निजी कंपनियों को सौंपी गई फायर एनओसी प्रक्रिया, संस्थानों पर बढ़ा आर्थिक बोझ

thesootr Desk | Mar 21, 2026, 14:11 IST
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Fire NOC Process Handed Over Private Companies Financial Burden Institutions Increases
Fire NOC Process Handed Over Private Companies Financial Burden Institutions Increases

छत्तीसगढ़ में अब तक नि:शुल्क होने वाली फायर एनओसी प्रक्रिया को निजी कंपनियों को सौंप दिया गया है, जिससे अस्पताल, स्कूल और कॉलेजों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। सरकार का तर्क है कि इससे कुछ आय होगी, लेकिन पारदर्शिता और जिम्मेदारी पर सवाल उठ रहे हैं।

NEWS IN SHORT

  • सरकारी निशुल्क फायर एनओसी का काम अब निजी कंपनियों के हाथ में
  • 10 रुपए प्रति वर्गफीट: स्कूल, कॉलेज और अस्पतालों पर बढ़ा आर्थिक बोझ
  • छोटे अस्पतालों के लिए फायर ऑडिट अब चुनौतीपूर्ण
  • सरकार को मिलेगा एनओसी फीस का हिस्सा, पारदर्शिता पर सवाल
  • विशेषज्ञों का कहना: नई व्यवस्था से सुरक्षा मानक प्रभावित हो सकते हैं

NEWS IN DETAIL

छत्तीसगढ़ में अब तक सरकारी स्तर पर निशुल्क प्रदान की जाने वाली फायर एनओसी प्रक्रिया को निजी कंपनियों के हवाले कर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत निजी एजेंसियां अब फायर ऑडिट के लिए 10 रुपए प्रति वर्गफीट तक शुल्क वसूल रही हैं। इस बदलाव का सीधा असर स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों और अन्य संस्थानों पर पड़ने की संभावना है, जिससे शिक्षा और इलाज महंगा होने की आशंका बढ़ गई है।

फायर एनओसी देना होगा शुल्क

मौजूदा व्यवस्था में यदि किसी अस्पताल या भवन का क्षेत्रफल 50 हजार वर्गफीट है, तो उसे फायर ऑडिट के लिए हर साल करीब 5 लाख रुपए खर्च करने पड़ सकते हैं। छोटे संस्थानों के लिए यह राशि हजारों से लेकर लाखों रुपए तक हो सकती है। अंबिकापुर के निजी अस्पताल संचालकों ने इस नई व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इतनी अधिक राशि देना छोटे अस्पतालों के लिए कठिन होगा।

पहले सरकारी प्रक्रिया थी निशुल्क

पहले सरकारी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निशुल्क थी। इसके तहत ऑनलाइन आवेदन के बाद जिला कमांडेंट की टीम मौके पर जाकर निरीक्षण करती थी और मुख्यालय से फायर एनओसी जारी होती थी। लेकिन अब यही प्रक्रिया निजी एजेंसियों से करवाई जा रही है, और ऑडिट के नाम पर बड़ी राशि वसूली जा रही है।

10 रुपए प्रति वर्गफीट शुल्क की मांग

सरगुजा जिले में स्थित मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल सहित 18 निजी अस्पताल, 24 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 193 उप स्वास्थ्य केंद्र हैं। इसके अलावा, जिले में करीब 2365 स्कूल, 15 कॉलेज और अन्य निजी संस्थान भी हैं, जिन पर फायर ऑडिट के नाम पर लाखों रुपए का अतिरिक्त खर्च पड़ने की संभावना है। ओजस हॉस्पिटल के संचालक डॉ. नवीन द्विवेदी ने बताया कि कंपनी द्वारा 10 रुपए प्रति वर्गफीट शुल्क मांगे जाने के कारण उन्होंने अभी तक ऑडिट नहीं कराया।

अस्पताल को थमाया 70 हज़ार का बिल

बिलासपुर की एक कंपनी ने राजधानी के एक अस्पताल को फायर ऑडिट के लिए 70,800 रुपए का बिल थमाया, जिसमें 10,800 रुपए जीएसटी शामिल है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि यह शुल्क बहुत अधिक है और इसे देना उचित नहीं है। दूसरे अस्पतालों के संचालकों ने भी ऑडिट पर आपत्ति जताई है, यह कहते हुए कि इतनी उच्च फीस छोटे और मध्यम अस्पतालों और अन्य संस्थानों पर आर्थिक बोझ बढ़ाएगी।

ऑडिट की जिम्मेदारी निजी कंपनियों को क्यों

मुख्य सवाल यह है कि प्रदेश के अग्निशमन विभाग के पास प्रशिक्षित अधिकारी और तकनीकी स्टाफ होने के बावजूद ऑडिट की जिम्मेदारी निजी कंपनियों को क्यों दी गई। गृह विभाग में प्रमुख सचिव मनोज कुमार पिंगुआ ने चर्चा में बताया कि पहले एनओसी निशुल्क होने के कारण सरकार को इससे कोई आय नहीं होती थी। अब जब कंपनियां यह काम करेंगी, तो सरकार को एनओसी फीस का कुछ हिस्सा मिलेगा। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि सरकार को मिलने वाली राशि कितनी होगी।


फायर सेफ्टी की कमी से हादसे की जिम्मेदारी किसकी

प्रमुख सचिव ने यह भी कहा कि कुछ शिकायतें आ रही हैं और यदि एजेंसी मनमानी करेगी तो कार्रवाई की जाएगी। वहीं, एनओसी मिलने के बाद फायर सेफ्टी की कमी से हादसे पर जिम्मेदारी किसकी होगी, इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कंपनियों का काम केवल ऑडिट करना है और समय-समय पर मॉनिटरिंग भी की जाएगी।

निष्कर्ष

प्रदेश में अब तक निशुल्क फायर एनओसी प्रक्रिया को निजी कंपनियों को सौंप दिया गया है। निजी एजेंसियां 10 रुपए प्रति वर्गफीट शुल्क वसूल रही हैं, जिससे अस्पताल, स्कूल और कॉलेजों पर आर्थिक बोझ बढ़ा है। छोटे अस्पताल और संस्थान यह शुल्क देने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं और ऑडिट में देरी हो रही है। सरकार का तर्क है कि इससे कुछ आय होगी, लेकिन जिम्मेदारी और पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नई व्यवस्था लागत बढ़ाएगी और सुरक्षा मानकों पर असर पड़ सकता है।

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