बस्तर में नहीं जलता रावण, कर्नाटक में राजसी जुलूस, श्रीलंका से नेपाल तक दशहरे की धूम

Arun Tiwari | Oct 20, 2026, 12:47 IST
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दशहरा उत्सव
दशहरा उत्सव

दशहरा यानी विजयादशमी भारत के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है। हालांकि, इसकी परंपराएं सिर्फ भारत तक सीमित नहीं हैं। दक्षिण एशिया के कई देशों में भी दशहरा से जुड़ी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं प्रचलित हैं। भारत में कहीं भगवान राम की रावण पर विजय का उत्सव मनाया जाता है, तो कहीं मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय के रूप में इसे मनाते हैं।

छत्तीसगढ़ के बस्तर में तो दशहरा लगभग 75 दिनों तक चलता है और यहां रावण का पुतला भी नहीं जलाया जाता।

मैसूर दशहरा, कर्नाटक

मैसूर का दशहरा भारत के सबसे भव्य और प्रसिद्ध उत्सवों में गिना जाता है। इसकी परंपरा मैसूर के राजपरिवार से जुड़ी है और इसका आयोजन सदियों से होता आ रहा है।

क्या है खास?

मैसूर महल को हजारों रोशनी से सजाया जाता है। विजयादशमी पर जंबू सवारी नाम से भव्य शोभायात्रा निकलती है। शोभायात्रा में सजे हुए हाथी, पारंपरिक वाद्ययंत्र, झांकियां और लोक कलाकार शामिल होते हैं।

दशहरा में मैसूर महल
दशहरा में मैसूर महल

उत्सव में मां चामुंडेश्वरी की पूजा प्रमुख होती है। यहां दशहरा भगवान राम और रावण की कथा के बजाय मुख्य रूप से मां चामुंडेश्वरी की महिषासुर पर विजय से जुड़ा है।


बस्तर दशहरा, छत्तीसगढ़

बस्तर का दशहरा अपनी विशिष्ट आदिवासी परंपराओं के कारण दुनिया के अनूठे उत्सवों में शामिल है। इसकी परंपरा लगभग 600 साल पुरानी मानी जाती है।

क्या है खास?

यह उत्सव लगभग 75 दिनों तक चलता है। यहां रावण का पुतला नहीं जलाया जाता। मां दंतेश्वरी की आराधना और स्थानीय देवी-देवताओं की परंपराएं इसका केंद्र हैं।

बस्तर दशहरा में रथ खींचने की परंपरा
बस्तर दशहरा में रथ खींचने की परंपरा

विशाल लकड़ी के रथ को खींचने में अलग-अलग समुदायों के लोग भाग लेते हैं। मुरिया दरबार जैसे आयोजन में स्थानीय परंपराओं और जनसमुदाय से जुड़े विषयों को महत्व दिया जाता है। बस्तर दशहरा इस बात का उदाहरण है कि एक ही त्योहार अलग-अलग क्षेत्रों में कितने अलग सांस्कृतिक रूप ले सकता है।

कुल्लू दशहरा, हिमाचल प्रदेश

हिमाचल प्रदेश की कुल्लू घाटी में मनाया जाने वाला दशहरा अपनी अनोखी परंपराओं के लिए मशहूर है। जब देश के अधिकांश हिस्सों में विजयादशमी के दिन दशहरा समाप्त होता है, तब कुल्लू में उत्सव की शुरुआत होती है।

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गुजरात का गरबा हो या बंगाल की पूजा, देशभर में दिखती है मां दुर्गा की भक्ति के अनोखे रंग, जानें देश में नवरात्रि की रस्में
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शारदीय नवरात्रि में देश भर में भक्ति का अनोखा रूप दिखेगा। नवरात्रि में गुजरात का गरबा, बंगाल की दुर्गा पूजा और कुल्लू का दशहरा इस पर्व को खास बनाते हैं। कश्मीर से कन्याकुमारी तक हर राज्य में मां दुर्गा की पूजा अलग अंदाज में होती है। आइए देशभर की इन खूबसूरत परंपराओं के बारे में जानें।
शारदीय नवरात्रि में देश भर में भक्ति का अनोखा रूप दिखेगा। नवरात्रि में गुजरात का गरबा, बंगाल की दुर्गा पूजा और कुल्लू का दशहरा इस पर्व को खास बनाते हैं। कश्मीर से कन्याकुमारी तक हर राज्य में मां दुर्गा की पूजा अलग अंदाज में होती है। आइए देशभर की इन खूबसूरत परंपराओं के बारे में जानें।

क्या है खास?

उत्सव लगभग सात दिनों तक चलता है। भगवान रघुनाथ की शोभायात्रा निकाली जाती है। आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में स्थानीय देवी-देवताओं की पालकियां लाई जाती हैं।

कुल्लू में दशहरा उत्सव
कुल्लू में दशहरा उत्सव

पारंपरिक संगीत, नृत्य और धार्मिक अनुष्ठान आयोजन को विशेष बनाते हैं। कुल्लू दशहरा का प्रमुख आकर्षण स्थानीय देवी-देवताओं का एक स्थान पर जुटना है। यह परंपरा 17वीं सदी में राजा जगत सिंह के समय से जुड़ी मानी जाती है।

दिल्ली का दशहरा और रामलीला

दिल्ली का दशहरा देश के सबसे चर्चित आयोजनों में से एक है। यहां नवरात्र के दौरान रामलीला का मंचन होता है और विजयादशमी पर रावण, कुंभकर्ण तथा मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है।

दिल्ली का दशहरा और रामलीला
दिल्ली का दशहरा और रामलीला

क्या है खास?

विशाल पुतलों का निर्माण। रामलीला के जरिए रामायण की कथा का मंचन।आतिशबाजी और मेले। बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी। दिल्ली की रामलीला परंपरा धार्मिक आयोजन के साथ-साथ लोकनाट्य और सामुदायिक संस्कृति का भी हिस्सा है।

वाराणसी और रामनगर की रामलीला, उत्तर प्रदेश

वाराणसी के निकट रामनगर की रामलीला अपनी ऐतिहासिक और पारंपरिक शैली के लिए प्रसिद्ध है।

छत्तीसगढ़ में सियासी घमासान: राष्ट्रपति, भागवत, शाह और स्मृति ईरानी के दौरे से गरमाई राजनीति | Political Turmoil in Chhattisgarh: Politics Heats Up with Visits of President, Bhagwat, Shah, and Smriti Irani
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क्या है खास?

रामायण की कथा का कई दिनों तक मंचन होता है। अलग-अलग स्थानों पर खुले वातावरण में प्रसंगों का अभिनय किया जाता है। कलाकार पारंपरिक वेशभूषा में पात्रों की भूमिका निभाते हैं। दर्शक कथा के विभिन्न प्रसंगों को देखने के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाते हैं।

वाराणसी में दशहरा उत्सव
वाराणसी में दशहरा उत्सव

यहां रामलीला केवल मंच पर होने वाला कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र को रामायण की कथा से जोड़ने वाली परंपरा है।

कोलकाता की दुर्गा पूजा और विजयादशमी, पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल में दशहरा दुर्गा पूजा के समापन से जुड़ा है। यहां भगवान राम की रावण पर विजय के बजाय मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय की कथा विशेष महत्व रखती है।

क्या है खास?

कलात्मक और भव्य दुर्गा पूजा पंडाल। मां दुर्गा की आकर्षक प्रतिमाएं। पारंपरिक ढाक वादन और सांस्कृतिक कार्यक्रम। विजयादशमी पर सिंदूर खेला और प्रतिमाओं का विसर्जन। कोलकाता की दुर्गा पूजा धार्मिक आस्था के साथ कला, शिल्प और सामुदायिक भागीदारी का बड़ा उत्सव है।

नेपाल का दशहरा

नेपाल में दशहरा से मिलता-जुलता प्रमुख त्योहार दशैं कहलाता है। यह देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक और पारिवारिक त्योहारों में से एक है। इसका संबंध देवी दुर्गा की महिषासुर पर विजय और बुराई पर अच्छाई की जीत से है।

नेपाल में दशहरा उत्सव
नेपाल में दशहरा उत्सव

क्या है खास?

कई दिनों तक धार्मिक अनुष्ठान और पूजा। परिवार के सदस्यों का एकत्र होना। बड़ों से टीका और जमरा प्राप्त करने की परंपरा। देवी दुर्गा की आराधना और पारिवारिक मिलन। भारत के दशहरे की तरह नेपाल का दशैं भी शक्ति, विजय और शुभता का प्रतीक है, लेकिन इसकी पारिवारिक परंपराएं इसे विशिष्ट बनाती हैं।


श्रीलंका में रामायण से जुड़े धार्मिक और पर्यटन स्थल

श्रीलंका में भारत की तरह दशहरा का कोई एक सर्वव्यापी, प्रमुख राष्ट्रीय उत्सव नहीं है। हालांकि, रामायण से जुड़े स्थानों और धार्मिक परंपराओं के कारण यह देश रामायण पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण है।

क्या है खास?

रामायण से संबंधित माने जाने वाले स्थलों का धार्मिक महत्व। सीता एलिया और अशोक वाटिका से जुड़ी स्थानीय मान्यताएं। भारत से आने वाले रामायण पर्यटन यात्रियों की रुचि।
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