फॉर्मा सेक्टर को बढ़ाने के नाम पर सरकार खिला रही घटिया दवाई
VINAY VERMA | Jan 01, 2026, 19:30 IST
9m company drugs fail
छत्तीसगढ़ में साल 2025 में दो दर्जन से ज्यादा दवाओं के सैंपल फेल हुए। हद तो यह है कि यह आंकड़ा तब है जब इन बैच के दवाओं को अस्पतालों में सप्लाई किया जा चुका था और इसे मरीजों को खिलाया भी जा चुका था।
Raipur. छत्तीसगढ़ में साल 2025 में दो दर्जन से ज्यादा दवाओं के सैंपल फेल हुए। हद तो यह है कि यह आंकड़ा तब है जब इन बैच के दवाओं को अस्पतालों में सप्लाई किया जा चुका था और इसे मरीजों को खिलाया भी जा चुका था।
इसमें से साधारण पैरासिटामॉल से लेकर एंटीबॉयोटिक और गर्भवती माताओं को दी जाने वाली दवाएं थीं। जांच में कुछ में मौजूद कंटेंट की मात्रा बेहद कम थी और कुछ के साइड इफेक्ट भी हुए। फेल होने वाले सैंपल में से 90 प्रतिशत दवाएं छग की 9एम कंपनी की थी।
भारी मात्रा में दवाओं का सैंपल फेल होने के बाद जब हमने कार्रवाई के बारे में जाना तो पता चला कि पिछली सरकार में ऐसा नियम बनाया गया था जिससे कंपनी को दवा का ऑर्डर देना सीजीएमएससी की मजबूरी है।
बड़ी बात यह है कि इस सरकार ने उस छूट और नियम को बरकरार रखा है। जबकि अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं।
छत्तीसगढ़ में पिछली सरकार में छग में फॉर्मा सेक्टर को बढ़ाने के वादे के अनुसार कुछ नियम बनाए गए। जिसके तहत स्थानीय कंपनियों को कुछ छूट दिए गए। जैसे कि डब्ल्यूएचओ जीएमपी सर्टिफिकेट के बिना भी स्थानीय कंपनियां टेंडर में पार्टिसिपेट कर सकती थीं।
इसके अलावा एमएसएमई के तहत टर्नओवर में छूट दी थी। इसके अलावा स्थानीय कंपनी अगर टेंडर में एल1 बोली लगाने वाली कंपनी की दर पर दवा सप्लाई करने के लिए तैयार हो जाती है तो उसे 50 प्रतिशत दवा सप्लाई का हक होगा। इन छूट का सबसे अधिक फायदा स्थानीय कंपनी 9एम को हुआ।
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लगभग 4 साल पहले जब 9एम कंपनी दवा कारोबार में आई तो सीजीएमएससी यानि छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन ने एमएसएमई कंपनी माना। लेकिन बीते 4 सालों में दवा कंपनी प्रदेश में ही करोड़ों की दवा सप्लाई कर चुकी है।
भारी टर्नओवर होने के बावजूद सीजीएमएससी 9 एम कंपनी को एमएसएमई के तहत ही छूट दे रही है।
ठेके की शर्तों अनुसार यदि किसी कंपनी की दवाओं के 5 बैच की गुणवत्ता खराब मिलती है, तो उसे तीन साल के लिए ब्लैकलिस्टेड कर दिया जाता है। लेकिन, अफसर 9 एम को ब्लैकलिस्ट करने के बजाय गुणवत्ता में फेल हो रही दवाओं का उठाव कर नए बैच की आपूर्ति करने का आदेश दे रहे हैं।
अस्पतालों में खपाई जा रही 9एम कंपनी की घटिया दवाओं की फेहरिस्त लंबी है जिसमें बुखार की दवा पैरासिटामॉल से लेकर एंटीबॉयोटिक तक शामिल है। इंजेक्शन सिरप, गर्भवती महिलाओं को दी जाने वाली ऐसी दवाएं भी थीं जिससे गर्भ में पल रहे बच्चे पर उसका असर होता या गर्भपात भी हो सकता था।
ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाले औजारों में भी जंग लगे रहने की शिकायत जब अस्पतालों ने की तब जाकर सीजीएमएससी हरकत में आया और दवाओं के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाते हुए, स्टॉक वापस मंगाया गया। ऐसा 9एम की 2 दर्जन से ज्यादा दवाआंे के साथ हुआ है।
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सीजीएमएससी के एमडी रितेश अग्रवाल का कहना है कि ये बात सही है कि प्रदेश के स्थानीय कंपनियों को कुछ छूट दी गई थीं। लेकिन उसका उद्देश्य प्रदेश के फॉर्मा सेक्टर को बढ़ावा देना था। यह भी बात सही है कि कंपनियां बड़ी मात्रा में दवा सप्लाई कर चुकी हैं।
ऐसे में 9एम दवा कंपनी उन छूट वाली नियमों के तहत आ रही है या नहीं इसकी समीक्षा करनी होगी। फिलहाल दवाओं की गुणवत्ता बेहतर हो सके, हम इसपर काम कर रहे हैं।
इसमें से साधारण पैरासिटामॉल से लेकर एंटीबॉयोटिक और गर्भवती माताओं को दी जाने वाली दवाएं थीं। जांच में कुछ में मौजूद कंटेंट की मात्रा बेहद कम थी और कुछ के साइड इफेक्ट भी हुए। फेल होने वाले सैंपल में से 90 प्रतिशत दवाएं छग की 9एम कंपनी की थी।
भारी मात्रा में दवाओं का सैंपल फेल होने के बाद जब हमने कार्रवाई के बारे में जाना तो पता चला कि पिछली सरकार में ऐसा नियम बनाया गया था जिससे कंपनी को दवा का ऑर्डर देना सीजीएमएससी की मजबूरी है।
बड़ी बात यह है कि इस सरकार ने उस छूट और नियम को बरकरार रखा है। जबकि अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं।
कहानी जानिए..
इसके अलावा एमएसएमई के तहत टर्नओवर में छूट दी थी। इसके अलावा स्थानीय कंपनी अगर टेंडर में एल1 बोली लगाने वाली कंपनी की दर पर दवा सप्लाई करने के लिए तैयार हो जाती है तो उसे 50 प्रतिशत दवा सप्लाई का हक होगा। इन छूट का सबसे अधिक फायदा स्थानीय कंपनी 9एम को हुआ।
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एमएसएमई के नियम पर करोड़ों की दवा सप्लाई
भारी टर्नओवर होने के बावजूद सीजीएमएससी 9 एम कंपनी को एमएसएमई के तहत ही छूट दे रही है।
शर्तों में बदलाव..
ऑपरेशन के औजार भी घटिया
ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाले औजारों में भी जंग लगे रहने की शिकायत जब अस्पतालों ने की तब जाकर सीजीएमएससी हरकत में आया और दवाओं के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाते हुए, स्टॉक वापस मंगाया गया। ऐसा 9एम की 2 दर्जन से ज्यादा दवाआंे के साथ हुआ है।
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अब दवा कंपनियों का बिना निरीक्षण नहीं होगी दवा खरीदी, CGMSC बनाएगी व्यवस्था
| दवा का नाम | इस्तेमाल |
|---|---|
| टैबलेट टेलमीसार्टेन | ब्लड प्रेशर के लिए |
| टैबलेट जिंक सल्फेट | जिंक की कमी होने पर |
| टैबलेट क्लोरफेनिरामाइन | एंटी एलर्जिक दवा |
| टैबलेट ड्राइसाइक्लोमिन | पेट दर्द में इस्तेमाल |
| इंजेक्शन नियोस्टिग्माइन | मसल्स संबंधी इलाज |
| इंजेक्शन फाइटोनाडियोन | ब्लीडिंग रोकने के लिए |
| इंजेक्शन जेंटामाइसिन | एंटी बैक्टीरियल इंजेक्शन |
| इंजेक्शन ओन्डेन्सेट्रॉन | उल्टी रोकने में उपयोग |
| क्रीम मिकोनाजोल नाइट्रेट | एंटी फंगल क्रीम |
| सिरप लेवोसल्बुटामोल | खांसी का सिरप |
छूट पर समीक्षा करनी होगी
ऐसे में 9एम दवा कंपनी उन छूट वाली नियमों के तहत आ रही है या नहीं इसकी समीक्षा करनी होगी। फिलहाल दवाओं की गुणवत्ता बेहतर हो सके, हम इसपर काम कर रहे हैं।
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