नकली मंगलसूत्र मामले में मंत्री का खुलासा: महंगाई के कारण दी आर्टिफिशियल चेन

VINAY VERMA | Jun 15, 2026, 11:51 IST
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नकली मंगलसूत्र मामला 2026
नकली मंगलसूत्र मामला 2026

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत दिए गए मंगलसूत्र को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने सफाई देते हुए कहा कि योजना के निर्धारित 7 हजार रुपये के बजट में असली चांदी के गहने देना संभव नहीं था।

नकली मंगलसूत्र मामले में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बड़ा खुलासा किया है। मंत्री ने कहा है कि आजकल सोने और चांदी के भाव बहुत अधिक हो गए हैं। जिसका असर नवविवाहित जोड़ों को दिए जाने वाले गिफ्ट पर भी पड़ा है। मंत्री के अनुसार चूंकि योजना के अनुसार कपड़े, श्रृंगार, उपहार के रुप में केवल 7 हजार रुपए ही खर्च किए जा सकते हैं, ऐसे में संभव ही नहीं कि चांदी की माला उपलब्ध करवा सकें। इसलिए उन्हें आर्टिफिशियल चेन दी गई थी।

7 हजार में कैसे आता असली गहना?

मंत्री ने साफ कहा कि योजना के नियमों के अनुसार उपहार सामग्री पर केवल 7 हजार रुपए खर्च किए जा सकते हैं। इसी राशि में बिछिया, पायल, श्रृंगार सामग्री और अन्य जरूरी सामान भी देना होता है। ऐसे में चांदी की असली चेन खरीदना संभव नहीं था। मंत्री का तर्क है कि बढ़ती महंगाई ने सरकारी योजनाओं के बजट पर भी असर डाला है।

प्रति जोड़ा 50 हजार का पैकेज

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत प्रत्येक जोड़े पर 50 हजार रुपए खर्च किए जाते हैं। इसमें 8 हजार रुपए भोजन, टेंट और आयोजन पर खर्च होते हैं। 7 हजार रुपए कपड़े और श्रृंगार सामग्री के लिए निर्धारित हैं। सबसे बड़ी राशि सीधे दुल्हन के खाते में ट्रांसफर की जाती है। वर्तमान में 35 हजार की जगह 36 हजार रुपए डीबीटी के माध्यम से दिए जा रहे हैं।

कमीशनखोरी रोकने बदला सिस्टम

मंत्री ने दावा किया कि योजना पहले से चल रही थी, लेकिन बीच में कमीशनखोरी और गड़बड़ियों की शिकायतें मिलती थीं। इसी वजह से सरकार ने डीबीटी व्यवस्था लागू की। उनका कहना है कि अब नकद राशि सीधे लाभार्थी के खाते में जाती है। इससे दुल्हन अपनी पसंद से असली गहने खरीद सकती है। सरकार का दावा है कि इससे पारदर्शिता बढ़ी है।

फिर 15 हजार वसूली का आरोप क्यों?

मामले में नया मोड़ तब आया जब मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले की कुछ दुल्हनों ने विभागीय अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। दुल्हनों का कहना था कि मंगलसूत्र और अन्य सामग्री देने के नाम पर उनसे 15-15 हजार रुपए वसूले गए।आरोपों ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया। हालांकि कलेक्टर स्तर की जांच में विभागीय अधिकारी निर्दोष पाए गए हैं।

काला पड़ा मंगलसूत्र, खुल गई पोल

पूरा विवाद 10 फरवरी को हुए सामूहिक विवाह कार्यक्रम से जुड़ा है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत प्रदेशभर में सामूहिक विवाह आयोजित किए गए थे। एमसीबी जिले के खड़गवां विकासखंड के चनवारीडांड गांव में 184 जोड़ों की शादी करवाई गई थी। विवाह के दौरान दुल्हनों को मंगलसूत्र सहित कई उपहार दिए गए थे।

ज्वेलर्स ने बताया गिलट का गहना

कुछ महीनों बाद कई दुल्हनों का मंगलसूत्र काला पड़ने लगा। शक होने पर उन्होंने स्थानीय गहना दुकानों में उसकी जांच करवाई। जांच में सामने आया कि मंगलसूत्र सोना या चांदी का नहीं, बल्कि गिलट का बना हुआ था। इसके बाद दुल्हनों का गुस्सा फूट पड़ा। मामला मीडिया में आया और फिर सरकार को सफाई देनी पड़ी।

सवाल अभी भी बाकी

मंत्री ने महंगाई का हवाला देकर आर्टिफिशियल चेन देने को सही ठहराया है। लेकिन सवाल यह है कि अगर गहना नकली था तो लाभार्थियों को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं दी गई? क्या उपहार सामग्री की गुणवत्ता को लेकर कोई स्पष्ट मानक नहीं थे? और सबसे बड़ा सवाल, क्या गरीब बेटियों को सम्मान के नाम पर प्रतीकात्मक गिफ्ट देकर सरकार अपनी जिम्मेदारी पूरी मान सकती है? यही सवाल अब सरकार का पीछा कर रहे हैं।

FAQ

  1. छत्तीसगढ़ में नकली मंगलसूत्र मामला क्या है?
    यह मामला मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत दिए गए मंगलसूत्र से जुड़ा है, जिसमें दुल्हनों को दिए गए गहनों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे और वे गिलट के पाए गए।
  2. मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में कितना खर्च होता है?
    इस योजना में प्रति जोड़े लगभग 50 हजार रुपये खर्च किए जाते हैं, जिसमें भोजन, आयोजन, कपड़े और सबसे बड़ी राशि DBT के माध्यम से दुल्हन के खाते में दी जाती है।
  3. नकली मंगलसूत्र मामले में क्या जांच हुई?
    मामले में आरोपों के बाद जांच की गई, जिसमें कुछ आरोपों को विभागीय स्तर पर खारिज कर दिया गया, हालांकि मामला चर्चा और विवाद में बना हुआ है।


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