट सेक्शन साफ जाहिर करता है कि इंस्टाग्राम यूजर्स के विचार भी बंटे हुए हैं।
ये इस बात का सबूत है कि रिजर्वेशन वो मुद्दा है जो लोगों को बांटने के लिए काफी है। रिजर्वेशन से जुड़े हैंडल पर इतने लोगों का जुड़ना भी ये साबित करता है कि बहुत से युवा आरक्षण के खिलाफ हैं।
तो क्या ऐसे हैंडल्स आरक्षित वर्ग के नहीं बन सकेंगे। अगर बंटे तो क्या आने वाले वक्त में कॉकरोचों की यूनिटी वैसी ही नजर आएगी। या फिर युवा भी ये सोचकर आंदोलन में जाएंगे कि इससे फायदा किसका।
रिजर्व कैटेगरी का या सामान्य वर्ग का। कॉकरोचों को एकजुट रहना है तो अभी से इसका तोड़ भी ढूंढ लेना चाहिए। वर्ना जिस राजनीति से बचने की वो कोशिश कर रहे हैं वो अनचाहे ही उन पर हावी भी हो जाएगी।
आपको क्या लगता है क्या युवाओं को भी धर्म, मजहब और आरक्षण की राजनीति में घुसकर बंट जाना चाहिए। अगर नहीं तो कॉकरोच इससे कैसे बच सकते हैं। वो भी हमें जरूर बताइए।
एक हैंडल का जिक्र भी करना जरूरी है। इस हैंडल का नाम है ई 20 जनता पार्टी। नाम सुनकर आप समझ ही गए होंगे कि ये हैंडल किस बारे में हैं। पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने के खिलाफ ये अकाउंट बना है।
चंद ही रोज में इसके फोलोअर्स भी तेजी से बढ़े हैं। 93 पोस्ट कर चुके इस अकाउंट पर अब 283 के फोलोअर्स हैं। तो क्या सरकार अलग-अलग अंदाज में और अलग-अलग मुद्दों पर युवाओं का ये आंदोलन झेलेगी।
जो भी होगा वो सियासत के साए से और जातिगत बंटवारे के खौफ से खुद को बचाकर कैसे आगे बढ़ सकेगा। ये देखना उतना ही दिलचस्प होगा। जितना दिलचस्प रहा जंतर मंतर का अनूठे नारों और जेन जी के डिजिटल तेवर वाला आंदोलन।
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जेन जी के आगे जिस तरह से केंद्र सरकार ने घुटने टेके हैं वो ये साबित करता है कि स्टूडेंट्स और युवा आज भी किसी भी देश की सबसे बड़ी ताकत है।
केंद्र से लेकर राज्य सरकारें तक ये महिला वोटर्स पर फोकस करते रहे। इधर एक पोस्ट के दम पर युवा एकजुट हो गए और देखते ही देखते आंदोलन में भी तब्दील हो गए।
ये आंदोलन इससे पहले और अब तक हुए आंदोलनों से बेशक अलग था। जिस पर जेन जी की छाप थी। डिजिटल मीडिया की रीलबाजी थी, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि युवा और स्टूडेंट्स की ताकत वही थी। जिसकी डिजिटल काट बड़े-बड़े कंप्यूटर यौद्धा भी नहीं ढूंढ पाए। अब उसी डिजिटल हथियार के सहारे एक नई आवाज उठने वाली है।
जातियों में बंटी राजनीति का नया चेहरा
इतने पर भी बात नहीं बनी तो जातियों में बंट गए। अब हाल ये है कि तकरीबन हर जाति के अलग नेता हैं, अलग चेहरे हैं। जातिगत जनगणना को हम उसी राजनीति का एक्सटेंशन कह सकते हैं।
युवा आंदोलन: धर्म और जाति से ऊपर उठी शक्ति
आंदोलन के साथ कड़वी और मीठी कई यादें जुड़ी हैं और कभी न भूलने वाला एक इतिहास भी कि मोदी सरकार ने युवा शक्ति के आगे घुटने टेके और अपने मंत्री का इस्तीफा करवाया।
इस आंदोलन की आपने बहुत सारी रील्स सोशल मीडिया पर देखी ही होंगी इसलिए उस अंदाज और मिजाज पर बात करने का कोई फायदा नहीं। सीधे मुद्दे पर आते हैं।
मुद्दा ये कि इस आंदोलन धर्म और जाति की राजनीति की हवा निकालकर रख दी। जो दल खुद को सनातन, हिंदूवादी या सेकुलर कहकर अपनी पीठ थपथपाते रहे हैं। उनके लिए ये आंदोलन आइना दिखाने वाला था।
क्योंकि जंतरमंतर पर बैठे युवा में किसी ने अपने धर्म की बात नहीं की। अपनी जाति का हवाला नहीं दिया। आंदोलन से जुड़ी किसी भी रील को आप हिंदुत्व या अल्पसंख्यक के दायरे में बांध नहीं पाएंगे। सब एक थे शायद इसलिए बड़ी जंग जीत गए।
कॉकरोच जनता पार्टी: विपक्ष की चुनौती
कॉकरोचों के सरदारों के सामने खुद को राजनीतिक दलों से दूर रखने की बड़ी चुनौती है। बहुत संभव है कि इनमें से बहुतों को पॉलिटिकल पार्टीज से न्योता आ भी चुका हो।
कांग्रेस और आप ने इस आंदोलन को पूरी तरह हाईजैक करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन इससे भी बड़ा एक चैलैंज इन कॉकरोचों को फेस करना है।
युवा आंदोलन पर खेमों की नई चुनौती
इसका सबूत है आरक्षण हटाओ आंदोलन के हैंडल्स। कॉकरोच जनता पार्टी की भयानक कामयाबी ने जो दरवाजा खोला है। उससे जुड़े रास्ते पर चल पड़ा है इस नाम का हैंडल।
5 दिन में वायरल हुआ आरक्षण विरोधी हैंडल
इतने कम दिनों में इस हैंडल के 4 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स हो चुके हैं। इस सेगमेंट की स्क्रिप्ट लिखे जाने तक कुल फॉलोअर्स थे 4.5 मिलियन।
खास बात ये है कि जैसे ही पोस्ट वायरल होना शुरू हुई। सवर्णों से जुड़े दूसरे हैंडल्स ने भी इसे प्रमोट करना शुरू कर दिया। ब्राह्मण एकता मंच नाम के फेसबुक अकाउंट ने लिखा कि महज 24 घंटे में इस हैंडल के 30लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हो चुके हैं। ये भी लिखा है कि कुछ दिनों में ही ये संख्या करोड़ों में होगी।
राजपूत ऑफिशियल ग्रुप नाम के हैंडल ने भी इस अकाउंट के बारे में पोस्ट किया और लिखा कि हम रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन का सपोर्ट करते हैं।
आरक्षण हटाओ आंदोलन का नया दावा
देश के कई मतदाताओं की तरह हम मानते हैं कि सरकार बदलने से रिजर्वेशन सिस्टम में भी बदलाव आ सकता है और बीजेपी ऐसा करने में फेल हो गई। इसके बाद भी अपने बारे में बहुत कुछ लिखा गया है। जिसकी एक लाइन कहती है कि हमारा फोकस पॉलिसी पर है न कि किसी पार्टी पर।
अब जरा इस पोस्ट पर आए कमेंट्स को भी देख लीजिए। कुछ लोगों ने कमेंट सेक्शन में दावा किया है कि कोई भी पार्टी रिजर्वेशन नहीं हटा पाएगी, जबकि कुछ ने सपोर्ट किया है।
कुछ लोगों ने ये भी सजेस्ट किया है कि सबसे पहले कास्टिज्म को खत्म करना चाहिए फिर रिजर्वेशन को। कमेंट सेक्शन साफ जाहिर करता है कि इंस्टाग्राम यूजर्स के विचार भी बंटे हुए हैं।
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रिजर्व कैटेगरी का या सामान्य वर्ग का। कॉकरोचों को एकजुट रहना है तो अभी से इसका तोड़ भी ढूंढ लेना चाहिए। वर्ना जिस राजनीति से बचने की वो कोशिश कर रहे हैं वो अनचाहे ही उन पर हावी भी हो जाएगी।
आपको क्या लगता है क्या युवाओं को भी धर्म, मजहब और आरक्षण की राजनीति में घुसकर बंट जाना चाहिए। अगर नहीं तो कॉकरोच इससे कैसे बच सकते हैं। वो भी हमें जरूर बताइए।
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चंद ही रोज में इसके फोलोअर्स भी तेजी से बढ़े हैं। 93 पोस्ट कर चुके इस अकाउंट पर अब 283 के फोलोअर्स हैं। तो क्या सरकार अलग-अलग अंदाज में और अलग-अलग मुद्दों पर युवाओं का ये आंदोलन झेलेगी।
जो भी होगा वो सियासत के साए से और जातिगत बंटवारे के खौफ से खुद को बचाकर कैसे आगे बढ़ सकेगा। ये देखना उतना ही दिलचस्प होगा। जितना दिलचस्प रहा जंतर मंतर का अनूठे नारों और जेन जी के डिजिटल तेवर वाला आंदोलन।
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