विस्फोटक पदार्थ की बिक्री में लापरवाही,28 साल पुराने मामले में हाईकोर्ट की सख्त चेतावनी

Harrison Masih | Aug 11, 2025, 14:27 IST
Share
explosives-sale-case-1997-high-court-verdict the sootr
explosives-sale-case-1997-high-court-verdict the sootr

करीब तीन दशक पुराने इस केस में हाई कोर्ट ने लाइसेंसधारकों की जिम्मेदारियों पर जोर दिया और स्पष्ट किया कि विस्फोटक पदार्थों के मामले में कानून बेहद सख्त है।

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने विस्फोटक पदार्थ की बिक्री से जुड़े एक 28 साल पुराने मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है। जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने साफ किया कि विस्फोटक अधिनियम के तहत लाइसेंसधारकों की जिम्मेदारी है कि वे बिक्री और भंडारण में कड़ी सावधानी बरतें। कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोप तय करने के प्रारंभिक चरण में केवल अनुमान, कल्पना या दूरगामी कारणों के आधार पर हस्तक्षेप करना कानूनन गलत है और इससे मुकदमे की प्रक्रिया बाधित होती है।

ये खबर भी पढ़ें... आई लव यू कहना यौन अपराध नहीं... छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने खारिज की राज्य सरकार की अपील

क्या है पूरा मामला

याचिकाकर्ता हुन्नैद हुसैन तैय्यब भाई बदरुद्दीन एक फर्म का साझेदार है, जिसके पास विस्फोटक रखने व बेचने का लाइसेंस था। फर्म ने लाइसेंसधारी ग्राहक किशुनलाल भक्त को 25 किलो स्पेशल जिलेटिन और 25 इलेक्ट्रिक डेटोनेटर बेचे, जिसका रिकॉर्ड रजिस्टर में दर्ज था।

पुलिस जांच में सामने आया कि ये विस्फोटक बिना लाइसेंस वाले सह-अभियुक्त दीपक कुमार और रामखिलावन के पास मिले, जिन्होंने स्वीकारा कि यह माल हुन्नैद हुसैन की फर्म से लाया गया था। ट्रायल कोर्ट ने रिकॉर्ड व चार्जशीट के आधार पर विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908 की धारा 5 और विस्फोटक अधिनियम की धारा 9B के तहत आरोप तय किए।

ये खबर भी पढ़ें... छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: फार्मासिस्ट भर्ती में बी.फार्मा डिग्रीधारकों को भी मिलेगा मौका

याचिका और हाई कोर्ट की सुनवाई

हुन्नैद हुसैन ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी, यह तर्क देते हुए कि अभियोजन पक्ष ने किशुनलाल से जब्त दस्तावेज़ और बयान जानबूझकर छिपाए। मामला वर्ष 1997 से लंबित था और उस समय हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।

हाई कोर्ट ने विस्फोटक अपराधों की गंभीरता पर जोर देते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया आरोप सही तरीके से तय हुए हैं और आरोप तय करने के चरण में विस्तृत साक्ष्य मूल्यांकन जरूरी नहीं है।

ये खबर भी पढ़ें... सुप्रीम कोर्ट ने पलटा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला,NDPS एक्ट केस में ट्रायल कोर्ट की शक्ति बताई

कोर्ट की टिप्पणियां

आरोप तय करने के समय न्यायालय को केवल उपलब्ध सामग्री के आधार पर निर्णय लेना होता है, विस्तृत सबूतों का वजन नहीं करना चाहिए। हाई कोर्ट ने माना कि निचली अदालत का निर्णय विधि सम्मत है और हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है। कोर्ट ने लाइसेंसधारकों को चेतावनी दी कि विस्फोटक पदार्थों की बिक्री और वितरण में लापरवाही गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।

कानूनी प्रावधान

  • विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908, धारा 5 – बिना लाइसेंस विस्फोटक पदार्थ रखने या बेचने पर दंड।
  • विस्फोटक अधिनियम, धारा 9B – विस्फोटक पदार्थ के भंडारण और बिक्री से संबंधित लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करने पर सजा।
ये खबर भी पढ़ें... सौम्या चौरसिया को नहीं मिली अंतरिम जमानत, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका खारिज

CG Explosives sale case 1997

विस्फोटक बिक्री मामले की 5 अहम बातें

28 साल पुराना केस – मामला 1997 में दर्ज हुआ था और तब से अदालत में लंबित था।

लाइसेंसधारी फर्म पर आरोप – फर्म पर बिना लाइसेंस वालों को जिलेटिन और डेटोनेटर बेचने का आरोप है।

पुलिस की बरामदगी – छापेमारी में सह-अभियुक्तों के पास से विस्फोटक बरामद हुए।

ट्रायल कोर्ट का फैसला सही – हाई कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा।

कड़ी चेतावनी – अदालत ने कहा, विस्फोटक पदार्थों की बिक्री में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।

विस्फोटक बिक्री केस 1997 CG High Court

यह फैसला न केवल पुराने मामलों में न्यायिक प्रक्रिया के महत्व को रेखांकित करता है, बल्कि विस्फोटक पदार्थों के लाइसेंसधारकों के लिए भी कड़ा संदेश है कि सुरक्षा और कानूनी प्रावधानों की अनदेखी गंभीर कानूनी परिणाम ला सकती है।

FAQ

  1. हुन्नैद हुसैन का विस्फोटक मामला क्या है?
    यह मामला एक लाइसेंसधारी फर्म से बिना लाइसेंस वालों को जिलेटिन और डेटोनेटर बेचे जाने से जुड़ा है, जो बाद में पुलिस द्वारा बरामद किए गए।
  2. विस्फोटक बिक्री मामले पर हाईकोर्ट का फैसला क्या है?
    हाई कोर्ट ने 28 साल पुराने विस्फोटक बिक्री मामले में ट्रायल कोर्ट का आदेश बरकरार रखा और लाइसेंसधारकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सख्त चेतावनी दी।
  3. धारा 5 और 9B क्या है?
    धारा 5 बिना लाइसेंस विस्फोटक पदार्थ रखने या बेचने पर सजा का प्रावधान करती है, जबकि धारा 9B लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करने पर दंड निर्धारित करती है।

thesootr links

दसूत्र की खबरें आपको कैसी लगती हैं? Google my Business पर हमें कमेंट केसाथ रिव्यू दें। कमेंट करने के लिए इसी लिंक पर क्लिक करें

अगर आपको ये खबर अच्छी लगी हो तो 👉 दूसरे ग्रुप्स, 🤝दोस्तों, परिवारजनों के साथ शेयर करें📢🔃🤝💬👩‍👦👨‍👩‍👧‍👧

Tags:
  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
  • CG High Court
  • विस्फोटक पदार्थ की बिक्री
  • विस्फोटक बिक्री केस 1997
  • हुन्नैद हुसैन
  • CG Explosives sale case 1997
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा