बस्तर की गलियों से कलेक्टर की कुर्सी तक…आईएएस तनुजा सलाम की प्रेरक कहानी
Harrison Masih | Aug 31, 2026, 17:20 IST
आईएएस तनुजा सलाम
2019 बैच की IAS अधिकारी तनुजा सलाम को मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले का नया कलेक्टर बनाया गया है। बस्तर में बचपन बिताने वाली तनुजा ने पहली बार राज्य सेवा परीक्षा में असफल होने के बाद दोबारा प्रयास किया और सफलता हासिल की।
छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक गलियारों में एक बार फिर आईएएस अधिकारी तनुजा सलाम का नाम चर्चा में है। 2019 बैच की आईएएस अधिकारी तनुजा सलाम को राज्य सरकार ने मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले का नया कलेक्टर बनाया है। इससे पहले वे खेल एवं युवा कल्याण विभाग में संचालक की जिम्मेदारी संभाल रही थीं।
अब सरकार ने उन्हें आदिवासी बहुल इस जिले की प्रशासनिक कमान सौंपी है। तनुजा सलाम की कहानी इसलिए भी अलग है, क्योंकि उनका सफर किसी बड़े शहर या बेहद सुविधाजनक माहौल से शुरू नहीं हुआ। बस्तर के अलग-अलग इलाकों में बचपन बिताने वाली तनुजा ने सीमित संसाधनों और लगातार बदलती परिस्थितियों के बीच अपनी पढ़ाई पूरी की और फिर सरकारी सेवा में जगह बनाई। राज्य प्रशासनिक सेवा से शुरू हुआ उनका सफर आगे चलकर भारतीय प्रशासनिक सेवा तक पहुंचा।
तनुजा सलाम का जन्म 1 मई 1980 को कांकेर में हुआ। उनका ननिहाल कोंटा में है। पिता सरकारी सेवा में थे और उनकी नौकरी के कारण परिवार को बस्तर संभाग के अलग-अलग इलाकों में रहना पड़ा। दंतेवाड़ा, जगदलपुर, कांकेर और बस्तर के दूसरे हिस्सों में उनका बचपन बीता। वे तीन बहनों और एक भाई में सबसे बड़ी हैं।
परिवार में शिक्षा को महत्व दिया गया। उनकी मां ने भी बेटी की पढ़ाई को प्राथमिकता देते हुए अपनी नौकरी तक छोड़ दी थी। यही वजह रही कि तनुजा की शिक्षा लगातार जारी रही और उन्होंने कॉन्वेंट स्कूलों से शुरुआती पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वे उच्च शिक्षा के लिए नागपुर गईं और वहां से स्नातक की डिग्री हासिल की।
![IAS Tanuja Salam]()
वर्ष 2000 में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उनके सामने करियर को लेकर कई विकल्प थे। इसी दौरान नया राज्य छत्तीसगढ़ अस्तित्व में आ चुका था और राज्य में प्रशासनिक सेवाओं के लिए नए अवसर भी बढ़ रहे थे। परिवार की सलाह पर तनुजा रायपुर आ गईं और छत्तीसगढ़ राज्य सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। लेकिन प्रतियोगी परीक्षा का पहला प्रयास उनके पक्ष में नहीं गया। उन्हें असफलता मिली।
यहीं से कहानी का असली मोड़ आया। पहली असफलता के बाद उन्होंने तैयारी छोड़ी नहीं, बल्कि दोबारा परीक्षा दी। दूसरे प्रयास में उन्होंने सफलता हासिल की और राज्य प्रशासनिक सेवा में चयनित हो गईं। इसके बाद प्रशासनिक सेवा में उनका सफर आगे बढ़ता गया।
राज्य सेवा में आने के बाद तनुजा सलाम ने अलग-अलग प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालीं। मुख्य कार्यपालन अधिकारी से लेकर अपर कलेक्टर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम करते हुए उन्हें मैदानी प्रशासन का लंबा अनुभव मिला।
ग्रामीण प्रशासन, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और कानून-व्यवस्था से जुड़े कामों के बीच उनकी प्रशासनिक शैली भी सामने आती गई। बाद में उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा में पदोन्नति मिली और वे आईएएस अधिकारी बन गईं। एक छोटे राज्य के प्रशासनिक ढांचे में राज्य सेवा से आईएएस तक पहुंचना अपने आप में उनके लंबे करियर की बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
अब सरकार ने उन्हें मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले का कलेक्टर बनाया है। यह जिम्मेदारी कई मायनों में महत्वपूर्ण है। जिला भौगोलिक और सामाजिक रूप से चुनौतीपूर्ण इलाकों में शामिल है, जहां प्रशासन के सामने विकास, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और सरकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने जैसी कई चुनौतियां रहती हैं।
तनुजा सलाम के सामने अब राज्य सेवा से शुरू हुए अपने प्रशासनिक अनुभव को एक नए जिले की पूरी प्रशासनिक कमान के साथ जोड़ने की चुनौती है। उनकी कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यही है कि बस्तर के अलग-अलग हिस्सों में बचपन बिताने वाली एक लड़की ने पहले असफलता का सामना किया, फिर राज्य प्रशासनिक सेवा में जगह बनाई, वर्षों तक मैदानी प्रशासन में काम किया और अंततः आईएएस बनीं।
अब वही अधिकारी एक पूरे जिले की कलेक्टर के रूप में प्रशासन की कमान संभाल रही हैं। तनुजा सलाम का सफर यह भी बताता है कि प्रशासनिक सेवा तक पहुंचने की राह हमेशा पहली कोशिश में सफलता से नहीं खुलती। कई बार पहली असफलता ही उस रास्ते की शुरुआत बनती है, जो आगे चलकर बड़ी जिम्मेदारी तक ले जाती है।
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अब सरकार ने उन्हें आदिवासी बहुल इस जिले की प्रशासनिक कमान सौंपी है। तनुजा सलाम की कहानी इसलिए भी अलग है, क्योंकि उनका सफर किसी बड़े शहर या बेहद सुविधाजनक माहौल से शुरू नहीं हुआ। बस्तर के अलग-अलग इलाकों में बचपन बिताने वाली तनुजा ने सीमित संसाधनों और लगातार बदलती परिस्थितियों के बीच अपनी पढ़ाई पूरी की और फिर सरकारी सेवा में जगह बनाई। राज्य प्रशासनिक सेवा से शुरू हुआ उनका सफर आगे चलकर भारतीय प्रशासनिक सेवा तक पहुंचा।
बस्तर में बीता बचपन
परिवार में शिक्षा को महत्व दिया गया। उनकी मां ने भी बेटी की पढ़ाई को प्राथमिकता देते हुए अपनी नौकरी तक छोड़ दी थी। यही वजह रही कि तनुजा की शिक्षा लगातार जारी रही और उन्होंने कॉन्वेंट स्कूलों से शुरुआती पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वे उच्च शिक्षा के लिए नागपुर गईं और वहां से स्नातक की डिग्री हासिल की।
IAS Tanuja Salam
पहली कोशिश में मिली असफलता, दूसरी में बदली तस्वीर
यहीं से कहानी का असली मोड़ आया। पहली असफलता के बाद उन्होंने तैयारी छोड़ी नहीं, बल्कि दोबारा परीक्षा दी। दूसरे प्रयास में उन्होंने सफलता हासिल की और राज्य प्रशासनिक सेवा में चयनित हो गईं। इसके बाद प्रशासनिक सेवा में उनका सफर आगे बढ़ता गया।
CEO से अपर कलेक्टर और फिर IAS
ग्रामीण प्रशासन, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और कानून-व्यवस्था से जुड़े कामों के बीच उनकी प्रशासनिक शैली भी सामने आती गई। बाद में उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा में पदोन्नति मिली और वे आईएएस अधिकारी बन गईं। एक छोटे राज्य के प्रशासनिक ढांचे में राज्य सेवा से आईएएस तक पहुंचना अपने आप में उनके लंबे करियर की बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
अब मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी की जिम्मेदारी
तनुजा सलाम के सामने अब राज्य सेवा से शुरू हुए अपने प्रशासनिक अनुभव को एक नए जिले की पूरी प्रशासनिक कमान के साथ जोड़ने की चुनौती है। उनकी कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यही है कि बस्तर के अलग-अलग हिस्सों में बचपन बिताने वाली एक लड़की ने पहले असफलता का सामना किया, फिर राज्य प्रशासनिक सेवा में जगह बनाई, वर्षों तक मैदानी प्रशासन में काम किया और अंततः आईएएस बनीं।
अब वही अधिकारी एक पूरे जिले की कलेक्टर के रूप में प्रशासन की कमान संभाल रही हैं। तनुजा सलाम का सफर यह भी बताता है कि प्रशासनिक सेवा तक पहुंचने की राह हमेशा पहली कोशिश में सफलता से नहीं खुलती। कई बार पहली असफलता ही उस रास्ते की शुरुआत बनती है, जो आगे चलकर बड़ी जिम्मेदारी तक ले जाती है।
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