पीएम सूर्यघर योजना: अब छतों पर बनी एक्स्ट्रा बिजली खरीदेगी सरकार
Harrison Masih | Jun 29, 2026, 15:24 IST
पीएम सूर्यघर योजना 2026
प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने वाले छत्तीसगढ़ के उपभोक्ताओं के लिए अच्छी खबर है। SECI ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अतिरिक्त (सरप्लस) सोलर बिजली की खरीदी दर तय कर दी है।
प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत अपने घरों की छतों पर रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने वाले उपभोक्ताओं के लिए बड़ी और अच्छी खबर सामने आई है। सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ग्रिड में भेजी गई अतिरिक्त (सरप्लस) सौर ऊर्जा की खरीदी दर (बायबैक रेट) तय कर दी है। इसके बाद छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने भी इस दर को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
पावर कंपनी के अधिकारियों के अनुसार प्रस्तावित बायबैक दर को अंतिम मंजूरी के लिए छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) को भेजा गया है। आयोग की स्वीकृति मिलते ही उपभोक्ताओं को अतिरिक्त बिजली के बदले मिलने वाली राशि उनके बिजली बिल में क्रेडिट के रूप में दिखाई देने लगेगी।
रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाने वाले उपभोक्ता अपनी जरूरत से अधिक बिजली उत्पादन होने पर उसे ग्रिड में भेजते हैं। अब इस अतिरिक्त बिजली के बदले उपभोक्ताओं को आर्थिक लाभ मिलेगा। इससे न केवल बिजली बिल में बचत होगी बल्कि अतिरिक्त यूनिट बेचकर आय भी प्राप्त की जा सकेगी।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे राज्य में सौर ऊर्जा अपनाने की रफ्तार और तेज होगी तथा अधिक लोग रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने के लिए प्रेरित होंगे।
छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी ने नेट मीटरिंग और बायबैक प्रक्रिया को विस्तार से समझाया है। नेट मीटरिंग सिस्टम में सोलर प्लांट से उत्पादित बिजली का उपयोग सबसे पहले उपभोक्ता की घरेलू जरूरतों को पूरा करने में किया जाता है।
यदि उत्पादन खपत से अधिक होता है तो बची हुई बिजली ग्रिड में चली जाती है। इस अतिरिक्त बिजली की यूनिट हर महीने उपभोक्ता के खाते में दर्ज होती रहती हैं। वित्तीय वर्ष के अंत में इन सभी बची हुई यूनिटों की गणना कर निर्धारित बायबैक दर के अनुसार उनकी कीमत तय की जाती है।
इसके बाद संबंधित राशि उपभोक्ता के खाते में जमा कर दी जाती है या आगामी बिजली बिलों में समायोजित कर दी जाती है।
पावर कंपनी ने उपभोक्ताओं के बीच चल रहे भ्रम को भी दूर किया है। कंपनी के अनुसार प्रत्येक नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत में अतिरिक्त यूनिटों का लेखा-जोखा शून्य से शुरू किया जाता है।
इस कारण पिछले वर्ष की बची हुई यूनिटें नए बिल में दिखाई नहीं देतीं, लेकिन उनका आर्थिक मूल्य सुरक्षित रहता है। यह राशि उपभोक्ता के खाते में दर्ज रहती है और बाद के बिजली बिलों में क्रेडिट के रूप में समायोजित कर दी जाती है।
राज्य में प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत बड़ी संख्या में लोग रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित कर रहे हैं। बायबैक व्यवस्था लागू होने से ऐसे हजारों उपभोक्ताओं को सीधा आर्थिक फायदा मिलेगा।
पावर कंपनी का कहना है कि पूरी प्रक्रिया छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग के नियमों के तहत पारदर्शी तरीके से संचालित की जा रही है ताकि उपभोक्ताओं को उनकी अतिरिक्त बिजली का उचित लाभ मिल सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि अतिरिक्त बिजली की खरीद और भुगतान की स्पष्ट व्यवस्था होने से राज्य में हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा। इससे पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम होगी और उपभोक्ता बिजली उत्पादन में भागीदार बन सकेंगे।
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पावर कंपनी के अधिकारियों के अनुसार प्रस्तावित बायबैक दर को अंतिम मंजूरी के लिए छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) को भेजा गया है। आयोग की स्वीकृति मिलते ही उपभोक्ताओं को अतिरिक्त बिजली के बदले मिलने वाली राशि उनके बिजली बिल में क्रेडिट के रूप में दिखाई देने लगेगी।
अतिरिक्त बिजली अब बनेगी कमाई का जरिया
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे राज्य में सौर ऊर्जा अपनाने की रफ्तार और तेज होगी तथा अधिक लोग रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने के लिए प्रेरित होंगे।
ऐसे काम करती है नेट मीटरिंग व्यवस्था
यदि उत्पादन खपत से अधिक होता है तो बची हुई बिजली ग्रिड में चली जाती है। इस अतिरिक्त बिजली की यूनिट हर महीने उपभोक्ता के खाते में दर्ज होती रहती हैं। वित्तीय वर्ष के अंत में इन सभी बची हुई यूनिटों की गणना कर निर्धारित बायबैक दर के अनुसार उनकी कीमत तय की जाती है।
इसके बाद संबंधित राशि उपभोक्ता के खाते में जमा कर दी जाती है या आगामी बिजली बिलों में समायोजित कर दी जाती है।
हर वित्तीय वर्ष में नया होता है हिसाब
इस कारण पिछले वर्ष की बची हुई यूनिटें नए बिल में दिखाई नहीं देतीं, लेकिन उनका आर्थिक मूल्य सुरक्षित रहता है। यह राशि उपभोक्ता के खाते में दर्ज रहती है और बाद के बिजली बिलों में क्रेडिट के रूप में समायोजित कर दी जाती है।
हजारों उपभोक्ताओं को मिलेगा लाभ
पावर कंपनी का कहना है कि पूरी प्रक्रिया छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग के नियमों के तहत पारदर्शी तरीके से संचालित की जा रही है ताकि उपभोक्ताओं को उनकी अतिरिक्त बिजली का उचित लाभ मिल सके।
सौर ऊर्जा को मिलेगा बढ़ावा
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