मंत्री और अधिकारियों के काफिले में गाड़ियों को घटाने के निर्देश, विदेश यात्राओं पर भी लगी रोक
VINAY VERMA | May 16, 2026, 14:53 IST
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छत्तीसगढ़ सरकार ने सरकारी खर्च घटाने के लिए विदेश यात्राओं, वीआईपी काफिलों और अनावश्यक बैठकों पर रोक लगाई। ई-ऑफिस, ऑनलाइन मीटिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा मिलेगा।
छत्तीसगढ़ सरकारने बढ़ते सरकारी खर्च और वित्तीय दबाव के बीच बड़ी नीति लागू कर दी है। वित्त विभाग के आदेश के तहत अब सरकारी तामझाम, फिजूलखर्ची और अनावश्यक खर्चों पर लगाम कसी जाएगी। वित्त सचिव से जारी यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और 30 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। सरकार का दावा है कि इसका उद्देश्य वित्तीय अनुशासन लागू करना और राज्य के संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करना है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे सरकार की आर्थिक स्थिति से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
सरकारी खर्च पर होने वाली विदेश यात्राओं पर सरकार ने पूरी तरह रोक लगा दी है। आदेश के मुताबिक अब कोई भी शासकीय सेवक विदेश यात्रा नहीं कर सकेगा। केवल अत्यंत अपरिहार्य स्थिति में ही मुख्यमंत्री की पूर्व अनुमति से यात्रा की मंजूरी मिलेगी। माना जा रहा है कि यह फैसला सरकार के बढ़ते खर्च को नियंत्रित करने की कोशिश का हिस्सा है।
सरकार ने सबसे पहले वीआईपी संस्कृति पर चोट की है। मुख्यमंत्री, मंत्रियों और निगम-मंडल आयोगों के पदाधिकारियों के लंबे-चौड़े कारकेड पर अब ब्रेक लगाया जाएगा। नए निर्देश में कहा गया है कि काफिले में केवल अत्यावश्यक वाहनों का ही उपयोग किया जाए। माना जा रहा है कि इससे ईंधन खर्च के साथ-साथ सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग पर भी नियंत्रण लगेगा। लंबे समय से विपक्ष और जनता वीआईपी काफिलों पर सवाल उठाते रहे हैं।
राज्य सरकार अब इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाने जा रही है। आदेश में साफ कहा गया है कि सभी शासकीय वाहनों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों में तब्दील करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसे सरकार की ग्रीन नीति और ईंधन बचत अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार के पास इसके लिए पर्याप्त बजट और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है।
सरकारी दफ्तरों में अब पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने के लिए वाहन पूलिंग व्यवस्था लागू की जाएगी। यदि अलग-अलग विभागों के अधिकारी एक ही स्थान पर जा रहे हैं, तो उन्हें एक ही वाहन का उपयोग करना होगा। वित्त विभाग ने साफ कर दिया है कि ईंधन खर्च को न्यूनतम स्तर तक लाना सरकार की प्राथमिकता है। ऐसे में अब अफसरों की अलग-अलग गाड़ियों में दौड़भाग पर अंकुश लगना तय माना जा रहा है।
वित्त विभाग ने बैठकों के तरीके में भी बड़ा बदलाव किया है। आदेश के अनुसार विभागों की भौतिक बैठकें महीने में अधिकतम एक बार ही आयोजित की जा सकेंगी। बाकी सभी समीक्षा बैठकें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और ऑनलाइन मोड से करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि इससे यात्रा खर्च, समय और संसाधनों की बचत होगी। कोरोना काल के बाद ऑनलाइन सिस्टम को स्थायी प्रशासनिक मॉडल बनाने की कोशिश के तौर पर भी इसे देखा जा रहा है।
सरकारी कार्यालयों में अब बिजली बचत को लेकर भी सख्त नियम लागू किए गए हैं। कार्यालयीन समय समाप्त होते ही लाइट, पंखे, एसी और कंप्यूटर बंद करना अनिवार्य होगा। वित्त विभाग ने संकेत दिए हैं कि बिजली बिलों में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। अब विभाग प्रमुखों की जिम्मेदारी होगी कि वे अपने कार्यालयों में ऊर्जा बचत सुनिश्चित करें।
सरकार ने अब ई-ऑफिस व्यवस्था को पूरी तरह अनिवार्य करने का फैसला लिया है। बैठकों में प्रिंटेड दस्तावेज और भारी-भरकम बुकलेट्स की जगह डिजिटल फाइलों और प्रेजेंटेशन का उपयोग किया जाएगा। सभी पत्राचार और फाइलों का संचालन म-व्पििबम प्लेटफॉर्म के जरिए करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे स्टेशनरी खर्च कम करने के साथ-साथ प्रशासनिक प्रक्रिया को तेज करने का दावा किया जा रहा है।
सरकार ने अधिकारियों और कर्मचारियों की ट्रेनिंग व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव किया है। अब फिजिकल ट्रेनिंग कार्यक्रमों की जगह पळव्ज् कर्मयोगी पोर्टल के जरिए ऑनलाइन प्रशिक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी। विभागों को अपने विशेष कोर्स इस पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि इससे ट्रेनिंग पर होने वाला भारी खर्च कम किया जा सकेगा।
सरकार इसे वित्तीय अनुशासन और प्रशासनिक सुधार का कदम बता रही है, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस आदेश को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह केवल मितव्ययिता अभियान है या फिर सरकार वित्तीय दबाव से जूझ रही है। फिलहाल इतना तय है कि आने वाले महीनों में अफसरशाही की कार्यशैली से लेकर सरकारी खर्च के तरीके तक में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
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विदेश यात्रा के लिए सीएम की अनुमति जरुरी:
वीआईपी कल्चर पर वार:
सरकारी गाड़ियां होंगी इलेक्ट्रिक:
अब लागू होगी वाहन पूलिंग:
महीने में सिर्फ एक बार फिजिकल मीटिंग:
AC-कंप्यूटर बंद करना अनिवार्य:
पेपरलेस ऑफिस की तरफ कदम:
ट्रेनिंग पर भी खर्च कम:
आर्थिक दबाव या प्रशासनिक सुधार?
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