सिंहासन छत्तीसी : सीएम के करीबी को महंगा पड़ा ट्रैफिक रुल तोड़ना, अब राम की याद आई

Arun Tiwari | May 24, 2026, 11:41 IST
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छत्तीसगढ़ के सियासी गलियारों में सीएम के करीबी का ई-चालान कटने, एक पूर्व भ्रष्ट अधिकारी के अध्यात्म की ओर मुड़ने, विश्वविद्यालय में रजिस्ट्रार की फाइल गायब होने की चर्चा है। आज के सिंहासन छत्तीसी में पढ़िए इन घटनाओं के बारे में विस्तार से

RAIPUR : छत्तीसगढ़ के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों बड़ी चर्चा है। चर्चा लाजिमी भी है। सीएम के करीबी और वो भी मंत्री दर्जा पाए हुए किसी व्यक्ति का चालान कट जाए ऐसी हिम्मत तो ट्रैफिक पुलिस में है नहीं। लेकिन ऐसा हो गया। साहब ने ट्रैफिक रुल तोड़ा और उनके पास ई चालान पहुंच गया। हैरानी की बात तो इसके बाद हुई वो हम आपको आगे बताएंगे।

वहीं एक विश्वविद्यालय में नियुक्ति की फाइल है जो चलती तो है लेकिन कुछ दिन बात गायब हो जाती है। आखिर ये फाइल कहां जाती है ये किसी को नहीं पता। वहीं बीजेपी के दिल्ली से आए नेता ने कार्यकर्ताओं को ऐसी घुट्टी पिलाई कि वे सन्न रह गए। छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों की ऐसी ही अनसुनी खबरों के लिए पढ़िए द सूत्र पर पढ़िए सिंहासन छत्तीसी।

चालान कटा या नाक कटी :

Was It a Fine or a Loss of Face
Was It a Fine or a Loss of Face


सीएम के एक बेहद करीबी और बौद्धिक रुप से समृद्ध एक भाईसाहब का चालान कट गया। चालान कटना कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन चर्चा का विषय यह इसलिए है क्योंकि उनको मंत्री दर्जा मिला हुआ है। अब चालान कटा है या नाक, यह बहस का विषय हो सकता है। इन भाईसाहब ने नई गाड़ी खरीदी है। जाहिर है इस गाड़ी में वे घूमने निकले होंगे।

घूमने में अपने ओहदे के कारण ध्यान नहीं रहा होगा और कोई ट्रैफिक रुल तोड़ दिया होगा। अब तकनीक कोई इंसान तो नहीं है जो आम और खास में फर्क करे। बस भाईसाहब के पास ई चालान पहुंच गया। यह ई चालान पांच हजार रुपए का था। भाईसाहब को यह नागवार गुजरा।

उन्होंने ट्रैफिक के एक अफसर को फोन घनघना दिया। अब अफसर भी नाक वाला था। अफसर ने इन भाईसाहब के पास 5 हजार को बढ़ाकर 8 हजार का चालान पहुंचा दिया। अब लोग यही सोच रहे हैं कि सीएम के करीबी का ये हाल हो सकता है तो उनका तो भगवान ही मालिक है इसलिए ट्रैफिक रुल फॉलो करने में ही भलाई है।

भ्रष्टाचार से आश्रम तक:

particular appointment file
particular appointment file


एक अफसर ने जीवन भर अवैध कमाई और अब उनको राम की याद आई। अब तो साहब ने नाम भी बदल लिया है। नाम बदलकर आश्रम भी बना लिया है। अब राम नाम की गंगा में डुबकी लगाकर अपने पाप धो रहे हैं। छत्तीसगढ़ की सियासत और नौकरशाही में लंबे समय तक चर्चाओं में रहे पूर्व अधिकारी एक बार फिर सुर्खियों में हैं।

फर्क सिर्फ इतना है कि कभी जिनका नाम आर्थिक अनियमितताओं, ईओडब्ल्यू और एसीबी की जांचों के कारण चर्चा में रहता था, आज वही चेहरा रामकथा और आध्यात्मिक आयोजनों के मंच पर सबसे आगे दिखाई दे रहा है। भव्य धार्मिक कार्यक्रम में उनकी सक्रिय मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। मंच पर संतों, मंत्रियों और सत्ता से जुड़े चेहरों के बीच उनकी उपस्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह सिर्फ धार्मिक आस्था है या फिर सार्वजनिक छवि को नया रंग देने की कोशिश।

यह फाइल है या जादू :

Is It a File or Magic
Is It a File or Magic


छत्तीसगढ़ सरकार में जो हो जाए वही कम है। एक नियुक्ति की फाइल है जो चलती तो है लेकिन कुछ दिन बाद गायब हो जाती है। और ऐसा एक बार नहीं बल्कि कई बार हो चुका है। प्रदेश का नामी विश्वविद्यालय में तीन सालों से रजिस्ट्रार की पोस्टिंग नहीं हो पायी है। हर बार किसी के नाम की फाइल चलती है फिर फाइल कहीं खो जाती है। अभी डेढ़ माह पहले किसी इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रोफेसर के नाम की फाइल चली। यह फाइल मंत्री से होकर सचिव तक पहुंची।

यहां तक तो इस फाइल का पता था लेकिन फिर वही कहानी दोहरा दी गई और फाइल गायब हो गई। और हर बार की तरह इस बार भी मामला ठंडा पड़ गया। लोग कहते हैं कि इस विश्वविद्यालय के सबसे जिम्मेदार पदाधिकारी अपने मनपसंद व्यक्ति को रजिस्ट्रार बनवाना चाहते हैं। यही कारण है कि वे किसी न किसी का सहारा लेकर अड़ंगा लगवा देते हैं। फार्मूला एक ही है दाम करे सब काम।

सरकार न रही तो सब सड़क पर आ जाओगे :

If the Government Falls
If the Government Falls


बीजेपी की सरकार बनी है तब से पूरे प्रदेश में वसूली और दादागिरी की खबरें आ रही हैं। बीजेपी संगठन इन खबरों से परेशान है। संगठन के बड़े नेताओं ने इस बार नेता,कार्यकर्ता और पदाधिकारियों को सीधे तौर पर धमकी दे डाली है। दिल्ली से आए एक नेताजी ने सीधे कार्यकर्ताओं को निशाने पर लिया। उन्होंने साफ साफ कहा कि सरकार के दम पर आपकी पूछ परख हो रही है।

यदि सरकार को कोई हानि हो गई तो आपको कोई पूछेगा नहीं फिर चाहे मंत्री हो या कोई भी ओहदेदार। कितने ही बड़े नेता हों सब सड़क पर आ जाएंगे। उन्होंने कहा कि अब गड़बड़ी करना तो दूर यदि कहीं कोई गड़बड़ी हो रही है तो हमे क्या फर्क पड़ता है या इससे हमें क्या वाला एटीट्यूड न अपनाएं।

उन्होंने मंत्रियों को भी नसीहत दे दी कि यदि इन कार्यकार्तओं की नहीं सुनोगे तो कल को मंत्री भी नहीं रहोगे। इतने सख्त लहजे को देखकर सभी सकपका गए। ये अलग बात है कि इस नसीहत का क्या फायदा मिलता है या फिर एक कान से सुनना और दूसरे कान से निकालना तो नहीं हो जाएगा।

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