पंचतत्व में विलीन हुए विनोद कुमार शुक्ल, गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम विदाई, CM साय ने दिया कांधा
Harrison Masih | Dec 24, 2025, 17:30 IST
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हिंदी साहित्य के दिग्गज विनोद कुमार शुक्ल का 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया। रायपुर में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार हुआ। उन्हें हाल ही में देश का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान ज्ञानपीठ मिला था।
Raipur. छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कवि, कथाकार और उपन्यासकार विनोद कुमार शुक्ल का 88 वर्ष की आयु में मंगलवार शाम निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार रायपुर के मारवाड़ी श्मशान घाट में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया।
बेटे शाश्वत गोपाल ने उन्हें मुखाग्नि दी। अंतिम यात्रा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पार्थिव शरीर को कांधा दिया, जबकि गार्ड ऑफ ऑनर के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई।
विनोद शुक्ल की अंतिम यात्रा में देश के प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी, लेखक, कलाकार और आम नागरिक शामिल हुए। अंतिम संस्कार के बाद सभी ने दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
फिल्म अभिनेता भगवान तिवारी ने कहा कि, “विनोद कुमार शुक्ल का जाना सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए बड़ी क्षति है। साहित्य, नाटक और सिनेमा जगत के लिए यह अपूरणीय नुकसान है।”
वहीं हिंदी युग्म के प्रकाशक शैलेश भारतवासी ने कहा कि हिंदी पढ़ने वाला हर व्यक्ति विनोद जी से गहरा स्नेह करता था।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विनोद शुक्ल के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा—“ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात लेखक विनोद कुमार शुक्ल जी का निधन अत्यंत दुःखद है। हिंदी साहित्य में उनके अमूल्य योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।”
रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल मारवाड़ी श्मशान घाट पहुंचे और श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि विनोद कुमार शुक्ल का जाना पूरे देश की क्षति है।
गौरतलब है कि विनोद शुक्ल पिछले कुछ महीनों से बीमार चल रहे थे और उनका इलाज एम्स रायपुर में चल रहा था। एक महीने पहले ही उन्हें भारत के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, जिससे पूरे साहित्य जगत में खुशी की लहर थी।
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1 जनवरी 1937 को राजनांदगांव में जन्मे विनोद कुमार शुक्ल पिछले 50 वर्षों से अधिक समय तक लेखन से जुड़े रहे। उनकी लेखनी सादगी, संवेदना और मानवीय अनुभवों की गहराई के लिए जानी जाती है।
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पहली कविता संग्रह: ‘लगभग जय हिंद’ (1971)
चर्चित कहानी संग्रह:
बेटे शाश्वत गोपाल ने उन्हें मुखाग्नि दी। अंतिम यात्रा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पार्थिव शरीर को कांधा दिया, जबकि गार्ड ऑफ ऑनर के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई।
साहित्य जगत की बड़ी हस्तियों की मौजूदगी
फिल्म अभिनेता भगवान तिवारी ने कहा कि, “विनोद कुमार शुक्ल का जाना सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए बड़ी क्षति है। साहित्य, नाटक और सिनेमा जगत के लिए यह अपूरणीय नुकसान है।”
वहीं हिंदी युग्म के प्रकाशक शैलेश भारतवासी ने कहा कि हिंदी पढ़ने वाला हर व्यक्ति विनोद जी से गहरा स्नेह करता था।
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Vinod Kumar Shukla funeral
श्री विनोद कुमार शुक्ल जी के निवास पहुँचकर उनके अंतिम दर्शन किया। उन्हें सम्पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गयी। यह एक ऐसे सृजनशील व्यक्तित्व की अंतिम यात्रा थी, जिन्होंने साहित्य जगत को ऐसी अनमोल कृतियाँ दीं, जो साहित्य संसार की थाती है।
साहित्यकार और कवि के विचार… pic.twitter.com/v9h5N9N1uL
— Vishnu Deo Sai (@vishnudsai) December 24, 2025
प्रधानमंत्री मोदी ने जताया शोक
सांसद और जनप्रतिनिधियों ने दी श्रद्धांजलि
लंबे समय से चल रहा था इलाज
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साहित्य में अतुलनीय योगदान
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प्रमुख कृतियां
चर्चित कहानी संग्रह:
- पेड़ पर कमरा
- महाविद्यालय
- नौकर की कमीज
- खिलेगा तो देखेंगे
- दीवार में एक खिड़की रहती थी
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