सिंहासन छत्तीसी : मंत्री की मर्जी से नाराज सांसद ने दी सीएम को अर्जी, आखिर सत्ता से संगठन तक क्यों हो रहा महिलाओं से परहेज
Arun Tiwari | Dec 07, 2025, 14:09 IST
Photograph: (the sootr)
छत्तीसगढ़ के राजनीतिक-प्रशासनिक हलकों में जमीनों की नई गाइडलाइन को लेकर बवाल हैं। बीजेपी में संगठन से सरकार तक महिलाओं को आगे बढ़ाने में कंजूसी,छत्तीसगढ़ की राजनीतिक-प्रशासनिक अनसुनी खबरों के लिए पढ़िए द सूत्र का साप्ताहिक कॉलम सिंहासन छत्तीसी।
sinhaasan chhatteesee. छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में एक बार फिर बवाल मचा हुआ है। यह बवाल जमीनों की नई गाइडलाइन को लेकर हैं। बताया जा रहा है कि यह पूरा बदलाव एक मंत्री के कहने पर हुआ है। इस गाइडलाइन के कारण बीजेपी के सांसद ही सरकार पर हमलावर हो गए हैं। किसे फायदा किसे नुकसान इस बात को लेकर बहस छिड़ गई है।
वहीं बीजेपी के संगठन से लेकर सरकार तक महिलाओं को आगे बढ़ाने में कंजूसी क्यों बरती जा रही है, इन दिनों इस सवाल पर बहस हो रही है। छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों की अनसुनी खबरों को जानने के लिए पढ़िए द सूत्र का साप्ताहिक कॉलम सिंहासन छत्तीसी।
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एक मंत्री ने ऐसा फैसला कर लिया जिससे उनकी ही पार्टी के एक सीनियर सांसद नाराज हो गए। फैसले पर सवाल उठ गया और बवाल मच गया। सांसद ने सीएम को चिट्ठी लिख दी और इस फैसले को अनुचित बता दिया। उन्होंने तो यहां तक कहा कि छत्तीसगढ़ में नई कलेक्टर गाइडलाइन पर फैसले को लेकर सरकार पूरी तरह कन्फ्यूज है। उन्होंने सुझाव दिया कि छत्तीसगढ़ सरकार को रेवेन्यू डिपार्टमेंट के एक्सपर्ट्स, रियल एस्टेट प्रतिनिधियों और किसानों के संगठनों को मिलाकर एक हाई-लेवल कमेटी बनानी चाहिए।
वहीं कांग्रेस के नेता भी सुर में सुर मिलाते हुए कह रहे हैं सुना है कि जमीन खरीदी पर अव्यवहारिक गाइडलाइन रेट लादने वाले मंत्री जी ने कहा है कि यह ऊपर से अप्रूव हो चुका है। प्रदेश की जनता जानना चाहती है कि राज्य के कैबिनेट से ऊपर कौन है। दरअसल इस फैसले को दो तरह से देखा जा रहा है।
कांग्रेस और बीजेपी एक सुर में कह रहे हैं कि इससे रियल इस्टेट तबाह हो जाएगा। लेकिन इसका दूसरा पक्ष भी है मंत्री के करीबी कहते हैं कि गाइडलाइन रेट बढ़ने से भूमाफियाओं और बिल्डरों को नुकसान होगा तो नेताओं का भी जमीन में इंवेस्टमेंट का धंधा मार खाएगा। ब्यूरोक्रेट्स की अपनी अलग बेचैनी है,काली कमाई को अब कहां खपाएंगे। यही वजह है कि चौतरफा प्रेशर बनाया जा रहा है।
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हमेशा महिलाओं को आगे बढ़ाने की बात करने वाली बीजेपी में महिलाओं से परहेज क्यों किया जा रहा है। हम बात छत्तीसगढ़ की कर रहे हैं। यहां पर बीजेपी के संगठन से लेकर सरकार तक महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने में कंजूसी बरती गई है। बीजेपी संगठन में नेतृत्व को लेकर तो सरकार में प्रशासनिक पदों पर महिलाओं की जगह पुरुषों को तवज्जो दी गई है।
छत्तीसगढ़ भाजपा ने विधानसभा प्रभारी, जिला प्रभारी और प्रकोष्ठ में 117 पदाधिकारियों की नियुक्ति की। इनमें 117 में से 108 पद पुरुषों को दिए गए हैं, जबकि महिलाओं को सिर्फ 9 पद मिले हैं। इसी तरह 36 विधानसभा में से केवल एक विधानसभा में महिला नेत्री को प्रभारी बनाया गया है। वहीं प्रकोष्ठों में 2 और जिलों में 6 महिलाओं को प्रतिनिधित्व दिया गया है।
वही सरकार का हाल देखें तो जूनियर अफसर के चीफ सेक्रेटरी बनने की वजह से रेणु पिल्ले मंत्रालय से बाहर हो गईं। ऋचा शर्मा को चीफ सेक्रेटरी बनने का मौका नहीं मिला, उपर से खाद्य विभाग भी हाथ से निकल गया। आर संगीता का शराब से जुड़ी कंपनी और बोर्ड के एमडी का प्रभार भी पीएस एल्मा के पास चला गया।
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मंत्री की नाराजगी का खामियाजा दो अफसरों को उठाना पड़ा। आबकारी मंत्री लखनलाल देवांगन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो वरिष्ठ अधिकारियों को हटा दिया है। दोनों को तत्काल प्रभाव से मूल विभाग में भेज दिया गया है। वाणिज्यिक कर विभाग के विशेष सचिव ने इस बाबत आदेश भी जारी किया है।
आदेश में ब्रेवरेज कारपोरेशन में महाप्रबंधक और स्टेट मार्केटिंग कंपनी के जॉइंट एमडी के पद पर लंबे समय से जमे दो वरिष्ठ अधिकारियों को हटाया गया है। बताया जा रहा है कि मंत्री देवांगन इन दोनों अफसरों से नाराज थे। सूत्रों के मुताबिक मंत्री इन अफसरों की कार्यशैली पर गुस्सा थे। कई बार मंत्री की तरफ से इनको हिदायत भी दी गई थी लेकिन उसमें सुधार नहीं हुआ। मंत्री को यह भी अंदेशा था कि कहीं इस विभाग में फिर से कोई बड़ी गड़बड़ी न हो जाए।
वहीं बीजेपी के संगठन से लेकर सरकार तक महिलाओं को आगे बढ़ाने में कंजूसी क्यों बरती जा रही है, इन दिनों इस सवाल पर बहस हो रही है। छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों की अनसुनी खबरों को जानने के लिए पढ़िए द सूत्र का साप्ताहिक कॉलम सिंहासन छत्तीसी।
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मंत्री की मर्जी से बवाल,सांसद ने उठाए सवाल :
वहीं कांग्रेस के नेता भी सुर में सुर मिलाते हुए कह रहे हैं सुना है कि जमीन खरीदी पर अव्यवहारिक गाइडलाइन रेट लादने वाले मंत्री जी ने कहा है कि यह ऊपर से अप्रूव हो चुका है। प्रदेश की जनता जानना चाहती है कि राज्य के कैबिनेट से ऊपर कौन है। दरअसल इस फैसले को दो तरह से देखा जा रहा है।
कांग्रेस और बीजेपी एक सुर में कह रहे हैं कि इससे रियल इस्टेट तबाह हो जाएगा। लेकिन इसका दूसरा पक्ष भी है मंत्री के करीबी कहते हैं कि गाइडलाइन रेट बढ़ने से भूमाफियाओं और बिल्डरों को नुकसान होगा तो नेताओं का भी जमीन में इंवेस्टमेंट का धंधा मार खाएगा। ब्यूरोक्रेट्स की अपनी अलग बेचैनी है,काली कमाई को अब कहां खपाएंगे। यही वजह है कि चौतरफा प्रेशर बनाया जा रहा है।
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सरकार से संगठन तक,महिलाओं से परहेज :
छत्तीसगढ़ भाजपा ने विधानसभा प्रभारी, जिला प्रभारी और प्रकोष्ठ में 117 पदाधिकारियों की नियुक्ति की। इनमें 117 में से 108 पद पुरुषों को दिए गए हैं, जबकि महिलाओं को सिर्फ 9 पद मिले हैं। इसी तरह 36 विधानसभा में से केवल एक विधानसभा में महिला नेत्री को प्रभारी बनाया गया है। वहीं प्रकोष्ठों में 2 और जिलों में 6 महिलाओं को प्रतिनिधित्व दिया गया है।
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मंत्री नाराज, अफसरों की छुट्टी :
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