छत्तीसगढ़ की बेटी जूही व्यास बनीं जलवायु संकट की आवाज़
Harrison Masih | May 22, 2025, 19:41 IST
Juhi Vyas climate crisis cannes film festival Chhattisgarh the sootr
फ्रांस के प्रतिष्ठित कान्स फिल्म फेस्टिवल 2024 में इस बार न केवल सिनेमा और फैशन की झलक देखने को मिली, बल्कि जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संकट की गंभीर चेतावनी भी गूंजती सुनाई दी और इसकी वाहक बनीं छत्तीसगढ़ के दुर्ग की जूही व्यास।
फ्रांस के प्रतिष्ठित कान्स फिल्म फेस्टिवल 2024 में इस बार न केवल सिनेमा और फैशन की झलक देखने को मिली, बल्कि जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संकट की गंभीर चेतावनी भी गूंजती सुनाई दी और इसकी वाहक बनीं छत्तीसगढ़ के दुर्ग की जूही व्यास।
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जूही ने ग्रीनपीस इंडिया और 'वॉइस ऑफ द प्लैनेट' अभियान के तहत भारत का प्रतिनिधित्व किया और रेड कार्पेट पर एक ऐसी ड्रेस पहनकर उतरीं, जो फैशन के जरिए जलवायु संकट का संदेश दे रही थी। यह ड्रेस वियतनामी डिज़ाइनर नगुयेन टी ट्रीन द्वारा विशेष रूप से तैयार की गई थी, जिसमें बढ़ते तापमान, विलुप्त होती प्रजातियाँ, समुद्री संकट और धरती के जलने की पीड़ा को कलात्मक रूप से दर्शाया गया था।
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जूही की यह भागीदारी न केवल उनके लिए बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और भारत के लिए गर्व का विषय है। एक छोटे शहर से आई महिला का विश्वस्तरीय मंच पर ग्लोबल इश्यू को उठाना, उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो किसी बड़े उद्देश्य के लिए खड़े होना चाहते हैं।
कान्स फिल्म फेस्टिवल जैसे भव्य आयोजन में जब जूही ने पर्यावरणीय मुद्दों की ओर ध्यान खींचा, तो यह साबित हो गया कि रेड कार्पेट पर चलना केवल ग्लैमर नहीं, जिम्मेदारी भी हो सकती है।
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जूही ने ग्रीनपीस इंडिया और 'वॉइस ऑफ द प्लैनेट' अभियान के तहत भारत का प्रतिनिधित्व किया और रेड कार्पेट पर एक ऐसी ड्रेस पहनकर उतरीं, जो फैशन के जरिए जलवायु संकट का संदेश दे रही थी। यह ड्रेस वियतनामी डिज़ाइनर नगुयेन टी ट्रीन द्वारा विशेष रूप से तैयार की गई थी, जिसमें बढ़ते तापमान, विलुप्त होती प्रजातियाँ, समुद्री संकट और धरती के जलने की पीड़ा को कलात्मक रूप से दर्शाया गया था।
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यह सिर्फ फैशन नहीं, एक क्रांति थी
जूही ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "मैं एक छोटे शहर से आती हूँ। न बॉलीवुड से जुड़ी हूँ, न सुपरमॉडल हूँ। मेरे पास रेड कार्पेट का कोई कनेक्शन नहीं था। बस एक उद्देश्य और उसे निभाने का साहस था।" उन्होंने आगे कहा, "यह ड्रेस सिर्फ कॉउचर नहीं है, यह जलवायु का संदेश है – यह कपड़े में सिली हुई जलती धरती है। फैशन विरोध का माध्यम बन सकता है, और रेड कार्पेट भी क्रांति का मंच बन सकता है।
छोटे शहर की आवाज़, वैश्विक मंच पर गूंजी
कान्स फिल्म फेस्टिवल जैसे भव्य आयोजन में जब जूही ने पर्यावरणीय मुद्दों की ओर ध्यान खींचा, तो यह साबित हो गया कि रेड कार्पेट पर चलना केवल ग्लैमर नहीं, जिम्मेदारी भी हो सकती है।
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FAQ
- प्रश्न 1: जूही व्यास कौन हैं और वह कान्स फिल्म फेस्टिवल में क्यों गई थीं?
उत्तर: जूही व्यास छत्तीसगढ़ के दुर्ग की रहने वाली हैं। वे इस साल के कान्स फिल्म फेस्टिवल में ग्रीनपीस इंडिया और Voice of the Planet अभियान के तहत भारत का प्रतिनिधित्व करने गई थीं। उनका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संकट को वैश्विक मंच पर उजागर करना था। - प्रश्न 2: जूही व्यास की ड्रेस खास क्यों थी?
उत्तर: उनकी ड्रेस वियतनामी डिज़ाइनर नगुयेन टी ट्रीन द्वारा तैयार की गई थी, जो जलवायु परिवर्तन, तापमान वृद्धि और धरती की बिगड़ती स्थिति का प्रतीक थी। यह ड्रेस फैशन से ज़्यादा एक संदेश लेकर आई थी – एक चेतावनी और जागरूकता का प्रतीक। - प्रश्न 3: जूही व्यास का यह प्रयास क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा है?
उत्तर: एक छोटे शहर से आने वाली युवती का इतने बड़े मंच पर पर्यावरण जैसे गंभीर मुद्दे को उठाना प्रेरणादायक है। यह प्रयास दर्शाता है कि ग्लोबल मंच पर भी भारत के युवाओं की सोच, सरोकार और जिम्मेदारी की गूंज सुनाई दे रही है। - प्रश्न 4: क्या जूही व्यास का बॉलीवुड या फैशन इंडस्ट्री से कोई संबंध है?
उत्तर: नहीं, जूही व्यास का बॉलीवुड या फैशन इंडस्ट्री से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने खुद बताया कि वे एक छोटे शहर से हैं, कोई सुपर मॉडल नहीं हैं और न ही रेड कार्पेट से उनका कोई सीधा जुड़ाव रहा है। उन्होंने केवल अपने उद्देश्य और साहस के बल पर यह मुकाम हासिल किया है।
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