News Strike: मोहन कैबिनेट के सीनियर मंत्री ने अफसर को घर बुलाया, धमकाया और गालियां भी दी, क्या एकजुट होगी IAS एसोसिएशन?
Harish Divekar | Apr 28, 2026, 07:00 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. मध्य प्रदेश के मंत्री राकेश सिंह पर अफसर को धमकाने और गालियां देने के आरोप लगाए गए हैं। क्या आईएएस एसोसिएशन इस मुद्दे पर एकजुट हो पाएगी?
News In Short
- मंत्री ने अफसर को धमकाकर अपमानित किया।
- अफसरों के खिलाफ मंत्री का रुआब बढ़ा।
- अफसरों की एकजुटता पर सवाल उठे।
- सरकार और मंत्री पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
- प्रशासनिक अधिकारियों की सुरक्षा पर संदेह।
News In Detail
हाल ही में प्रीतम लोधी के अफसर को धमकाने का मामला सामने आया था। इसे प्रशासनिक गलियारे भूले भी नहीं थे कि अब एक कद्दावर मंत्री के अफसर से गाली गलौज करने का मामला सामने आया है।
हम एक बात साफ कर देना चाहते हैं। जनता से जुड़े किसी भी काम के लिए मंत्री का सख्त होना जरूरी है। इससे कोई एतजार नहीं है, लेकिन भाषा और बर्ताव की मर्यादाओं का पालन भी उतना ही जरूरी है।
अफसरों के साथ मंत्री की बदतमीजी
जाहिर है इन व्हाइट कॉलर्स जॉब की इज्जत और रुतबा भी सब जगह होता है। कई मामलों में तो अफसर ही सरकार चलाते हैं या उनकी गाइडिंग फोर्स होते हैं। कई बार जब अफसरशाही हावी होती है तब राजनेताओं या सरकार का फेलियर माना जाता है।
कहने का मतलब ये है कि इमबैलेंस किसी भी चीज का अच्छा नहीं है। न तो राजनेताओं पर अफसरशाही का हावी होना अच्छा है और न ही राजनेताओं का अफसरों से बदतमिजी या बुरा बर्ताव करना अच्छा है।
पर मध्यप्रदेश में जितना इल्जाम बेलगाम अफसरशाही का लगता है। उतने ही बेलगाम नेता भी हो चुके हैं जो अफसरों को धमकाने में.... हम खुद को और बेहतर तरीके से स्पष्ट करें तो अफसरों को बुरी तरह धमकाने और अपशब्द कहने से भी बाज नहीं आते। अफसर को बुरे लहजे और शब्दों के साथ लताड़ने का आरोप जिस मंत्री पर लगा है। उसका नाम सुनकर शायद आप चौंक जाएंगे।
मंत्री की धमकी से अफसर परेशान
खबर तो यहां तक है कि मंत्रीजी ने उन्हें कुछ ऐसी गालियां भी दीं। जिन्हें इस प्लेटफॉर्म पर कोट नहीं किया जा सकता। इतने पर भी मन नहीं भरा तो उन्होंने अफसर को जान से मारने की धमकी भी दे डाली। मंत्री ने आईएएस अफसर से कहा कि एक इशारे पर पूरी सिख कौम तलवारें लेकर तुम्हें खत्म कर देगी।
इस घटनाक्रम ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। अपने अपमान से आहत IAS अरविंद शाह डिप्रेशन में हैं। उन्होंने इस मामले की पूरी जानकारी मुख्य सचिव अनुराग जैन को दी है। साथ ही भोपाल में आईएएस एसोसिएशन के सामने अपना पक्ष रखा है, जिसके बाद मामला तूल पकड़ रहा है। ये नौबत आई क्यों। इसे समझने के लिए पूरा मामला भी जान लीजिए।
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नियम पालन से अफसर फंसे
निर्देश के अनुसार उन्होंने चैकिंग की और ये पाया कि छह कर्मचारी ऐसे हैं जो न तो मौजूदगी दर्ज करवा रहे हैं औऱ नही गैर मौजूद होने का ठोस कारण दे सके हैं। बिना सूचना गायब रहने वाले इन कर्मचारियों की सैलेरी को रोक दिया गया।
शाह अपने अधिकारियों के निर्देश का पालन करते रहे और नियमों के अनुसार ही सारी कार्यवाही में लगे रहे। उन्हें क्या पता होगा कि नियमों का पालन करना और करवाना ही उनके लिए मुश्किल का सबब बन जाएगा।
सैलरी रोकने पर दिलप्रीत का रिएक्शन
22 अप्रैल को आईएएएस अरविंद शाह और दिलप्रीत कौर की फेस टू फेस पहली मुलाकात हुई। इस मीटिंग में सहायक अभियंता कविश मिश्रा भी मौजूद थे। शाह ने उनसे दफ्तर से जुड़े ही कुछ आम सवाल पूछे।
मसलन उन्होंने खुद सीईओ का पद कब संभाला। जिसके जवाब में भल्ला ने कहा कि करीब तीन चार महीने पहले। उनके जवाब से साफ था कि दफ्तर में क्या चल रहा है इससे भल्ला को कोई लेनादेना नहीं है।
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मंत्री की नाराजगी का अजीब कारण
शाह को ये पता भी नहीं था कि मंत्रीजी आखिर उन पर क्यों भड़के हैं। वो फूलों का एक बुके लेकर मंत्रीजी से मिलने उनके आवास पर पहुंच गए। मंत्री की नाराजगी के बारे में जानकर कोई भी अफसर क्या समझेगा।
यही न कि उसके विभाग में किसी काम को लेकर लापरवाही हुई है, लेकिन मंत्रीजी जिस बात पर नाराज थे। उसे जानकर शाह भी हैरान ही रह गए होंगे। मोहन सरकार के सीनियर मंत्री बीजेपी के कद्दावर और सीनियर नेता दिलप्रीत कौर के मामले को लेकर नाराज थे।
मंत्री की धमकी से अफसर सकते में
मंत्री ने शाह के IAS चयन पर भी सवाल उठाए। यह तक कह दिया कि उन्हें सजा दिलाने के लिए मुख्यमंत्री से बात कर ली गई है। तुम्हें सिंगरौली तक परेड कराकर भेजा जाएगा।
मंत्रीजी का पारा इतना हाई था कि वो ये भी नहीं देख सके कि वो एक कर्मचारी के सामने अफसर को बुरी तरह लताड़ रहे हैं। उन्हें शांत करने के लिए शाह ने करीब तीन बार माफी मांगी।
मंत्रीजी के अलावा महिला कर्मचारी और उसके पिता से भी बिना किसी शर्त के माफी मांगी। हालात संभालने के लिए नगर निगम कमिश्नर के अलावा कलेक्टर राघवेंद्र सिंह भी वहां पहुंचे। पर मंत्रीजी ने किसी की नहीं सुनी। इस पूरे घटनाक्रम को देखकर आईएएस अरविंद शाह बुरी तरह सहम गए।
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अफसर से माफी की सच्चाई पर सवाल
अब स्थानीय स्तर पर नैरेटिव चलाया जा रहा है कि जैसे ही विवाद बढ़ने की खबर मंत्री राकेश सिंह तक पहुंची उन्होंने मोर्चा संभाला और कमिश्नर, कलेक्टर व एसपी के साथ उच्चस्तरीय बैठक बुलाई। मंत्री के सामने आईएएस अरविंद शाह को पेश किया गया। जहां उन्होंने लिखित रूप से माफी मांगी है, लेकिन हकीकत इससे कोसो दूर है। जिस वक्त मंत्रीजी अफसर पर भड़क रहे थे वहां कोई औपचारिक बैठक जैसा माहौल नहीं था।
वहां सिर्फ नगर निगम कमिश्नर और शाह ही मौजूद थे। एसपी इस बैठक में पहुंचे ही नहीं। शाह के लिखित माफीनामे का दावा किया जा रहा है, जबकि ये भी सच नहीं है। यहां भी ये सवाल पूछना जरूरी है कि अगर बैठक औपचारिक थी या उच्चस्तरीय थी तो क्या मंत्रीजी को निचले स्तर की भाषा उपयोग करने का अधिकार मिल जाता है।
उन्होंने पूरे मामले की जानकारी आईएएस एसोसिएशन को दे दी है और इस मामले में चुप्पी साध ली है। एसोसिएशन के अध्यक्ष मनु श्रीवास्तव का कहना है कि अरविंद ने परिवार समेत मुझसे मिलकर घटनाक्रम की जानकारी दी है। हमने अपनी ओर से मुख्य सचिव अनुराग जैन को भी अवगत करा दिया है।
जल्द ही एसोसिएशन सीएम डॉ. मोहन यादव से मुलाकात करेगा। यहां सवाल आईएएस एसोसिएशन से है। क्या वो अपनी बात इतनी दमदारी से रख सकेंगे कि सरकार या बीजेपी के आला नेता इस पर चर्चा करने को मजबूर हो जाएं।
आईपीएस की एकजुटता पर सवाल
प्रीतम लोधी के बेटे की थार से तीन लोग टकरा गए। इस पर एक आईपीएस ने कार्रवाई की तो प्रीतम लोधी ने बेबाकी से सवाल किया कि करैरा क्या उनके डैडी की है।
हमने न्यूज स्ट्राइक के ही एक एपिसोड में इस घटना की पूरी जानकारी आपके साथ शेयर की थी। उस एपिसोड को देख कर आप समझ सकते हैं कि बीजेपी के एक विधायक के मन से भी अफसशाही का सम्मान और डर खत्म हो चुका है।
इस मुद्दे पर आईपीएस एसोसिएशन ने बिना देर किए घटना की निंदा की और सरकार के सामने शिकायत दर्ज करवाई। नतीजा ये हुआ कि लोधी को भोपाल तलब किया गया और उसके बाद सीएम और प्रदेशाध्यक्ष ने उनकी क्लास लगाई। क्या आईएएस लॉबी भी ऐसी ही यूनिटी दिखा पाएगी।
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मंत्री का भाई, अफसर से भिड़ा
इस मामले में उन पर एफआईआर भी हो चुकी है। महिला सीईओ को धमाकते हुए चौहान ने कहा था कि तेरे दांत तोड़ दूंगा। तुझे यहीं जिंदा गाड़ दूंगा। कहा तो ये भी गया कि चौहान गुस्से में महिला अफसर को मारने भी दौड़ पड़े थे। इस घटना के बाद मंत्रीजी ने भाई से ही पल्ला झटक लिया।
नागर सिंह ने कहा कि वो कई सालों से अलग रहते हैं और अपने भाई से बात नहीं करते हैं। इसलिए कानून अपना काम करेगा। यहां भी एक सवाल है। जब मंत्रीजी का भाई के कोई ताल्लुक नहीं रहा तो भाई एक अफसर के सामने इतने तैश में कैसे आ सकता है। उसके पीछे कौन सा बैकअप है जो उसे सत्ता के नशे में डुबो रहा है।
मंत्रियों का सत्ता का रुआब बढ़ा
केंद्र में भी सरकार उन्हीं की है इसलिए आईएएस एसोसिएशन शिकायत कर भी दे तो उनका कुछ बिगाड़ नहीं सकती। इसका एक उदाहरण भी मप्र सरकार में ही मौजूद है मंत्री विजय शाह के रूप में। जिनके बिगड़े बोल अक्सर हाईलाइट बनते हैं, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी कर्नल सोफिया कुरैशी पर जब उन्होंने बेतुके शब्द कहे तो नाराजगी पूरे देश में देखने को मिली, लेकिन विजय शाह पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
क्या ऐसी ही घटनाएं हुक्मरानों के हौसले बुलंद कर रही हैं और ये यकीन दिलवा रही हैं कि सरकार डबल इंजन की है। इसलिए प्रदेश में उनका बोलबाला है और दिल्ली से भी कोई सवाल नहीं होने वाला है। पर इतना जरूर है कि अफसरशाही अगर लड़खड़ाई या खफा हुई तो उसका खामियाजा भी प्रदेश को ही भुगतना होगा।
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