बस्तर में 34 हजार टन धान खुले में : मानसून सक्रिय, अरबों की फसल पर संकट
Umeshwari Baghel | Jun 26, 2026, 22:13 IST
बस्तर में 34 हजार टन धान खुले में
बस्तर संभाग में 34,231 मीट्रिक टन धान अब भी उपार्जन केंद्रों में पड़ा है। बारिश के चलते 100 करोड़ रुपए से अधिक की फसल पर नुकसान का खतरा बढ़ गया है। छह जिलों में उठाव अधूरा है, जबकि दंतेवाड़ा में काम पूरा हो चुका है।
समझें क्या है पूरा मामला
सरकारी खरीद के बावजूद समय पर उठाव न होने से न सिर्फ अनाज की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है, बल्कि इसका सीधा असर हजारों करोड़ रुपए की कृषि अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
100 करोड़ से अधिक मूल्य का धान जोखिम में
विशेषज्ञों के मुताबिक अगर बारिश का असर पड़ा तो यह पूरा स्टॉक सरकारी नुकसान में बदल सकता है, जिसका असर सीधे किसानों और सहकारी व्यवस्था पर दिखेगा।
किन जिलों में कितना धान अब भी बाकी
कांकेर जिले में सबसे अधिक 14,774 मीट्रिक टन से ज्यादा धान अभी भी केंद्रों में पड़ा है। इसके बाद कोंडागांव में 7,667 मीट्रिक टन, बस्तर में 6,192 मीट्रिक टन, सुकमा में 2,905 मीट्रिक टन, बीजापुर में 2,569 मीट्रिक टन और नारायणपुर में 122 मीट्रिक टन धान शेष है। दंतेवाड़ा जिले में उठाव लगभग पूरा हो चुका है।
दंतेवाड़ा में बेहतर प्रदर्शन, सुकमा पिछड़ा
बस्तर में 34 हजार टन धान खुले में
मात्रा के आधार पर कांकेर जिला सबसे ज्यादा प्रभावित दिख रहा है क्योंकि यहां सबसे बड़ा स्टॉक अभी तक सुरक्षित भंडारण तक नहीं पहुंच सका है।
सहकारी समितियों पर बढ़ा आर्थिक दबाव
समय पर उठाव नहीं हुआ तो बढ़ सकता है संकट
प्रशासन से समाधान की उम्मीद
IMP FACTS
धान की अनुमानित कीमत 100 करोड़ रुपए से अधिक है
दंतेवाड़ा जिले में धान उठाव पूरी तरह शून्य (0 MT)
सबसे अधिक धान कांकेर में 14,774.24 मीट्रिक टन शेष
छह जिलों में अब तक धान का उठाव अधूरा
मानसून से धान खराब होने और गुणवत्ता गिरने का खतरा
सहकारी समितियों पर भंडारण और आर्थिक बोझ बढ़ा
देरी से सरकारी और किसान दोनों को नुकसान की आशंका
निष्कर्ष
FAQ
- बस्तर में कितना धान अभी उपार्जन केंद्रों में बचा है?
बस्तर संभाग के छह जिलों में करीब 34,231 मीट्रिक टन धान अभी भी उपार्जन केंद्रों में पड़ा हुआ है। - क्या इस धान को नुकसान का खतरा है?
हां, मानसून और बारिश के कारण धान की गुणवत्ता खराब होने और भारी आर्थिक नुकसान का खतरा बना हुआ है। - कौन सा जिला सबसे ज्यादा प्रभावित है?
कांकेर जिला सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहां सबसे अधिक मात्रा में धान अभी तक उठाया नहीं जा सका है।
यह खबरें भी पढ़े...
सहकारी बैंक के भीतर अग्निकांड; बंदरों की उछल-कूद से भड़की आग, कंप्यूटर और मशीनें जलकर खाक, बाल-बाल बचा कैश!
बस्तर में गांजा तस्करी का गेम ओवर ; राजस्थान से सुकमा तक फैला था सिंडिकेट
बस्तर संभाग को एक्सपर्ट डॉक्टर का इंतजार, जरूरत 355 की मौजूद हैं 45
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava