छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की तारीख में बचे तीन दिन, फसल बेचने के इंतजार में तीन लाख किसान
Arun Tiwari | Jan 28, 2026, 15:30 IST
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छत्तीसगढ़ में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी खत्म होने में तीन दिन बाकी हैं। वहीं, अभी 3 लाख किसान धान नहीं बेच पाए हैं। प्रदेश में अब तक 23.48 लाख किसानों से 129 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई है।
NEWS IN SHORT
. धान खरीदी के तीन दिन शेष
. तीन लाख किसान धान नहीं बेच पाए
. टारगेट से 30 लाख मीट्रिक टन धान अभी कम
NEWS IN DETAIL
प्रदेश में अब भी करीब तीन लाख पंजीकृत किसान ऐसे हैं, जिनका धान खरीदा नहीं जा सका है। जबकि धान खरीदी की अंतिम तिथि 31 जनवरी तय है और अब गिनती के दिन ही शेष बचे हैं।
प्रदेश में 15 नवंबर से 2740 उपार्जन केंद्रों के जरिए धान खरीदी चल रही है। विपणन वर्ष 2025-26 के लिए धान बेचने को 26.49 लाख से अधिक किसानों ने पंजीयन कराया है।
इनमें से करीब 23.48 लाख किसानों ने धान बेच दिया है। इस तरह करीब 3 लाख किसान ऐसे हैं, जिनका धान अभी तक नहीं बिक पाया है।
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धान की बंपर पैदावार :
खाद्य विभाग के मुताबिक आगामी तीन दिनों में लगभग 1.5 लाख और किसान धान विक्रय के लिए उपार्जन केंद्रों पर पहुंच सकते हैं।
कृषि मंत्री रामविचार नेताम कहते हैं कि किसानों को असुविधा न हो, इसके लिए टोकन जारी किए जा रहे हैं। किसानों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए टोकन सिस्टम लागू किया गया है।
कृषि विभाग के मुताबिक अब तक 7.70 लाख से अधिक टोकन जारी किए जा चुके हैं और प्रतिदिन औसतन 22 हजार टोकन जारी हो रहे हैं। इसके बावजूद अंतिम दिनों में खरीदी पूरी हो पाएगी या नहीं, इस पर असमंजस बना हुआ है।
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इन जिलों में बफर स्टॉक लिमिट से ज्यादा :
फैक्ट फिगर :
इतने किसानों ने बेचा : 24 लाख
कुल खरीदी : 129 लाख टन
कितना भुगतान : 29,597 करोड़ रुपए
कुल खरीदी केंद्र : 2740
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Sootr Knowledge:
यहां किसान ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीयन कराता है। पटवारी, कृषि विभाग जमीन का सत्यापन करते हैं। हर किसान को उसकी समिति से जोड़ा जाता है। टोकन कटता है और उसी टोकन से धान बेचा जाता है
Imprtent Points :
- 27 लाख पंजीकृत किसानों में से करीब 3 लाख किसान अब तक धान नहीं बेच पाए, जबकि खरीदी की अंतिम तिथि 31 जनवरी है।
- अब तक 24 लाख किसानों से 129 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई है और 29,597 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है।
- प्रदेश में 2740 उपार्जन केंद्रों और टोकन सिस्टम के बावजूद अंतिम दिनों में अव्यवस्था की स्थिति बनी हुई है।
- धान खरीदी की समय-सीमा बढ़ाने की मांग तेज, कृषि मंत्री ने मुख्यमंत्री से चर्चा की, लेकिन अभी कोई आधिकारिक निर्णय नहीं।
- समयावधि नहीं बढ़ी तो हजारों किसानों का धान एमएसपी से बाहर होने और इसे मजबूरी में कम दाम पर बेचने का खतरा।
अब आगे क्या :
यदि अंतिम 2–3 दिनों में बड़ी संख्या में किसान धान नहीं बेच पाए, तो सरकार तारीख बढ़ा सकती है। सरकार ने किसानों से धान का एक एक दाना खरीदने का वादा किया है।
निष्कर्ष :
टोकन सिस्टम, उपार्जन केंद्रों की संख्या और भुगतान के दावे किसानों की समस्या पूरी तरह हल नहीं कर पाए हैं। वहीं इससे नाराज किसान आंदोलन करने पर आमादा हैं।
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