रायपुर वन विभाग की बड़ी कार्रवाई: खैर लकड़ी का गोदाम सील
Aishwarya Dwivedi | Jul 15, 2026, 16:29 IST
khair-wood-smuggling-fake-tp-scam
रायपुर के तेंदुआ गांव में वन विभाग ने फर्जी ट्रांजिट परमिट (TP) से चल रहे लकड़ी तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ कर 80 टन खैर लकड़ी जब्त की। मुख्य आरोपी मनीष अग्रवाल फिलहाल फरार है।
समझें क्या है पूरा मामला
रायपुर में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई
विभाग ने वहां से करीब 80 टन खैर लकड़ी जब्त की है। जब्त की गई लकड़ी की कीमत लगभग 20 से 25 लाख रुपये है। इस मामले में पुलिस ने गोदाम के मुंशी इमरान खान को गिरफ्तार किया है। हालांकि, मुख्य आरोपी मनीष अग्रवाल अभी भी फरार है।
फर्जी टीपी से चल रहा था तस्करी का खेल
तस्कर कंप्यूटर ऑपरेटर की मदद से असली जैसी दिखने वाली टीपी बनाते थे। इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर गाड़ियां चेकपोस्ट पार कर जाती थीं। इस फर्जीवाड़े से वन विभाग के अधिकारी भी हैरान हैं।
क्यूआर कोड की जांच न होना बना वरदान
लेकिन चेकपोस्ट पर इस कोड को जांचने के लिए स्कैनर मौजूद नहीं हैं। इसके अलावा कई कर्मचारियों को कंप्यूटर प्रणाली की पूरी जानकारी नहीं है। तस्कर इसी कमी का फायदा उठाकर गाड़ियां पार करा देते थे।
पुराना अपराधी है आरोपी मनीष अग्रवाल
उसके खिलाफ रायगढ़, जांजगीर, रायपुर और माना थानों में केस दर्ज हैं। वह अलग-अलग नौ मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करता था। कार्रवाई के समय उसके सभी नंबर बंद मिले। मुंशी के मोबाइल से फर्जी टीपी के चैट मिले हैं।
रायपुर वन विभाग की बड़ी कार्रवाई
पहले भी जेल जा चुका है आरोपी
उस मामले में मनीष को जेल भी भेजा गया था। कुछ महीने पहले एक राइस मिल से भी अवैध लकड़ी मिली थी। उस मामले में भी मनीष अग्रवाल का नाम सामने आया था।
वन्यजीव तस्करी से भी जुड़े हैं तार
भारतीय वन अधिनियम के तहत होगी कार्रवाई
ऐसे मामलों में अवैध लकड़ी और गाड़ियां जब्त की जा सकती हैं। अपराध की गंभीरता के आधार पर जुर्माना और जेल का प्रावधान है। पुलिस आरोपी की संपत्ति की भी जांच कर सकती है।
FAQ
- रायपुर में वन विभाग ने कितनी लकड़ी जब्त की है?
Ans: वन विभाग ने रायपुर के तेंदुआ गांव से करीब 80 टन प्रतिबंधित खैर लकड़ी जब्त की है। इसकी अनुमानित बाजार कीमत लगभग 20 से 25 लाख रुपये आंकी गई है। - खैर लकड़ी तस्करी के लिए आरोपी किस तकनीक का इस्तेमाल कर रहे थे?
Ans: आरोपी तस्करी के लिए कंप्यूटर ऑपरेटर की मदद से फर्जी टीपी तैयार करते थे। चेकपोस्ट पर स्कैनर न होने के कारण यह फर्जी टीपी आसानी से असली मान ली जाती थी। - भारतीय वन अधिनियम किस वर्ष पारित किया गया था और इसके तहत क्या प्रावधान हैं?
Ans: भारतीय वन अधिनियम वर्ष 1927 में पारित किया गया था। यह कानून वनों के प्रबंधन, पारगमन (Transit) और वन उपज के अवैध परिवहन पर नियंत्रण लगाने के साथ-साथ उल्लंघन करने पर सख्त सजा और जब्ती का प्रावधान करता है।
यह खबरें भी पढ़ें...
जंगल बचाने से ज्यादा ट्रेनिंग पर खर्च! एमपी वन विभाग के बजट पर उठे सवाल
50 करोड़ के चरण पादुका टेंडर पर हाईकोर्ट की रोक, वन विभाग पर सवाल
कोरबा में पकड़े गए 50 से अधिक किंग कोबरा, वन विभाग ने बनाया रिकॉर्ड
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
By Sanjay Dhiman