News Strike: बिट्टू तबाही से लीला साहू तक: कैसे बदल रही है सोशल मीडिया वाली पत्रकारिता?
Harish Divekar | Sept 22, 2026, 07:00 IST
Photograph: (THESOOTR)
बिट्टू तबाही, लीला साहू जैसे डिजिटल पत्रकार सोशल मीडिया पर नई पत्रकारिता की मिसाल बन रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्ट से लोकल मुद्दों को जनता तक पहुंचा रहे हैं।
बिट्टू तबाही और लीला साहू जैसे इंफ्लूएंसर्स अब खबर बनाने के साथ-साथ खबर बन भी रहे हैं। ये वो दो नाम है जिन्हें आप शायद पहचानने लगे हों, लेकिन सोशल मीडिया पर ऐसे कई इंफ्लूएंजर्स हैं जो उन खबरों को आप तक पहुंचा रहे हैं।
हम आज आपको कुछ ऐसे ही इंफ्लूएंसर्स से रुबरू करवाएंगे। जिन पर बड़े चैनल्स नजर भी नहीं डालते या उन्हें दिखाना जरूरी नहीं समझते। ऐसी हर खबर को अलग अंदाज में अलग नजरिए से पेश कर रहे हैं इंफ्लूएंसर्स।
जिनका तरीका इतना देसी इतना दिलचस्प है कि आप उन्हें देखने से खुद को रोक नहीं सकते। मुश्किलों और सिस्टम की नाकामी को पेश करने का अंदाज भी ऐसा है कि सरकार की पेशानी पर बल पड़ जाएं।
समाचार का दौर कई बार बदला है। प्रिंट से शुरू हुआ ये सफर टीवी पर चंद मिनट के लिए आया और उसके बाद चौबीस घंटे के चैनलों में बदल गया। इसके साथ ही बहस भी चली की टीवी और प्रिंट की जंग में क्या प्रिंट मीडिया यानी कि अखबार हमेशा के लिए बंद हो जाएंगे।
अखबारों ने भी दिखा दिया कि उनकी जड़ हर घर तक फैली है और न्यूज के लिए वो किसी तरह के तार या केबल पर डिपेंड नहीं करते। सो अखबार को कोई चुनौती नहीं है, लेकिन चौबीस घंटे के खबरिया चैनल्स को है।
सोशल मीडिया के दौर ने ये साबित कर दिया है कि चौबीस घंटे के न्यूज चैनल्स को टिके रहना है तो गजब के कॉम्पिटीशन का सामना करना पड़ेगा और ये कॉम्पिटीशन दे भी कौन रहा है।
बिना तामझाम के छा रहे देसी
कुछ ऐसे पत्रकार जिनके पास महंगे कैमरे नहीं है। एसी से लदे आलीशान स्टूडियो नहीं है। न ऐसे मेकअप आर्टिस्ट हैं जो एक ब्रश से पर्सनेलिटी को चमका दें। लाइव जाने के लिए ओबी वैन नहीं है और खबर को आप तक पहुंचाने के लिए लंबा चौड़ा दल बल नहीं है।
ये पत्रकार वन मैन आर्मी की तरह जमीन पर उतरते हैं। अपने ठेठ लहजे और देसी अंदाज में खबर परोसते हैं और लाखों दिलों के चहेते बन जाते हैं। अपनी तारीफ में ये हर हफ्ते टीआरपी और बार्क रेटिंग का दम भी नहीं भरते। इनके फॉलोअर्स के बढ़ते काउंट और कमेंट्स इनकी उपलब्धि का बखान खूब करते हैं।
एक मशहूर पंक्ति याद है… बुंदेले हर बोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी। जब टीवी और अखबार नहीं थे तब ऐसे ही हरबोले खबरों को दूर-दूर तक पहुंचाते थे। अब सोशल मीडिया की दुनिया में ऐसे हरबोले हर शहर हर गली में हैं और आपको वो हकीकत दिखा रहे हैं।
आप ये कह सकते हैं कि गुजरे दौर के हरबोले अब इंफ्लूएंजर्स के नाम से आपकी दुनिया में हैं। कॉपीराइट के नियमों के अनुसार हम जितना आपको दिखा सकते हैं। उनके बारे में आज जरूर दिखाएंगे। शुरुआत बिट्टू तबाही से ही करते हैं।
बिट्टू तबाही का ताल्लूक सीधे सीधे एमपी से नहीं है, लेकिन वो मप्र के ब्यावरा की अजनार नदी का हाल दिखाकर जबरदस्त मीडिया सेंशन बन गए। असल नाम सुरेंद्र सिंह चौधरी है और खुद को एनवायर्मेंट एक्टिविस्ट बताते हैं। इंस्टाग्राम पर उनके 1.9 मिलियन फॉलोअर्स हो चुके हैं।
बिट्टू की खास बात ये है कि वो सज संवरकर कैमरे के सामने नहीं आते। बल्कि आम से लोअर टीशर्ट में वो किसी भी नदी का कचरा साफ करते हुए दिख जाते हैं।
बिट्टू तबाही की तरह ही अब सुर्खियों में हैं लीला साहू। सीधी की लीला साहू में भी अंग्रेजी मेम या एंकर वाली कोई ठसक नहीं है। वो साड़ी पहनकर मैदान में उतरती हैं।
खबर की गहराई तक जाती हैं और वीडियो पोस्ट कर देती हैं। इस पूरी प्रक्रिया में लीला साहू का घूंघट सिर से नहीं उतरता और सिंदूर की चमक कम नहीं होती।
पत्रकारिता की धार ऐसी है कि उनके नाम भोपाल में मंत्रालय तक में गूंज रहा है। कांग्रेस और बीजेपी उनके आसपास चक्कर काट रही हैं। खबर दिखाते-दिखाते वो खुद न्यूज बन चुकी हैं और अब दूसरे इंफ्लूएंसर्स और सोशल मीडिया चैनल्स उन्हें कवर कर रहे हैं।
ऐसे इंफ्लूएंसर्स में एक नाम आदर्श पांडे का है। जर्नलिस्ट आदर्श पांडे को आप इंस्टाग्राम पर ढूंढ सकते हैं और क्या पता वो आपको भोपाल की ही किसी सड़क पर चलते फिरते नजर आएं।
कवरेज का तरीका ऐसा हो जिसे देखकर आप भी चौंक जाएं। कभी वो इंची टैप निकालकर सड़क के गड्ढे नापते हैं। तो कभी स्कूल और अस्पतालों का असल हाल बताने वाली रील पेश करते हैं।
सोनल पटेरिया का इंस्टा बायो बताता है कि ये पत्रकार हैं और भोपाल, भिलाई, नोएडा में एक्टिव रहती हैं। 91.8 के फोलोअर्स वाली सोनल पटेरिया ने बालाघाट की घटना पर ऐसी तस्वीरें दिखाईं जो शायद आपको किसी भी मेन स्ट्रीम मीडिया में नजर नहीं आई होगी। बेगा ट्राइबस के असल हालात से लेकर मोबाइल एंबुलेंस पर सरकार के दावों की उन्होंने बखिया उधेड़ दी।
इटारसी के कपिल चौकसे भी कुछ ऐसे ही हालात दिखाते हैं। कपिल चौकसे वैसे तो इटारसी की हर हैपनिंग कवर करते हैं, लेकिन जब मौका मिलता है शहर के बुरे हालात दिखाने से भी गुरेज नहीं करते और अपने अंदाज में सिस्टम पर चोट भी मारते हैं।
इंफ्लूएंसर्स की तरह कुछ लोग सोशल मीडिया चैनल बनाकर भी पत्रकारिता का फर्ज अदा कर रहे हैं। मसलन विंध्य के हालात दिखाने वाला विराट न्यूज।
या फिर ट्रूथ ऑफ भोपाल जो भोपाल की हैपनिंग्स के साथ-साथ अलग-अलग जगहों का असल हाल भी दिखा रहे हैं।
ग्राउंड रिपोर्ट, लोकल न्यूज जैसे कुछ कीवर्ड डालकर आप अपने शहर के साथ सर्च करेंगे तो आपको ऐसे बहुत सारे हैंडल्स दिख जाएंगे। जहां लोकल लोग ही पत्रकार बनकर जनता की आवाज उठा रहे हैं। इनकी विश्वसनीयता पर कोई सवाल भी नहीं है। क्योंकि पोस्ट शेयर होते ही आम लोग खुद ही दूध का दूध और पानी का पानी कर देते हैं।
सामाजिक सरोकार और आम लोगों की आवाज उठाने वाली पत्रकारिता में आप एक नाम 'द सूत्र' का भी रख सकते हैं। जो आपकी आवाज बनने को हमेशा तैयार रहा है। इसका एक उदाहरण है एमपी एसआई भर्ती परीक्षा। जिसमें जेन जी को हाईकोर्ट से राहत मिलने तक 'द सूत्र' उनकी आवाज उठाता रहा।
पत्रकारिता का ये नया दौर ठंडी हवा के उस झौंके की तरह है जो चिखने चिल्लाने वाली उमस से भरी न्यूज एंकरिंग के बीच राहत देता है। ये यकीन दिलाता है कि आपकी आवाज उठाने वाला और उसे हुक्मरानों तक पहुंचाने वाला कोई तो है। News Strike | न्यूज स्ट्राइक
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हम आज आपको कुछ ऐसे ही इंफ्लूएंसर्स से रुबरू करवाएंगे। जिन पर बड़े चैनल्स नजर भी नहीं डालते या उन्हें दिखाना जरूरी नहीं समझते। ऐसी हर खबर को अलग अंदाज में अलग नजरिए से पेश कर रहे हैं इंफ्लूएंसर्स।
जिनका तरीका इतना देसी इतना दिलचस्प है कि आप उन्हें देखने से खुद को रोक नहीं सकते। मुश्किलों और सिस्टम की नाकामी को पेश करने का अंदाज भी ऐसा है कि सरकार की पेशानी पर बल पड़ जाएं।
टीवी न्यूज को सोशल मीडिया से बड़ी चुनौती
अखबारों ने भी दिखा दिया कि उनकी जड़ हर घर तक फैली है और न्यूज के लिए वो किसी तरह के तार या केबल पर डिपेंड नहीं करते। सो अखबार को कोई चुनौती नहीं है, लेकिन चौबीस घंटे के खबरिया चैनल्स को है।
सोशल मीडिया के दौर ने ये साबित कर दिया है कि चौबीस घंटे के न्यूज चैनल्स को टिके रहना है तो गजब के कॉम्पिटीशन का सामना करना पड़ेगा और ये कॉम्पिटीशन दे भी कौन रहा है।
बिना तामझाम के छा रहे देसी पत्रकार
ये पत्रकार वन मैन आर्मी की तरह जमीन पर उतरते हैं। अपने ठेठ लहजे और देसी अंदाज में खबर परोसते हैं और लाखों दिलों के चहेते बन जाते हैं। अपनी तारीफ में ये हर हफ्ते टीआरपी और बार्क रेटिंग का दम भी नहीं भरते। इनके फॉलोअर्स के बढ़ते काउंट और कमेंट्स इनकी उपलब्धि का बखान खूब करते हैं।
हरबोले से इंफ्लूएंसर तक का सफर
आप ये कह सकते हैं कि गुजरे दौर के हरबोले अब इंफ्लूएंजर्स के नाम से आपकी दुनिया में हैं। कॉपीराइट के नियमों के अनुसार हम जितना आपको दिखा सकते हैं। उनके बारे में आज जरूर दिखाएंगे। शुरुआत बिट्टू तबाही से ही करते हैं।
बिट्टू तबाही का ताल्लूक सीधे सीधे एमपी से नहीं है, लेकिन वो मप्र के ब्यावरा की अजनार नदी का हाल दिखाकर जबरदस्त मीडिया सेंशन बन गए। असल नाम सुरेंद्र सिंह चौधरी है और खुद को एनवायर्मेंट एक्टिविस्ट बताते हैं। इंस्टाग्राम पर उनके 1.9 मिलियन फॉलोअर्स हो चुके हैं।
बिट्टू की खास बात ये है कि वो सज संवरकर कैमरे के सामने नहीं आते। बल्कि आम से लोअर टीशर्ट में वो किसी भी नदी का कचरा साफ करते हुए दिख जाते हैं।
सुर्खियों में हैं लीला साहू
खबर की गहराई तक जाती हैं और वीडियो पोस्ट कर देती हैं। इस पूरी प्रक्रिया में लीला साहू का घूंघट सिर से नहीं उतरता और सिंदूर की चमक कम नहीं होती।
पत्रकारिता की धार ऐसी है कि उनके नाम भोपाल में मंत्रालय तक में गूंज रहा है। कांग्रेस और बीजेपी उनके आसपास चक्कर काट रही हैं। खबर दिखाते-दिखाते वो खुद न्यूज बन चुकी हैं और अब दूसरे इंफ्लूएंसर्स और सोशल मीडिया चैनल्स उन्हें कवर कर रहे हैं।
देसी अंदाज में छा रहे आदर्श पांडे
कवरेज का तरीका ऐसा हो जिसे देखकर आप भी चौंक जाएं। कभी वो इंची टैप निकालकर सड़क के गड्ढे नापते हैं। तो कभी स्कूल और अस्पतालों का असल हाल बताने वाली रील पेश करते हैं।
जमीनी सच दिखा रहे सोनल पटेरिया
जमीनी मुद्दों की आवाज बने कपिल
छोटे चैनल दिखा रहे बड़ा सच
भोपाल की हर हलचल पर नजर
लोकल लोग बन रहे खबरों की आवाज
आम लोगों की आवाज बनती पत्रकारिता
पत्रकारिता का ये नया दौर ठंडी हवा के उस झौंके की तरह है जो चिखने चिल्लाने वाली उमस से भरी न्यूज एंकरिंग के बीच राहत देता है। ये यकीन दिलाता है कि आपकी आवाज उठाने वाला और उसे हुक्मरानों तक पहुंचाने वाला कोई तो है। News Strike | न्यूज स्ट्राइक
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