33 जिले लेकिन सिर्फ 13 साइबर थाने, एक-एक टीआई पर 100-100 केस का बोझ

Harrison Masih | Jul 01, 2026, 13:03 IST
Share
छत्तीसगढ़ में साइबर पुलिसिंग 2026
छत्तीसगढ़ में साइबर पुलिसिंग 2026

छत्तीसगढ़ में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन जांच व्यवस्था संसाधनों की कमी से जूझ रही है। राज्य के 33 जिलों में केवल 13 साइबर थाने संचालित हैं, जबकि 20 जिलों में अलग साइबर थाना तक नहीं है। कई जिलों में एक अधिकारी पर 100 तक मामलों का बोझ है।

छत्तीसगढ़ में साइबर अपराध के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन इनकी जांच और कार्रवाई के लिए जरूरी पुलिस ढांचा अभी भी कमजोर बना हुआ है। राज्य के 33 जिलों में से केवल 13 जिलों में ही अलग साइबर थाने संचालित हैं, जबकि बाकी 20 जिलों में साइबर अपराधों की जांच सामान्य थानों के भरोसे चल रही है। इससे मामलों की जांच और अपराधियों तक पहुंचना बड़ी चुनौती बन गया है।

सबसे बड़ी समस्या यह है कि केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार साइबर थानों में विवेचना (जांच) का अधिकार केवल टीआई (थाना प्रभारी) रैंक के अधिकारी को होता है। अधिकांश साइबर थानों में सिर्फ एक ही टीआई पदस्थ है, जिसके कारण एक अधिकारी पर दर्जनों मामलों का बोझ पड़ रहा है।

एक अधिकारी पर 100 तक केस

जानकारी के अनुसार रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग जैसे बड़े जिलों में साइबर अपराध के मामले तेजी से बढ़े हैं। कई जगहों पर एक टीआई के पास 60 से 100 तक मामलों की जांच लंबित है। ऐसे में जांच की गति प्रभावित हो रही है और पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी हो रही है।

साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन ठगी, फर्जी निवेश योजनाएं, डिजिटल अरेस्ट, बैंकिंग फ्रॉड और सोशल मीडिया अपराधों के बढ़ते मामलों के बीच साइबर पुलिसिंग को और मजबूत बनाने की जरूरत है।

20 जिलों में अलग साइबर थाना तक नहीं

राज्य के 20 जिलों में अब तक अलग साइबर थाना स्थापित नहीं किया गया है। इन जिलों में साइबर अपराध की शिकायतें स्थानीय थानों में दर्ज होती हैं। सामान्य पुलिसिंग और साइबर अपराध की जांच में बड़ा अंतर होने के कारण कई मामलों की जांच प्रभावित होती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर अपराधों की जांच के लिए तकनीकी ज्ञान, डिजिटल फोरेंसिक और ऑनलाइन ट्रैकिंग जैसी विशेष क्षमताओं की आवश्यकता होती है, जो सामान्य थानों में सीमित रूप से उपलब्ध हैं।

सीमित स्टाफ से बढ़ी परेशानी

रायपुर साइबर थाना प्रदेश के सबसे व्यस्त साइबर थानों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में शिकायतें पहुंचती हैं, लेकिन उपलब्ध स्टाफ अपेक्षाकृत कम है। कई जिलों में साइबर थानों में 4 से 5 कर्मचारियों के भरोसे पूरा काम चल रहा है।

सीमित स्टाफ के कारण तकनीकी विश्लेषण, आरोपियों की तलाश, बैंक खातों की निगरानी, मोबाइल और डिजिटल डेटा की जांच जैसे कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

देशभर में फैले नेटवर्क से जांच और मुश्किल

साइबर अपराधों की जांच इसलिए भी चुनौतीपूर्ण है क्योंकि आरोपी अक्सर अलग-अलग राज्यों से अपराध को अंजाम देते हैं। किसी मामले में बैंक खाता एक राज्य में, मोबाइल नंबर दूसरे राज्य में और आरोपी तीसरे राज्य में हो सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार कई मामलों में ठगी के नेटवर्क पश्चिम बंगाल, झारखंड, दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और दक्षिण भारत के राज्यों तक फैले हुए हैं। ऐसे में अंतरराज्यीय समन्वय के बिना कार्रवाई मुश्किल हो जाती है।

हर साल बढ़ रहे साइबर अपराध

प्रदेश में ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, निवेश धोखाधड़ी, सोशल मीडिया हैकिंग और डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग-भिलाई जैसे शहरी क्षेत्रों में सबसे अधिक शिकायतें सामने आ रही हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधों से निपटने के लिए तकनीकी संसाधनों, प्रशिक्षित मानवबल और साइबर थानों की संख्या बढ़ाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

विशेषज्ञों ने क्या कहा?

तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर अपराधों के बदलते स्वरूप को देखते हुए केवल पारंपरिक पुलिसिंग पर्याप्त नहीं है। प्रत्येक जिले में साइबर थाना, प्रशिक्षित जांच अधिकारी और आधुनिक डिजिटल फोरेंसिक सुविधाएं उपलब्ध कराना आवश्यक हो गया है।

ये खबरें भी पढ़ें...

AI के खिलाफ सख्त होगी मोहन सरकार, हर जिले में बनेगा साइबर थाना

छत्तीसगढ़ बिजली कंपनी का एमडी बनकर ठग रहे हैं साइबर अपराधी, 50 लाख की मांग, भेजा फेक मैसेज

एमपी में साइबर क्राइम: गूगल पर डॉक्टर का नंबर सर्च करना पड़ा भारी, क्लिक करते ही खाते से पैसे गायब

साइबर ठगों का नया तरीका: 10 रुपए के गैस बिल के बहाने लाखों की ठगी

Tags:
  • छत्तीसगढ़
  • रायपुर
  • ऑनलाइन ठगी
  • साइबर अपराध
  • साइबर थाना
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा