छत्तीसगढ़ के वैज्ञानिकों का खेल, नियमों में हेरफेर कर बनाया ऐसा फॉर्मूला कि रिटायमेंट के बाद छात्रों के पैसे से चलती रहे मौज
VINAY VERMA | Mar 07, 2026, 17:20 IST
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छत्तीसगढ़ के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में 2000 करोड़ से ज्यादा के पीएफ-पेंशन घोटाले का खुलासा। कर्मचारियों के वेतन से CPF की कटौती नहीं हुई, फिर भी पेंशन मिलती रही, छात्रों की फीस से हो रहा भुगतान।
NEWS IN SHORT
- 2000 करोड़ से अधिक का पेंशन-पीएफ घोटाला
- छात्रों के पैसे से वैज्ञानिको की मौज
- CPF के नाम पर पैसों की बंदरबाट
- नियमानुसार 13 प्रतिशत कर्मचारियेां का था हिस्सा
- 13 प्रतिशत विवि के फंड से आना था
- कर्मचारियेां का नहीं काटा गया पैसा
NEWS IN DETAIL
CPF यानि कंट्रीब्यूटरी प्रोविडेंट फंड में कर्मचारी और विश्वविद्यालय का 13-13 प्रतिशत पैसा कटकर जमा होना था। लेकिन खेल ऐसा खेला गया कि कर्मचारियों की सैलरी से कोई कटौती ही नहीं हुई। जबकि रिटायमेंट के बाद कर्मचारियों को पेंशन और पीएफ का पैसा मिलता रहा। सारा खेल 20 जनवरी 1987 से चल रहा था। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस खेल में संस्था को अब तक 2000 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हो चुका है। वित्त विभाग ने इसकी जांच के लिए एक टीम बना दी है।
पुराने कंपट्रोलर ने पकड़ी गड़बड़ी
जिसमें विवि और कर्मचारी के वेतन से 13-13 प्रतिशत जमा होना था। लेकिन सारा पैसा विश्वविद्यालय की तरफ से जमा हो रहा है।
छात्रों के फीस से वैज्ञानिकों की मौज
आंकड़ों के मुताबिक 2030 में फंड का पैसा जीरो हो जाएगा। जबकि सालाना 90 करोड़ रुपए पेंशन और पीएफ पर खर्च होंगे।
सालाना आय 33 करोड़ रुपए
इसके अलावा विश्वविद्यालय अपने हिस्से का 5 करोड़ रुपए जमा करता है। जबकि हर साल पेंशन और प्रोविडेंट फंड के नाम से 46 करोड़ रुपए बांटे जा रहे हैं।
यानी कर्मचारी बिना अपनी जेब से एक रुपया दिए पूरा लाभ ले रहे। यह व्यवस्था न केवल नियमों के खिलाफ है बल्कि सरकारी वित्तीय अनुशासन की भी खुली अनदेखी है।
शुरु से ही सबको पता..
छग बनने के बाद भी कृषि विभाग के अधिकारियो ने विश्वविद्यालय से जवाब मांगा। लेकिन बडी बात यह है कि अनियमिता जारी रही। सवाल उठाने वाले अधिकारियों को ट्रांसफर किया जाता रहा।
1 हजार लोगों का साझा खेल
लिखित स्वीकृति भी हुई लेकिन सारा खेल मौखिक सहमति से चलता रहा। अब तो खेल करने वाले अधिकारी रिटायर भी हो चुके हैं। कुछ की मृत्यु भी हो चुकी है। ऐसे में गड़बड़ी की जिम्मेदारी किस पर आएगी, बड़ा सवाल है।
सालाना ऑडिट भी कुछ नहीं बिगाड़ पाया
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