कहां बना सती का दांत शक्ति पीठ, जानिए इस खास खबर में, नौ दिन, नौ देवियां
thesootr Desk | Mar 18, 2026, 19:05 IST
Goddess Sati Tooth Fall Shakti Peeth Special Report
दंतेश्वरी मंदिर छत्तीसगढ़ के बस्तर में स्थित प्रमुख शक्ति पीठ है, जो देवी सती के दांत गिरने की कथा से जुड़ा है। बस्तर दशहरा और नवरात्रि में यह मंदिर श्रद्धालुओं और पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण बन जाता है।
BASTAR : छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर एक बार फिर श्रद्धा, आस्था और सांस्कृतिक विरासत का केंद्र बना हुआ है। देवी दंतेश्वरी को समर्पित यह प्राचीन मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से भी बस्तर क्षेत्र की पहचान माना जाता है। माना जाता है कि यह मंदिर देशभर में फैले 52 शक्ति पीठों में से एक है, जहां देवी सती का एक दांत गिरा था, इसी कारण इसका नाम दंतेश्वरी पड़ा।
14वीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा शहर में स्थित है, जो जगदलपुर से लगभग 80 किलोमीटर दूर है। दंतेवाड़ा का नाम भी देवी दंतेश्वरी के नाम पर ही रखा गया है। ऐतिहासिक रूप से यह मंदिर काकतीय शासकों की आस्था का केंद्र रहा है और बस्तर रियासत की कुलदेवी के रूप में देवी की पूजा की जाती रही है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब राजा दक्ष के यज्ञ में अपमानित होकर देवी सती ने आत्मदाह कर लिया, तब भगवान शिव उनके शरीर को लेकर तांडव करने लगे। इस विनाश को रोकने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को खंडित किया, जिसके अंग विभिन्न स्थानों पर गिरे और वे सभी स्थान शक्ति पीठ बन गए। दंतेश्वरी मंदिर उन्हीं पवित्र स्थलों में से एक माना जाता है।
मंदिर की वास्तुकला भी अत्यंत आकर्षक है। इसे चार प्रमुख भागों—गर्भगृह, महामंडप, मुख्यमंडप और सभामंडप—में विभाजित किया गया है। गर्भगृह में स्थापित देवी की मूर्ति काले पत्थर से निर्मित है, जो भक्तों के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। मंदिर परिसर विशाल प्रांगण और ऊंची दीवारों से घिरा हुआ है, जबकि प्रवेश द्वार के सामने स्थित गरुड़ स्तंभ इसकी भव्यता को और बढ़ाता है। शिखर पर की गई नक्काशी और मूर्तियां प्राचीन शिल्पकला का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।
हर वर्ष यहां आयोजित होने वाला बस्तर दशहरा देश-विदेश के पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। यह पर्व पारंपरिक दशहरे से अलग अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। इस दौरान आसपास के गांवों और घने जंगलों से हजारों आदिवासी समुदाय के लोग एकत्र होकर देवी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उत्सव के दौरान देवी की प्रतिमा को मंदिर से निकालकर भव्य शोभायात्रा के रूप में नगर भ्रमण कराया जाता है, जो इस आयोजन का मुख्य आकर्षण होता है।
![आस्था का केंद्र]()
इसके अलावा नवरात्रि के दौरान यहां ज्योति कलश जलाने की परंपरा भी विशेष रूप से निभाई जाती है। छत्तीसगढ़ शक्ति पीठ मेंश्रद्धालु दूर-दूर से आकर मंदिर में दीप प्रज्वलित करते हैं और देवी से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। स्थानीय लोगों और आदिवासी समुदाय के लिए यह मंदिर केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि उनकी पहचान और परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। बदलते समय के बावजूद दंतेश्वरी मंदिर आज भी अपनी आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए है।
पर्यटन की दृष्टि से भी यह स्थान तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। प्रशासन द्वारा बुनियादी सुविधाओं के विकास और बेहतर कनेक्टिविटी के प्रयासों के चलते यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। दंतेश्वरी मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि बस्तर की समृद्ध संस्कृति और इतिहास की जीवंत झलक भी प्रस्तुत करता है।
![दंतेश्वरी मंदिर में नवरात्री विशेष]()
दंतेश्वरी मंदिर छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र का प्रमुख शक्ति पीठ है, जहां देवी सती का दांत गिरा था। 14वीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर आस्था, इतिहास और संस्कृति का प्रतीक है। हर साल बस्तर दशहरा और नवरात्रि में हजारों श्रद्धालु यहां आते हैं। यह मंदिर न केवल पूजा स्थल है, बल्कि बस्तर की समृद्ध संस्कृति और परंपरा का केंद्र भी है।
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मंदिर का ऐतिहासिक महत्त्व
मंदिर से जुडी पौराणिक कथा
मंदिर की संरचना
बस्तर दशहरा देश-विदेश के आकर्षण का केंद्र
आस्था का केंद्र
नवरात्रि के ज्योति कलश का विशेष महत्व
पर्यटन की दृष्टि महत्वपूर्ण
दंतेश्वरी मंदिर में नवरात्रि विशेष
दंतेश्वरी मंदिर में नवरात्री विशेष
निष्कर्ष
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