निलंबित डीएसपी कल्पना वर्मा की जांच रिपोर्ट,दो करोड़ के गिफ्ट का बैंक स्टेटमेंट

Arun Tiwari | Sept 07, 2026, 18:42 IST
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निलंबित DSP कल्पना वर्मा पर बड़ा खुलासा
निलंबित DSP कल्पना वर्मा पर बड़ा खुलासा

निलंबित DSP कल्पना वर्मा और कारोबारी दीपक टंडन मामले में 1482 पन्नों की जांच रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय पहुंची। रिपोर्ट में 2 करोड़ रुपए के लेनदेन, गिफ्ट और बैंक स्टेटमेंट का जिक्र है। कार्रवाई में देरी पर सवाल उठ रहे हैं।

Raipur : निलंबित डीएसपी और करोबारी दीपक टंडन विवाद मामले में जांच के बाद कार्रवाई को लेकर सवाल खड़ा हो गया है। 14 जनवरी 2026 को मामले की 1,482 पन्नों की जांच रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेजी जा चुकी है। आईजी अमरेश कुमार मिश्रा ने डीजीपी को यह जांच रिपोर्ट भेजी। लेकिन रिपोर्ट सामने आने और गंभीर आरोपों की जांच पूरी होने के बावजूद कार्रवाई की प्रक्रिया लंबे समय से आगे नहीं बढ़ी। सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी जांच रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय में किस स्तर पर अटकी है। क्या फाइल पर निर्णय लेने में इतनी लंबी देरी सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है, या फिर किसी खास वजह से मामले को आगे बढ़ाने से बचा जा रहा है। जांच रिपोर्ट में साफ लिखा है कि दीपक टंडन और कल्पना मिश्रा के बीच दो करोड़ रुपए का लेन देन हुआ है। इसके बैंक स्टेटमेंट के कागज भी सामने आए हैं। कल्पना वर्मा को सस्पेंड किया गया था लेकिन उससे आगे कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। डीजीपी अरुणदेव गौतम कहते हैं कि सारे विषयों पर वे जवाब नहीं दे सकते, जांच चल रही है, ज्यादा जानकारी जांच अधिकारी से ली जा सकती है।

जांच रिपोर्ट की समरी

छत्तीसगढ़ पुलिस सेवा की उप पुलिस अधीक्षक (DSP) कल्पना वर्मा (तत्कालीन पदस्थापना दंतेवाड़ा) और रायपुर के कारोबारी दीपक टंडन (उर्फ आंबेडकर टंडन) के बीच करोड़ों रुपये के लेन-देन, वित्तीय धोखाधड़ी और विभागीय मर्यादा के उल्लंघन के आरोपों ने एक समय प्रदेश के प्रशासनिक व राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया था। लेकिन अब यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया है। आठ महीने पहले एसपी की जांच रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय भेजी जा चुकी है लेकिन उसके बाद कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं किया गया। पुलिस मुख्यालय उस जांच रिपोर्ट पर कुंडली मारकर बैठ गया है। द सूत्र के पास जांच रिपोर्ट की समरी और दीपक टंडन के बैंक स्टेटमेंट भी हैं जो जांच रिपोर्ट में शामिल किए गए हैं। छत्तीसगढ़ पुलिस की चर्चित महिला DSP कल्पना वर्मा मामला, शिकायत, लेनदेन के सबूत और विभागीय रिपोर्ट का ब्योरा

आईजी कार्यालय की रिपोर्ट 14 जनवरी 2026

पुलिस महानिरीक्षक (IG) द्वारा पुलिस महानिदेशक (DGP) को भेजी गई विस्तृत जांच रिपोर्ट में गंभीर खुलासे किए गए हैं। जांच का आधार शिकायतकर्ता : दीपक टंडन, उनकी पत्नी बरखा टंडन, अनावेदिका कल्पना वर्मा, उनके पिता हेमंत वर्मा, भाई राकेश वर्मा, दादा-दादी और उप निरीक्षक उमेन्द्र मिश्रा के बयानों और वित्तीय विश्लेषण के आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई।व्हाट्सएप चैट व लेन-देन : दोनों के बीच हुए व्हाट्सएप संवाद, बैंक खातों के वित्तीय विश्लेषण और दिए गए बहुमूल्य उपहारों (गोल्ड, डायमंड, नकदी ) का परीक्षण किया गया। विभागीय निष्कर्ष: रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि निजी संबंधों के दौरान कार्य कराने-करने के नाम पर पैसों व उपहारों का लेन-देन किया गया, जो वरिष्ठ अधिकारी के पद की गरिमा और विभागीय आचरण नियमों के प्रतिकूल है। इस मामले में 1,482 पन्नों की मूल नस्ती (फाइल) संलग्न कर अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की गई।

खर्च के विवरण का ब्योरा

DSP कल्पना वर्मा व परिजनों को दिया गया लेन-देन
कैश (नकद) लेन-देन: लगभग ₹1,53,68,000 (विभिन्न तारीखों में नकद व सिस्टर/रिश्तेदारों को दिए गए पैसे)
ऑनलाइन/बैंक ट्रांसफर: ₹31,00,000 (DSP कल्पना वर्मा के खातों एवं उनके पिता हेमंत वर्मा के खाते में RTGS/PhonePe)
गोल्ड, डायमंड व अन्य सामग्री: ₹20,66,000 (आनंद ज्वैलर्स से सोने-हीरे के आभूषण, 2 डायमंड टॉप्स, 1 डायमंड रिंग, लैपटॉप, एलईडी टीवी)
कुल दावा की गई राशि: ₹2,05,34,000 (दो करोड़ पांच लाख चौंतीस हजार रुपए)

आरोप गंभीर, लेकिन कार्रवाई की रफ्तार सुस्त

कल्पना वर्मा पर दीपक टंडन ने करोड़ों रुपये के लेन-देन, महंगे उपहार और वाहन लेने सहित कई आरोप लगाए थे। शिकायतकर्ता की ओर से इन दावों के समर्थन में दस्तावेज और डिजिटल चैट उपलब्ध कराने की बात कही गई। मामले की जांच में WhatsApp चैट भी महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर सामने आई। इनमें पुलिस और माओवादी क्षेत्र में चल रहे ऑपरेशन से जुड़ी संवेदनशील जानकारियों के आदान-प्रदान का आरोप भी सामने आया। यदि किसी पुलिस अधिकारी पर ऑपरेशनल या खुफिया जानकारी साझा करने जैसे गंभीर आरोपों की जांच हुई है, तो स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि रिपोर्ट के बाद कार्रवाई की प्रक्रिया इतनी लंबी क्यों खिंच रही है। इस मामले में अब सवाल पुलिस मुख्यालय की भूमिका को लेकर है। यदि जांच रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय तक पहुंच चुकी है, तो उसके बाद फाइल किन-किन स्तरों से गुजरी। किस अधिकारी के पास कितने समय तक रही। क्या गृह विभाग से कोई आपत्ति या अतिरिक्त जानकारी मांगी गई। क्या जांच रिपोर्ट पर कोई विधिक राय ली गई। यहां दो स्थितियां हो सकती हैं। अगर जांच रिपोर्ट में आरोप गंभीर पाए गए हैं तो कार्रवाई होनी चाहिए। अगर जांच में आरोप प्रमाणित नहीं होते तो अधिकारी को राहत मिलनी चाहिए। लेकिन फाइल को लंबे समय तक लंबित रखना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।
यह सवाल अब उठना स्वाभाविक है कि क्या कल्पना वर्मा को किसी स्तर पर संरक्षण मिल रहा है।

पद के दुरुपयोग का मामला

अब यह मामला सरकारी सेवा नियमों यानी सिविल सेवा आचरण का बन गया है। कल्पना वर्मा को फरवरी 2026 में सस्पेंड कर दिया गया। दीपक टंडन ने कल्पना वर्मा पर 2 करोड़ रुपए लेने का आरोप लगाया है। कल्पना वर्मा इन आरोपों को साजिश बता चुकी हैं। वे कहती हैं कि आरोप बेबुनियाद है। उन्होंने कहा कि यह मामला उनके पिता और टंडन के बीच पुराने कारोबारी लेनदेन से जुड़ा है। जहां तक कार की बात है तो यह उन्होंने कानूनी रुप से खरीदी है जिसके कागज भी उनके पास हैं।

FAQ

  1. कल्पना वर्मा मामले में जांच रिपोर्ट में क्या खुलासा हुआ है?
    जांच रिपोर्ट में दीपक टंडन और कल्पना वर्मा के बीच करीब 2 करोड़ रुपए के लेन-देन, गिफ्ट और बैंक ट्रांजेक्शन का जिक्र है।
  2. कल्पना वर्मा पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
    उन पर महंगे गिफ्ट लेने, करोड़ों रुपए के लेन-देन और पद के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए हैं। कल्पना वर्मा ने आरोपों को साजिश बताया है।
  3. जांच रिपोर्ट आने के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
    1482 पन्नों की रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय भेजी जा चुकी है। इसके बाद कार्रवाई में देरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

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