आज से शुरू हो रही चैत्र नवरात्रि, मां दुर्गा की पूजा में न करें ये गलतियां, वरना अधूरा रहेगा व्रत
Kaushiki | Mar 18, 2026, 14:00 IST
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Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि 19 मार्च 2026 से शुरू हो रही है। यहां जानें घटस्थापना मुहूर्त, वर्जित चीजें, वास्तु उपाय और मां दुर्गा की पूजा विधि की पूरी जानकारी ।
Chaitra Navratri 2026: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का पर्व श्रद्धा और नई ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इस साल 19 मार्च 2026 से मां दुर्गा के नौ रूपों की उपासना का पावन उत्सव शुरू हो रहा है। ये हमारे हिंदू नववर्ष (विक्रम संवत) के शुभारंभ का भी दिन है।
इन नौ दिनों में भक्त उपवास रखकर शक्ति की देवी की आराधना करते हैं। लेकिन माता की पूर्ण कृपा पाने के लिए सही मुहूर्त और शास्त्रों में बताए गए नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। आइए जानें पूजा की सही विधि, शुभ मुहूर्त और जरूरी उपाय जो आपके घर में सुख-समृद्धि लाएंगे।
![Chaitra Navratri 2025: चैत्र नवरात्र में करें इस तरह से करें मां दुर्गा की पूजा, प्रसन्न होकर देंगी वरदान - chaitra navratri 2025 pujan vidhi upay and read durga saptashati path in]()
शास्त्रों के मुताबिक, मां अंबे की पूजा में कुछ चीजों का प्रयोग वर्जित माना गया है। ऐसे में चैत्र नवरात्रि की पूजा में माता रानी की कृपा पाने के लिए इन बातों का खास ख्याल रखें:
माता के आगमन से पहले घर की शुद्धि करना बहुत ही जरूरी है। वास्तु शास्त्र के मुताबिक, चैत्र नवरात्रि और माता के आगमन से पहले अपने घर की सुख-समृद्धि के लिए ये उपाय जरूर अपनाएं:
नवरात्रि में मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए इन जरूरी नियमों और पूजा विधि का पालन करें:
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इन नौ दिनों में भक्त उपवास रखकर शक्ति की देवी की आराधना करते हैं। लेकिन माता की पूर्ण कृपा पाने के लिए सही मुहूर्त और शास्त्रों में बताए गए नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। आइए जानें पूजा की सही विधि, शुभ मुहूर्त और जरूरी उपाय जो आपके घर में सुख-समृद्धि लाएंगे।
Chaitra Navratri 2025: चैत्र नवरात्र में करें इस तरह से करें मां दुर्गा की पूजा, प्रसन्न होकर देंगी वरदान - chaitra navratri 2025 pujan vidhi upay and read durga saptashati path in
घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त
चैत्र नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व है। पंचांग के मुताबिक, प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 06:52 पर लगेगी। घटस्थापना का सबसे पहला मुहूर्त सुबह 06:52 से 07:43 बजे तक रहेगा। अगर आप सुबह स्थापना नहीं कर पाए, तो दूसरा विकल्प भी है। आप दोपहर 12:05 से 12:53 के बीच अभिजीत मुहूर्त में स्थापना करें। शुभ मुहूर्त में की गई पूजा बहुत ही फलदायी मानी जाती है।
पूजा में इन बातों का रखें ख्याल
- मदार के फूल
देवी दुर्गा की पूजा में मदार (आक) के फूल चढ़ाना वर्जित है। - तुलसी दल
माता रानी की पूजा और भोग में कभी भी तुलसी के पत्तों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। - बासी फल
मां अंबे को हमेशा ताजे और शुद्ध फल ही अर्पित करें, बासी या सड़े हुए फल न चढ़ाएं। - सूंघे हुए फूल
किसी के द्वारा सूंघे गए या जमीन पर गिरे हुए फूल माता को चढ़ाना पाप माना जाता है। - चमड़े की वस्तुएं
पूजा के दौरान भूलकर भी चमड़े की बेल्ट, पर्स या घड़ी जैसी चीजें पास न रखें। - अशुद्ध वस्त्र
माता की चौकी सजाते समय और पूजा करते समय हमेशा साफ और धुले हुए कपड़े पहनें। - टूटे हुए चावल
अक्षत (चावल) चढ़ाते समय ध्यान रखें कि वे टूटे हुए न हों, हमेशा साबुत चावल ही चढ़ाएं।
घर से बाहर निकालें ये अशुभ चीजें
- बंद घड़ियां
वास्तु शास्त्र के मुताबिक, घर में रुकी हुई घड़ियां तरक्की में बाधा डालती हैं। इन्हें तुरंत ठीक कराएं या हटा दें। - मुरझाए पौधे
सूखे या मुरझाए हुए पौधे नकारात्मक ऊर्जा फैलाते हैं, इनकी जगह हरे-भरे पौधे लगाएं। - खंडित मूर्तियां
मंदिर से टूटी हुई मूर्तियां या फटी हुई पुरानी तस्वीरें हटाकर पवित्र नदी में प्रवाहित करें। - कबाड़ का सामान
घर की छत या कोनों में जमा पुराना कबाड़ निकाल दें, इससे मानसिक तनाव कम होता है। - खराब इलेक्ट्रॉनिक्स
बंद पड़े रेडियो, टीवी या अन्य बिजली के खराब सामान घर में राहु का दोष बढ़ाते हैं। - टूटे बर्तन
रसोई या घर में चटके हुए कांच और टूटे हुए बर्तनों का इस्तेमाल करना अशुभ माना जाता है। - फटे जूते-चप्पल
मुख्य द्वार के पास या घर में फटे पुराने जूते-चप्पल न रखें, ये दरिद्रता का कारण बनते हैं।
मां दुर्गा की पूजा विधि
- ब्रह्म मुहूर्त में स्नान
नवरात्रि के पहले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। - लाल चौकी की स्थापना
पूजा स्थान पर लाल रंग का नया कपड़ा बिछाकर माता रानी की चौकी सजाएं। - प्रतिमा और चुनरी
मां दुर्गा की मूर्ति स्थापित करें और उन्हें श्रद्धापूर्वक लाल चुनरी जरूर ओढ़ाएं। - अखंड ज्योति का संकल्प
अखंड दीप जलाते समय मन में शुद्ध संकल्प लें और उसकी पवित्रता बनाए रखें। - कलश स्थापना
शुभ मुहूर्त में कलश स्थापित करें, जो सुख और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। - पाठ और मंत्र
प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती का पाठ और दुर्गा चालीसा पढ़ना अत्यंत शुभ फलदायी है। - प्रिय पुष्प और भोग
माता को लाल रंग के फूल (विशेषकर गुड़हल) और ऋतु फल अर्पित करना बहुत पसंद है। - सात्विक जीवन
नौ दिनों तक सात्विक भोजन करें, क्रोध न करें और पूरी तरह ब्रह्मचर्य का पालन करें।
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