समझें क्या है पूरा मामला
छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन का काम धीमा चल रहा है। पिछले तीन साल में 4710 करोड़ रुपये खर्च नहीं हुए। इसके कारण आठ लाख से ज्यादा घर पानी को तरस रहे हैं। विभाग ने बिना पाइपलाइन बिछाए ही पानी की टंकियां बना दीं। अब सरकार ने पंचायतों को इसकी जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया है।
जल जीवन मिशन हुआ फेल
छत्तीसगढ़ में पीने के पानी की योजनाएं सुस्त पड़ गई हैं। विभाग को काम के लिए भारी भरकम बजट मिला था। लेकिन अधिकारी इस पैसे को खर्च ही नहीं कर पाए। पिछले तीन वित्तीय वर्षों की स्थिति बेहद खराब है। करीब 4710 करोड़ रुपये बिना उपयोग के पड़े रहे।
8 लाख घर अब भी प्यासे
पैसे का सही समय पर इस्तेमाल नहीं किया गया। इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। सूबे के करीब आठ लाख घरों में पानी नहीं पहुंचा। अगर पैसा खर्च होता तो लोगों को शुद्ध पानी मिलता। यह काम तीन साल पहले ही पूरा हो जाना था।
करोड़ों का बजट रहा बेकार
आंकड़ों के मुताबिक विभाग के पास करोड़ों रुपये पड़े रहे। वित्तीय वर्ष 2022 और 2023 में 511 करोड़ खर्च नहीं हुए। साल 2023 और 2024 में यह आंकड़ा 4143 करोड़ रहा। इसी तरह 2024 और 2025 में 56 करोड़ रुपये पड़े रहे। यह पैसे आम आदमी तक शुद्ध पानी पहुंचाने के लिए थे।
जमीनी हकीकत है बेहद खराब
सूचना के अधिकार के तहत चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। राष्ट्रीय स्तर पर भी बजट खर्च करने में नाकामी मिली है। धरातल पर मिशन की स्थिति बिल्कुल अलग है। गांवों में पानी की विशाल टंकियां खड़ी कर दी गई हैं। लेकिन वहां तक कोई पाइपलाइन ही नहीं बिछाई गई है।
कहीं बोरवेल तो कहीं नल गायब
जहां पाइपलाइन बिछी है वहां नल की टोंटियां नहीं हैं। कई जगहों पर तो बोरवेल ही नहीं खोदे गए हैं। यह स्थिति विभागीय प्लानिंग की पोल खोलती है। पहले साल 2024 तक हर घर नल कनेक्शन का लक्ष्य था। लेकिन यह लक्ष्य पूरी तरह से फेल साबित हुआ है।
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छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन फेल
ग्राउंड ऑडिट की उठी मांग
इस मामले में आरटीआई (Right to Information) कार्यकर्ता संजय थूल ने आवाज उठाई है। उन्होंने जल जीवन मिशन के कार्यों की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि प्रदेश भर में ग्राउंड ऑडिट होना चाहिए। इससे पता चलेगा कि असल में काम कहां और कितना हुआ है।
अब पंचायतों के पास होगी कमान
शुक्रवार को मंत्रालय में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई। यह बैठक मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में हुई थी। इसमें ग्रामीण पेयजल योजनाओं को लेकर बड़ा फैसला लिया गया। अब नल जल योजनाओं की पूरी कमान ग्राम पंचायतों को मिलेगी। यह जिम्मेदारी ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों को भी दी जाएगी।
सोशल ऑडिट कराने के निर्देश
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि हर घर में जलापूर्ति सुनिश्चित होनी चाहिए। इसके लिए हर स्तर पर सोशल ऑडिट कराया जाएगा। इससे योजनाओं में पारदर्शिता आएगी और काम में तेजी मिलेगी।
भ्रष्टाचार के लग रहे आरोप
पानी के इस प्रोजेक्ट में बड़ी गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। पिछली सरकार के समय भी ऑडिट में कई खामियां मिली थीं। सवाल सिर्फ बजट के पैसों का नहीं है। इस नाकामी की कीमत दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों के लोग चुका रहे हैं। यह सीधे तौर पर आम जनजीवन के स्वास्थ्य से जुड़ा है।
राजस्थान में भी हुआ घोटाला
जल जीवन मिशन का यह हाल सिर्फ छत्तीसगढ़ में नहीं है। राजस्थान में भी इस मिशन में बड़ा घोटाला सामने आया था। वहां जांच का दायरा पूर्व एसीएस (Additional Chief Secretary) तक पहुंचा था। इस मामले में कई लोगों की गिरफ्तारी भी हुई थी। लीकेज की यह हालत अमूमन हर राज्य में देखी जा रही है।
क्या बदलेंगे अब हालात
सरकार ने अब रणनीति में बदलाव किया है। पंचायत स्तर पर जिम्मेदारी तय होने से उम्मीद जगी है। लेकिन देखना होगा कि जमीनी स्तर पर कितना असर होता है। शुद्ध पेयजल आज भी कई ग्रामीणों के लिए सपना बना हुआ है। सरकार को इस दिशा में और ठोस कदम उठाने होंगे।
आदिवासी इलाकों में जल संकट
छत्तीसगढ़ के दूरस्थ और आदिवासी इलाकों में स्थिति और खराब है। इन क्षेत्रों में पानी की कमी से लोग काफी परेशान हैं। गर्मियों के दिनों में यह संकट और भी गहरा जाता है। लोग मीलों दूर से पीने का पानी लाने को मजबूर हैं। शुद्ध पानी का इंतजार पीढ़ियों से किया जा रहा है।
स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर
शुद्ध पेयजल नहीं मिलने से लोगों का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। गंदा पानी पीने से कई तरह की बीमारियां फैल रही हैं। खासकर बच्चों और बुजुर्गों पर इसका ज्यादा असर होता है। जल जीवन मिशन का मुख्य उद्देश्य ही स्वास्थ्य सुधारना था। लेकिन सुस्त चाल ने इस सपने को तोड़ दिया है।
प्लानिंग में कहां हुई चूक
अधिकारियों ने काम शुरू करने से पहले सही प्लानिंग नहीं की। बिना स्रोत जाने ही पानी की टंकियां बना दी गईं। ठेकेदारों ने भी काम में काफी लापरवाही बरती है। विभाग की मॉनिटरिंग भी पूरी तरह से कमजोर रही है। इसी वजह से यह योजना अपने लक्ष्य से भटक गई।
लापरवाही पर जिम्मेदार मौन
इतनी बड़ी लापरवाही के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी मौन हैं। कोई भी इस नाकामी की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। जनता जानना चाहती है कि उनका पैसा कहां खर्च हुआ। सरकार को इस मामले में सख्त कार्रवाई करने की जरूरत है। दोषियों पर लगाम कसे बिना योजना सफल नहीं हो सकती।
नई समिति से जगी उम्मीदें
ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति अब काम संभालेगी। इसमें गांव के ही लोग शामिल होंगे। इससे उम्मीद है कि काम सही तरीके से हो सकेगा। गांव वाले अपनी जरूरत के हिसाब से पानी की व्यवस्था करेंगे। उन्हें मेंटेनेंस की जिम्मेदारी भी खुद उठानी होगी। जल है तो कल है। यह नारा सुनने में बहुत अच्छा लगता है। लेकिन इसे जमीन पर उतारने के लिए मेहनत चाहिए। सरकार को अपना सिस्टम सुधारना होगा। तभी हर घर तक नल से जल पहुंच सकेगा। पानी की हर बूंद को सहेजना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।
जल स्रोतों की हो रही अनदेखी
प्रदेश में कई प्राकृतिक जल स्रोत मौजूद हैं। लेकिन उनका सही तरीके से संरक्षण नहीं किया गया। अगर इन स्रोतों को योजना से जोड़ा जाता तो फायदा होता। जल संरक्षण के बिना ऐसी योजनाएं लंबी नहीं चल सकतीं। सरकार को भूजल स्तर बढ़ाने पर भी ध्यान देना होगा।
FAQ
- छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन का कितना बजट खर्च नहीं हो पाया?
उत्तर: पिछले तीन वित्तीय वर्षों में करीब 4710 करोड़ रुपये का बजट खर्च नहीं हो सका। यह पैसा विभाग के पास बिना उपयोग के पड़ा रहा। - नल जल योजनाओं की जिम्मेदारी किसे दी गई है?
उत्तर: अब नल जल योजनाओं की पूरी कमान ग्राम पंचायतों को सौंपी गई है। ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियां भी इसकी देखरेख करेंगी
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