बिजली टावर लगाने के लिए जमीन मालिक की मंजूरी जरूरी नहीं, सिर्फ मिलेगा मुआवजा
Harrison Masih | Jun 30, 2026, 19:11 IST
बिजली टावर पर हाईकोर्ट का फैसला 2026
हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि बिजली ट्रांसमिशन लाइन बिछाने और बिजली टावर स्थापित करने के लिए जमीन मालिक की अनुमति जरूरी नहीं है। भूमि स्वामी को केवल मुआवजा पाने का अधिकार है।
समझें क्या है पूरा मामला
रायपुर की फर्म ने लगाया था केस
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विपिन तिवारी ने मांग की थी कि जमीन से टावर हटाया जाए, हटाने का खर्च बिजली विभाग उठाए और जमीन के कथित अवैध उपयोग के लिए 5 लाख रुपए मुआवजा दिया जाए।
पुराने फैसले से जुड़ा है मामला
इस पुराने फैसले को डिवीजन बेंच भी सही ठहरा चुकी है। याचिकाकर्ता के वकील ने भी इस कानूनी स्थिति पर कोई आपत्ति नहीं जताई।
हाईकोर्ट ने क्या कहा
कोर्ट ने कहा कि छत्तीसगढ़ एक पावर हब है जहां से पूरे देश में बिजली की आपूर्ति होती है। विकास कार्यों और सार्वजनिक हित की परियोजनाओं के लिए ट्रांसमिशन लाइन बिछाने में अधिकारियों को जमीन मालिक से अनुमति या पूर्व नोटिस लेने की जरूरत नहीं है।
जमीन का मालिकाना हक रहेगा सुरक्षित
जमीन का शीर्षक और स्वामित्व ए.एस. एसोसिएट्स के पास ही रहेगा। कंपनी सिर्फ टावर और उससे जुड़े उपयोग वाले हिस्से का इस्तेमाल कर सकेगी।
मुआवजा देने का दिया आदेश
संबंधित अधिकारियों को आदेश की प्रति मिलने के 60 दिनों के भीतर याचिकाकर्ता की सुनवाई कर मुआवजा राशि का भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
साथ ही याचिकाकर्ता को बिजली टावर के संचालन और संबंधित कार्यों में किसी तरह की बाधा न डालने को कहा गया है।
FAQ
- क्या बिजली टावर लगाने के लिए जमीन मालिक की अनुमति जरूरी है?
नहीं, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक हित में बिजली ट्रांसमिशन लाइन और टावर लगाने के लिए बिजली अधिनियम और टेलीग्राफ एक्ट के तहत जमीन मालिक की पूर्व अनुमति लेना जरूरी नहीं है। - बिजली टावर लगने पर जमीन मालिक को क्या अधिकार मिलते हैं?
जमीन पर मालिकाना हक जमीन मालिक के पास ही रहता है। यदि टावर निर्माण या ट्रांसमिशन लाइन से नुकसान होता है, तो संबंधित नियमों के अनुसार उचित मुआवजा पाने का अधिकार होता है।
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