हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, खाली सीटों पर फिर होगी BSc नर्सिंग काउंसलिंग
VINAY VERMA | Jul 10, 2026, 21:19 IST
BSc नर्सिंग काउंसलिंग 2026
हाईकोर्ट ने बीएससी नर्सिंग प्रवेश को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए 10वीं परसेंटाइल की न्यूनतम पात्रता शर्त को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि भारतीय नर्सिंग परिषद (INC) द्वारा पात्रता में छूट दिए जाने के बाद राज्य सरकार नई शर्त लागू नहीं कर सकती।
छत्तीसगढ़ में बीएससी नर्सिंग प्रवेश को लेकर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार की 10वीं परसेंटाइल की न्यूनतम पात्रता शर्त को कानून के खिलाफ बताते हुए रद्द कर दिया।
अदालत ने साफ कहा कि भारतीय नर्सिंग परिषद (INC) जब पात्रता में छूट दे चुकी थी, तब राज्य सरकार या चिकित्सा शिक्षा आयुक्त अपने स्तर पर नई शर्त नहीं जोड़ सकते थे। कोर्ट ने 15 दिनों के भीतर नई काउंसलिंग कराने का आदेश दिया है।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि बीएससी नर्सिंग की सभी रिक्त सीटों के लिए नई काउंसलिंग का शेड्यूल जारी किया जाए। प्रवेश भारतीय नर्सिंग परिषद के 29 दिसंबर 2025 के आदेश के अनुसार होंगे।
किसी भी न्यूनतम परसेंटाइल की बाध्यता नहीं रहेगी। केवल कॉमन एंट्रेंस टेस्ट की इंटर-से मेरिट और अन्य निर्धारित पात्रताओं के आधार पर एडमिशन दिए जाएंगे। इससे हजारों अभ्यर्थियों को एक और मौका मिलेगा।
सुनवाई के दौरान सामने आया कि राज्य में बीएससी नर्सिंग की 7,811 सीटों में से 4,147 सीटें खाली रह गई थीं। इसके बाद राज्य सरकार ने खुद भारतीय नर्सिंग परिषद से पात्रता में छूट देने का अनुरोध किया था।
परिषद ने आदिवासी और पिछड़े इलाकों की परिस्थितियों को देखते हुए न्यूनतम क्वालिफाइंग परसेंटाइल की अनिवार्यता हटा दी। लेकिन इसके बावजूद चिकित्सा शिक्षा आयुक्त ने सभी वर्गों के लिए 10वीं परसेंटाइल की नई शर्त लागू कर दी।
कोर्ट ने इसे परिषद के आदेश के विपरीत और अधिकार क्षेत्र से बाहर माना।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि छत्तीसगढ़ नर्सिंग प्रवेश नियम 2019 के तहत भारतीय नर्सिंग परिषद द्वारा तय पात्रता ही अंतिम होगी।
परिषद यदि मानकों में बदलाव या छूट देती है तो राज्य सरकार को उसका पालन करना होगा। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि व्यावसायिक शिक्षा के मानकों पर नियंत्रण केंद्रीय कानून का विषय है।
राज्य सरकार उन्हें लागू कर सकती है, लेकिन उनमें संशोधन नहीं कर सकती।
अदालत ने यह भी माना कि 10वीं परसेंटाइल की शर्त लगाने के बाद भी दो हजार से ज्यादा सीटें खाली रह गईं। यानी सरकार का फैसला अपने उद्देश्य में भी सफल नहीं हुआ।
इससे संस्थानों की सीटें खाली रहीं और कई अभ्यर्थी प्रवेश से वंचित हो गए। कोर्ट ने इसे सरकारी निर्णय की व्यावहारिक विफलता का संकेत माना।
राज्य सरकार ने दलील दी कि प्रवेश की अंतिम तारीख निकल चुकी है। हाईकोर्ट ने यह तर्क खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि छात्रों ने समय पर न्यायालय का रुख किया था और देरी न्यायिक प्रक्रिया के कारण हुई। इसका नुकसान छात्रों को नहीं दिया जा सकता।
कोर्ट ने जरूरत पड़ने पर नर्सिंग कॉलेजों को अतिरिक्त कक्षाएं और क्लीनिकल प्रशिक्षण कराने के निर्देश दिए। साथ ही स्पष्ट किया कि यह राहत केवल शैक्षणिक सत्र 2025-26 की विशेष परिस्थितियों तक सीमित रहेगी और भविष्य के मामलों में इसे नजीर नहीं माना जाएगा।
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अदालत ने साफ कहा कि भारतीय नर्सिंग परिषद (INC) जब पात्रता में छूट दे चुकी थी, तब राज्य सरकार या चिकित्सा शिक्षा आयुक्त अपने स्तर पर नई शर्त नहीं जोड़ सकते थे। कोर्ट ने 15 दिनों के भीतर नई काउंसलिंग कराने का आदेश दिया है।
15 दिन में फिर शुरू होगी प्रक्रिया
किसी भी न्यूनतम परसेंटाइल की बाध्यता नहीं रहेगी। केवल कॉमन एंट्रेंस टेस्ट की इंटर-से मेरिट और अन्य निर्धारित पात्रताओं के आधार पर एडमिशन दिए जाएंगे। इससे हजारों अभ्यर्थियों को एक और मौका मिलेगा।
पहले खुद मांगी छूट, फिर लगा दी नई शर्त
परिषद ने आदिवासी और पिछड़े इलाकों की परिस्थितियों को देखते हुए न्यूनतम क्वालिफाइंग परसेंटाइल की अनिवार्यता हटा दी। लेकिन इसके बावजूद चिकित्सा शिक्षा आयुक्त ने सभी वर्गों के लिए 10वीं परसेंटाइल की नई शर्त लागू कर दी।
कोर्ट ने इसे परिषद के आदेश के विपरीत और अधिकार क्षेत्र से बाहर माना।
केंद्र के नियम बदलने का हक नहीं
परिषद यदि मानकों में बदलाव या छूट देती है तो राज्य सरकार को उसका पालन करना होगा। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि व्यावसायिक शिक्षा के मानकों पर नियंत्रण केंद्रीय कानून का विषय है।
राज्य सरकार उन्हें लागू कर सकती है, लेकिन उनमें संशोधन नहीं कर सकती।
सरकार की शर्त भी फेल, सीटें फिर भी खाली
इससे संस्थानों की सीटें खाली रहीं और कई अभ्यर्थी प्रवेश से वंचित हो गए। कोर्ट ने इसे सरकारी निर्णय की व्यावहारिक विफलता का संकेत माना।
छात्रों को राहत, कॉलेजों को जिम्मेदारी
कोर्ट ने जरूरत पड़ने पर नर्सिंग कॉलेजों को अतिरिक्त कक्षाएं और क्लीनिकल प्रशिक्षण कराने के निर्देश दिए। साथ ही स्पष्ट किया कि यह राहत केवल शैक्षणिक सत्र 2025-26 की विशेष परिस्थितियों तक सीमित रहेगी और भविष्य के मामलों में इसे नजीर नहीं माना जाएगा।
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