सिंहासन छत्तीसी : मंत्री से MD तक कमीशन फिक्स, साहब के मैसेज ने मचाया हड़कंप

Arun Tiwari | Aug 23, 2026, 11:46 IST
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फिक्स्ड कमीशन
फिक्स्ड कमीशन

'द सूत्र' के स्तंभ 'सिंहासन छत्तीसी' में छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक भ्रष्टाचार का खुलासा किया गया है—खरीदी में मंत्री से सेक्रेटरी तक का कमीशन तय है, एक वायरल संदेश से विभाग में हड़कंप मचा और गड्ढे ने नेताजी को जमीनी हकीकत दिखाई।

RAIPUR : छत्तीसगढ़ में कमीशन का खेल बहुत जोर से चल रहा है। खरीदी जिस चीज़ की हो रही है वो भले ही अति आवश्यक वस्तु में शामिल हो, लेकिन कमीशन सबका फिक्स है। मंत्री, चेयरमैन, एमडी और सेक्रेटरी सभी का अपना अपना हिस्सा है। खरीदी की गुणवत्ता से किसी को कोई सरोकार नहीं है।

वहीं एक साहब के मैसेज ने हड़कम्प मचा दिया है। क्या लिखा है मैसेज में वो हम आपको बताएंगे। मैसेज वाट्सएप के विभागीय ग्रुप पर आया। इस मैसेज के बाद कर्मचारी मुश्किल में आ गए हैं। छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों की ऐसी ही अनसुनी खबरों के लिए पढ़िए द सूत्र का साप्ताहिक कॉलम सिंहासन छत्तीसी।

6 परसेंट के मंत्री 4 परसेंट के चेयरमैन :

Simhasan Chhatteesi
Simhasan Chhatteesi


छत्तीसगढ़ में सरकारी खरीदी जेब भरने का साधन बनी हुई है। उपर से नीचे तक सबके कमीशन फिक्स हैं। खरीदी भी उस वस्तु की जो अति आवश्यक में शामिल है तो फिर कहना ही क्या। हम बात कर रहे हैं यह खरीदी करने वाले एक कार्पोरेशन की। यह पहली बार नहीं है, पहले भी इस तरह के सवाल उठते रहे हैं।

अब हम आपको कमीशन का परसेंटेज बताते हैं। इस विभाग के मंत्रीजी लेते हैं 6 परसेंट, कार्पोरेशन के चेयरमैन का हिस्सा 4 परसेंट पर फिक्स है। जब यह नदी उपर से बह रही है तो फिर उनसे नीचे वाले कैसे इसमें डुबकी नहीं लगाएंगे। इसके बाद नंबर आता है कार्पोरेशन के एमडी का। एमडी 4 परसेंट और विभाग के सेक्रेटरी का भी 4 परसेंट का हिस्सा तय है।

इतने कमीशन के बाद जो वस्तु खरीदी जा रही है वो असली है या नकली है इसकी कोई गारंटी नहीं है। जो सप्लाई कर रहा है वो जब इतना कमीशन बांटेगा तो फिर कौन उसकी कॉलर पकड़ेगा। वो भी अपना फायदा निकालने के लिए गुणवत्ता में तो काला पीला करता ही होगा। इस तरह छत्तीसगढ़ में सुशासन चल रहा है।

GOOD MORNING से शुरू हुई घबराहट की कहानी :

Simhasan Chhatteesi
Simhasan Chhatteesi


रायपुर के सरकारी गलियारों में इन दिनों फाइलों से ज्यादा चर्चा एक व्हाट्सएप मैसेज की है। मैसेज भी कोई आम-सा नहीं, बल्कि जल संसाधन विभाग के एक साहब के नाम से वायरल हुआ है। शुरुआत बड़ी शालीन GOOD MORNING”से होती है, लेकिन आगे बढ़ते-बढ़ते मामला इतना गंभीर हो जाता है कि पढ़ने वाला भी सोचने लगे कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि सुप्रभात के बाद सीधे SHOCKED तक पहुंचना पड़ा।

वायरल संदेश में साहब की ओर से कहा गया है कि मुख्यमंत्री कार्यालय से एक फॉरवर्डेड संदेश मिला, जिसे पढ़कर वे और CMO दोनों हैरान हैं। इसके बाद मातहत अधिकारियों और कर्मचारियों को चेतावनी दी गई है कि “साजिश” की जांच कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने शुरू कर दी है। फोन रिकॉर्ड, मैसेज और बैठकों तक की निगरानी की बात कही गई है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। अब साहब का संदेश है तो असर होना ही था।

विभागीय गलियारों में व्हाट्सएप की घंटी शायद पहले से थोड़ी ज्यादा तेज सुनाई देने लगी होगी। कौन किस ग्रुप में है, किसने क्या लिखा, किसने किसे फॉरवर्ड किया इन सवालों ने निश्चित ही कई लोगों की धड़कनें बढ़ाई होगी।

चेतावनी देने के बाद साहब ने कहा कि विभाग का वेतन-पेंशन पाने वाले अधिकारी-कर्मचारी और उससे जुड़े लोग ही विभाग के खिलाफ साजिश कर रहे हैं। साजिश शब्द आते ही विभाग में हड़कंप मच गया। इस सब बातों से इतना तो साफ है कि कुछ बड़ा खेल हुआ है जो अपनी कॉलर बचाने के लिए कर्मचारियों का गला काटने की तैयारी की जा रही है।

गड्ढे में फंसा नेताजी का पहिया:

Simhasan Chhatteesi
Simhasan Chhatteesi


अंबिकापुर की सड़कें इन दिनों शायद यही सोच रही होंगी कि भाई, हम तो बरसों से यहीं हैं, आज अचानक हमारी इतनी इज्जत कैसे बढ़ गई। फर्क बस इतना पड़ा कि रोज इन गड्ढों से गुजरने वाली जनता की जगह इस बार संगठन के बड़े भाईसाहब की गाड़ी एक गड्ढे में फंस गई। फिर क्या था, जो गड्ढा अब तक व्यवस्था की नजर में मामूली था, वह सीधे सत्ता के ड्राइंग रूम तक पहुंच गया।

रात में नेताओं की बैठक हुई तो सड़क का गड्ढा धीरे-धीरे संगठन की बैठक के एजेंडे में पहुंच गया। भाईसाहब ने नेताओं को खरी-खरी सुना दी। उन्होंने कहा कि सब ठेकेदार बन गए हैं, संगठन का काम कौन करेगा और जनता का काम कौन करेगा। अगली सुबह मामला और ऊपर चढ़ा। मंत्री की मौजूदगी में अंबिकापुर और सीतापुर की सड़कों की चर्चा हुई और प्रभारी मंत्री तक फोन पहुंच गया।

यानी जिस गड्ढे को आम आदमी रोज पार करके अपनी किस्मत को कोसता था, उसने एक झटके में सरकारी तंत्र को भी हिला दिया। लेकिन कहानी में असली मसाला सड़क नहीं, संकेत है।बाद फिर जनता के बीच जाना है। ऐसे में सवाल सड़क का कम और सरकार की जमीन का ज्यादा है। क्योंकि चुनाव के समय जनता को सड़क पर किया गया भाषण कम और सड़क पर मिले गड्ढे ज्यादा याद रहते हैं।

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