सिंहासन छत्तीसी : नाक काट रहे मिनिस्टर, पिछली गली से ग्रिल तोड़कर भागे कलेक्टर
Arun Tiwari | Jul 05, 2026, 12:48 IST
नकटी-कांड-मंत्री-कलेक्टर-भागे
रायपुर के नकटी कांड में बरसात में गरीबों के आशियाने टूटे, जिससे सरकार और सांसद की किरकिरी हुई। आक्रोशित जनता से बचकर कलेक्टर पिछली गली से भागे, जबकि एक आईएएस के फिटनेस वीडियो पर बवाल मचा है।
RAIPUR : छत्तीसगढ़ में इन दिनों बवाल मचा हुआ है। रायपुर नकटी गांव में किस किस की नाक कटी है,इसीका अंदाजा नहीं लग पा रहा है। लेकिन इतना जरुर है कि नाक तो कटी है। माननीयों के लिए मजबूरों का घर उजाड़ा गया है वो भी भरी बरसात में। अब ऐसा क्यों हुआ ये तो मंत्रीजी ही जानें। वहीं जिले की सरकार कहे जाने वाले कलेक्टर साहब को आनन फानन में ग्रिल कटवाकर भागना पड़ा आखिर ऐसी नौबत ही क्यों आई। अब अफसर प्रशासक कम बॉडी बिल्डर ज्यादा बन रहे हैं, अब बन ही गए हैं तो दूसरों को मिर्ची क्यों लग रही हैं। छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों की ऐसी ही अनसुनी खबरों के लिए द सूत्र पर पढ़िए सिंहासन छत्तीसी।
![रायपुर नकटी कांड]()
रायपुर के नकटी कांड में कई किरदार हैं। लोग कहते हैं कि एक मंत्री की जिद ने नाक कटवा दी। नाक किसकी कटी सुशासन सरकार की या बीजेपी के सबसे सीनियर सांसद की। मंत्रीजी की दिलचस्पी थी यहां पर माननीयों के बंगले बनाने की। जब राजस्व मंत्री को पता नहीं था कि कहां पर विधायकों और सांसदों के बंगले बनने हैं तब मंत्रीजी जानते थे कि यह काम कहां होगा और कब होगा। बात भी सही है कि जब मंत्री का वचन ही शासन हो तो फिर कहना ही क्या। लोग कहते हैं कि इस कांड में कई नाक काट दी गईं।
पहली नाक तो सरकार की है क्योंकि यह सुशासन सरकार है, जिस पीएम आवास को बीजेपी ने मुद्दा बनाया था उन पीएम आवास को ही तोड़ दिया। पीएम गरीबों को छत दे रहे हैं और छत्तीसगढ़ सरकार उनके सिर से छत छीन रही है। असलियत कुछ भी हो बातें तो यही हो रही हैं। दूसरी नाक कटी सांसदजी की। एक दिन पहले वे वचन देकर आए कि गरीबों के आशियानें नहीं उजड़ेंगे लेकिन अगले कुछ दिन में ही बुलडोजर पहुंच गया और घरों की दीवारें टूट गईं।
अब सांसद जी कह रहे हैं कि जिन्होंने घर तोड़े हैं उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन माननीय जिन्होंने तुड़वाए हैं उन पर क्या होना चाहिए। प्रदेश में जिनकी कभी तूती बोलती थी उनकी अब एक अदद अधिकारी नहीं सुन रहा। विधायक जी ने पैर पकड़कर वोट मांग लिए अब पतली गली से खिसक गए। खैर वो तो एक्टर हैं ही उनकी एक्टिंग के तो क्या कहने। खैर अब क्या होना है जो होना था वो तो हो ही गया।
![पिछली गली से भागे कलेक्टर]()
लोकतंत्र भी गजब चीज है भाई। जब जनता आती है तो अच्छे अच्छे साहब भी पिछली गली से भाग जाते हैं। नकटी कांड के लोग जब कलेक्ट्रेट पहुंचे तो मानों सारे सिस्टम को सांप सूंघ गया। साहब की इतनी हिम्मत नहीं थी कि वे उनका सामना कर सकें। और हिम्मत भी आखिर कैसे होगी जबकि साहब बुलडोजर पर सवार हैं।
नकटी के प्रभावित लोगों ने जब कलेक्टर कार्यालय घेरा तो साहब ने भागने के लिए पिछली गली तलाशी। लेकिन वहां तो ग्रिल लगी हुई थी। आनन फानन में ग्रिल काटने वालों को बुलाया गया। उन्होंने ग्रिल काटी तो साहब अपनी कार से पिछली गली से फार्राटा मारते हुए निकल गए। आखिर ऐसा करना ही क्यों जब पिछली गली से ग्रिल कटवाकर भागना पड़े।
![एक ने बनाई बॉडी दूसरे को लगी मिर्ची]()
छत्तीसगढ़ के आईएएस जो न करें सो कम है। एक आईएएस साहब ने 46 की उम्र में बॉडी बना ली। अब फिटनेस से किसी को क्या दिक्कत हो सकती है। लेकिन दिक्कत तो शुरु तब हुई जब आईएएस अफसर ने अपनी बॉडी ट्रांसफॉर्मिंग का वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिया।
फिर क्या था कई अफसरों को मिर्ची लग गई। इनमें वे अफसर शामिल थे जो प्रमोटी आईएएस हैं। मिर्ची इस बात की लगी कि सरकार उन पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है जबकि वे खुलेआम अपनी रील बनाकर लोगों को दिखा रहे हैं। कई अफसर ये चर्चा भी कर रहे हैं कि बॉडी तो उनकी भी है लेकिन उन्होंने कभी शोऑफ नहीं किया। अब बॉडी बिल्डिंग सिविल सेवा आचरण में आती है या नहीं ये तो सरकार जाने लेकिन चर्चा में ये बात खूब आती है।
द सूत्र पर पढ़िए
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ऐसा क्यों किया मंत्रीजी :
रायपुर नकटी कांड
रायपुर के नकटी कांड में कई किरदार हैं। लोग कहते हैं कि एक मंत्री की जिद ने नाक कटवा दी। नाक किसकी कटी सुशासन सरकार की या बीजेपी के सबसे सीनियर सांसद की। मंत्रीजी की दिलचस्पी थी यहां पर माननीयों के बंगले बनाने की। जब राजस्व मंत्री को पता नहीं था कि कहां पर विधायकों और सांसदों के बंगले बनने हैं तब मंत्रीजी जानते थे कि यह काम कहां होगा और कब होगा। बात भी सही है कि जब मंत्री का वचन ही शासन हो तो फिर कहना ही क्या। लोग कहते हैं कि इस कांड में कई नाक काट दी गईं।
पहली नाक तो सरकार की है क्योंकि यह सुशासन सरकार है, जिस पीएम आवास को बीजेपी ने मुद्दा बनाया था उन पीएम आवास को ही तोड़ दिया। पीएम गरीबों को छत दे रहे हैं और छत्तीसगढ़ सरकार उनके सिर से छत छीन रही है। असलियत कुछ भी हो बातें तो यही हो रही हैं। दूसरी नाक कटी सांसदजी की। एक दिन पहले वे वचन देकर आए कि गरीबों के आशियानें नहीं उजड़ेंगे लेकिन अगले कुछ दिन में ही बुलडोजर पहुंच गया और घरों की दीवारें टूट गईं।
अब सांसद जी कह रहे हैं कि जिन्होंने घर तोड़े हैं उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन माननीय जिन्होंने तुड़वाए हैं उन पर क्या होना चाहिए। प्रदेश में जिनकी कभी तूती बोलती थी उनकी अब एक अदद अधिकारी नहीं सुन रहा। विधायक जी ने पैर पकड़कर वोट मांग लिए अब पतली गली से खिसक गए। खैर वो तो एक्टर हैं ही उनकी एक्टिंग के तो क्या कहने। खैर अब क्या होना है जो होना था वो तो हो ही गया।
पिछली गली से भागे कलेक्टर :
पिछली गली से भागे कलेक्टर
लोकतंत्र भी गजब चीज है भाई। जब जनता आती है तो अच्छे अच्छे साहब भी पिछली गली से भाग जाते हैं। नकटी कांड के लोग जब कलेक्ट्रेट पहुंचे तो मानों सारे सिस्टम को सांप सूंघ गया। साहब की इतनी हिम्मत नहीं थी कि वे उनका सामना कर सकें। और हिम्मत भी आखिर कैसे होगी जबकि साहब बुलडोजर पर सवार हैं।
नकटी के प्रभावित लोगों ने जब कलेक्टर कार्यालय घेरा तो साहब ने भागने के लिए पिछली गली तलाशी। लेकिन वहां तो ग्रिल लगी हुई थी। आनन फानन में ग्रिल काटने वालों को बुलाया गया। उन्होंने ग्रिल काटी तो साहब अपनी कार से पिछली गली से फार्राटा मारते हुए निकल गए। आखिर ऐसा करना ही क्यों जब पिछली गली से ग्रिल कटवाकर भागना पड़े।
एक ने बनाई बॉडी,दूसरे को लगी मिर्ची :
एक ने बनाई बॉडी दूसरे को लगी मिर्ची
छत्तीसगढ़ के आईएएस जो न करें सो कम है। एक आईएएस साहब ने 46 की उम्र में बॉडी बना ली। अब फिटनेस से किसी को क्या दिक्कत हो सकती है। लेकिन दिक्कत तो शुरु तब हुई जब आईएएस अफसर ने अपनी बॉडी ट्रांसफॉर्मिंग का वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिया।
फिर क्या था कई अफसरों को मिर्ची लग गई। इनमें वे अफसर शामिल थे जो प्रमोटी आईएएस हैं। मिर्ची इस बात की लगी कि सरकार उन पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है जबकि वे खुलेआम अपनी रील बनाकर लोगों को दिखा रहे हैं। कई अफसर ये चर्चा भी कर रहे हैं कि बॉडी तो उनकी भी है लेकिन उन्होंने कभी शोऑफ नहीं किया। अब बॉडी बिल्डिंग सिविल सेवा आचरण में आती है या नहीं ये तो सरकार जाने लेकिन चर्चा में ये बात खूब आती है।
द सूत्र पर पढ़िए सिंहासन छत्तीसी ...
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