पूर्व आबकारी कमिश्नर निरंजन दास को जमानत, लेकिन छत्तीसगढ़ से रहना होगा बाहर
Harrison Masih | May 25, 2026, 17:23 IST
liquor-scam-niranjan-das-gets-bail-supreme-court
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 3200 करोड़ के शराब घोटाले मामले में पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें राज्य से बाहर रहने की शर्त पर राहत दी है। मामले में पहले अनिल टुटेजा, एपी त्रिपाठी और सौम्या चौरसिया को भी जमानत मिल चुकी है।
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले मामले में पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने शराब नीति घोटाले से जुड़े दो मामलों में उन्हें जमानत दे दी। हालांकि अदालत ने साफ किया कि जमानत के बाद भी निरंजन दास छत्तीसगढ़ में नहीं रह सकेंगे। उन्हें केवल जांच और ट्रायल में शामिल होने के लिए ही राज्य में आने की अनुमति होगी।
करीब दो वर्षों से जेल में बंद निरंजन दास पर आरोप है कि उन्होंने कथित शराब सिंडिकेट, अवैध कमीशनखोरी और आबकारी नीति में हेरफेर के जरिए करोड़ों रूपए के घोटाले में अहम भूमिका निभाई। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह कथित घोटाला वर्ष 2019 से 2022 के बीच तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान अंजाम दिया गया।
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने की। अदालत ने मुख्य शराब घोटाला मामले से जुड़े दो अलग-अलग केस और संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में निरंजन दास को राहत प्रदान की।
पीठ ने कहा कि जांच एजेंसियों के अनुसार निरंजन दास को इस पूरे मामले का “मुख्य सूत्रधार” बताया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने ऐसी आबकारी नीति तैयार करने में भूमिका निभाई जिससे सह-आरोपियों को आर्थिक लाभ पहुंच सके।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि निरंजन दास (Niranjan Das) को दो अलग-अलग मामलों में क्रमशः 18 सितंबर 2025 और 19 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने उन पर वही जमानत शर्तें लागू की हैं, जो अन्य सह-आरोपियों पर लागू हैं।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो निरंजन दास जमानत की शर्तों में ढील देने की मांग कर सकते हैं।
इससे पहले इस मामले में IAS अधिकारी अनिल टुटेजा और एपी त्रिपाठी को भी जमानत मिल चुकी है। वहीं, पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री कार्यालय की उप सचिव रहीं सौम्या चौरसिया को भी मार्च में हाईकोर्ट से राहत मिली थी।
इन लगातार जमानतों के बाद अब शराब घोटाले की जांच और कानूनी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।
आखिर क्या है
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच फिलहाल ED और आर्थिक अपराध अन्वेषण एजेंसियां कर रही हैं। ED की शिकायत के आधार पर ACB में FIR दर्ज की गई थी। जांच एजेंसियों ने दावा किया है कि इस पूरे घोटाले में 3200 करोड़ रूपए से ज्यादा की अनियमितता हुई।
जांच में आरोप लगाया गया कि तत्कालीन सरकार के दौरान IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के कथित सिंडिकेट ने मिलकर इस नेटवर्क को संचालित किया।
जांच एजेंसियों के मुताबिक घोटाले का पहला हिस्सा A मॉडल था। इसमें डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी शराब पर कमीशन लिया जाता था।
बताया गया कि शुरुआती दौर में प्रति पेटी 75 रूपए और बाद में 100 रूपए तक वसूले गए। आरोप है कि बदले में शराब की कीमतें बढ़ाने और ओवरबिलिंग की छूट देकर डिस्टलरी मालिकों को फायदा पहुंचाया गया।
घोटाले का सबसे चर्चित हिस्सा “B मॉडल” माना गया। जांच एजेंसियों का दावा है कि अतिरिक्त शराब तैयार कर उस पर नकली होलोग्राम लगाए गए और फिर सरकारी दुकानों से उसकी बिक्री कराई गई।
इस मामले में होलोग्राम सप्लायर विधु गुप्ता का नाम भी सामने आया। वहीं खाली बोतलों और ट्रांसपोर्ट की जिम्मेदारी कथित तौर पर अरविंद सिंह और उनके भतीजे अमित सिंह को दी गई थी।
जांच में दावा किया गया कि राज्य के 15 जिलों को इस अवैध शराब की खपत के लिए चिन्हित किया गया था। दुकानदारों को कथित तौर पर निर्देश दिए गए कि इस बिक्री का रिकॉर्ड सरकारी दस्तावेजों में दर्ज न किया जाए।
एजेंसियों के अनुसार शुरुआत में प्रति पेटी शराब की MRP 2880 रूपए रखी गई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 3840 रूपए तक किया गया। डिस्टलरी मालिकों को शुरुआत में 560 रूपए और बाद में 600 रूपए प्रति पेटी दिए जाने की बात भी जांच में सामने आई।
ACB का दावा है कि जांच में 40 लाख पेटी से अधिक शराब की बिक्री के साक्ष्य मिले हैं।
घोटाले के तीसरे हिस्से को “C मॉडल” कहा गया। इसमें देशी शराब की दुकानों को अलग-अलग जोन में बांटकर टेंडर प्रक्रिया में कथित हेरफेर किया गया। जांच एजेंसियों के मुताबिक सप्लाई जोन तय करने में कमीशन का खेल चलता था।
आरोप है कि एपी त्रिपाठी द्वारा जोन आधारित विश्लेषण उपलब्ध कराया जाता था ताकि क्षेत्रों को घटा-बढ़ाकर अवैध उगाही की जा सके। EOW जांच में तीन वित्तीय वर्षों के दौरान देशी शराब सप्लाई के नाम पर 52 करोड़ रूपए की अवैध वसूली के साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है।
छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला राज्य के सबसे चर्चित मामलों में शामिल हो चुका है। एक ओर जांच एजेंसियां इसे बड़े आर्थिक घोटाले के रूप में पेश कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर आरोपियों की ओर से राजनीतिक बदले की कार्रवाई का दावा किया जाता रहा है।
अब सुप्रीम कोर्ट से निरंजन दास को मिली राहत के बाद इस मामले की कानूनी और राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज होने की संभावना है।
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: पूर्व IAS निरंजन दास ने कमाए 16 करोड़, सरकार को हुआ 530 करोड़ का नुकसान
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में बड़ी कार्रवाई: रिटायर्ड IAS निरंजन दास गिरफ्तार
CG liquor scam: रिटायर्ड IAS निरंजन दास और कारोबारी यश पुरोहित की रिमांड बढ़ी,EOW की जांच जारी
अनिल टुटेजा और निरंजन दास जेल में बंद, रानू साहू और सौम्या चौरसिया जमानत पर, भ्रष्टाचार के खेल की सीएम साय ने दी जानकारी
करीब दो वर्षों से जेल में बंद निरंजन दास पर आरोप है कि उन्होंने कथित शराब सिंडिकेट, अवैध कमीशनखोरी और आबकारी नीति में हेरफेर के जरिए करोड़ों रूपए के घोटाले में अहम भूमिका निभाई। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह कथित घोटाला वर्ष 2019 से 2022 के बीच तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान अंजाम दिया गया।
चीफ जस्टिस की पीठ ने सुनाया फैसला
पीठ ने कहा कि जांच एजेंसियों के अनुसार निरंजन दास को इस पूरे मामले का “मुख्य सूत्रधार” बताया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने ऐसी आबकारी नीति तैयार करने में भूमिका निभाई जिससे सह-आरोपियों को आर्थिक लाभ पहुंच सके।
गिरफ्तारी की टाइमलाइन भी कोर्ट ने बताई
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो निरंजन दास जमानत की शर्तों में ढील देने की मांग कर सकते हैं।
पहले भी बड़े आरोपियों को मिल चुकी है राहत
इन लगातार जमानतों के बाद अब शराब घोटाले की जांच और कानूनी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।
आखिर क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला ?
ED और ACB की जांच में सामने आया 3200 करोड़ का दावा
जांच में आरोप लगाया गया कि तत्कालीन सरकार के दौरान IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के कथित सिंडिकेट ने मिलकर इस नेटवर्क को संचालित किया।
A मॉडल: डिस्टलरी से कमीशन वसूली
बताया गया कि शुरुआती दौर में प्रति पेटी 75 रूपए और बाद में 100 रूपए तक वसूले गए। आरोप है कि बदले में शराब की कीमतें बढ़ाने और ओवरबिलिंग की छूट देकर डिस्टलरी मालिकों को फायदा पहुंचाया गया।
B मॉडल: नकली होलोग्राम से शराब बिक्री
इस मामले में होलोग्राम सप्लायर विधु गुप्ता का नाम भी सामने आया। वहीं खाली बोतलों और ट्रांसपोर्ट की जिम्मेदारी कथित तौर पर अरविंद सिंह और उनके भतीजे अमित सिंह को दी गई थी।
जांच में दावा किया गया कि राज्य के 15 जिलों को इस अवैध शराब की खपत के लिए चिन्हित किया गया था। दुकानदारों को कथित तौर पर निर्देश दिए गए कि इस बिक्री का रिकॉर्ड सरकारी दस्तावेजों में दर्ज न किया जाए।
40 लाख पेटी शराब बिक्री का दावा
ACB का दावा है कि जांच में 40 लाख पेटी से अधिक शराब की बिक्री के साक्ष्य मिले हैं।
C मॉडल: सप्लाई जोन में खेल और अवैध उगाही
आरोप है कि एपी त्रिपाठी द्वारा जोन आधारित विश्लेषण उपलब्ध कराया जाता था ताकि क्षेत्रों को घटा-बढ़ाकर अवैध उगाही की जा सके। EOW जांच में तीन वित्तीय वर्षों के दौरान देशी शराब सप्लाई के नाम पर 52 करोड़ रूपए की अवैध वसूली के साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है।
राजनीतिक और कानूनी लड़ाई अब भी जारी
अब सुप्रीम कोर्ट से निरंजन दास को मिली राहत के बाद इस मामले की कानूनी और राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज होने की संभावना है।
यह खबरें भी पढ़ें...
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में बड़ी कार्रवाई: रिटायर्ड IAS निरंजन दास गिरफ्तार
CG liquor scam: रिटायर्ड IAS निरंजन दास और कारोबारी यश पुरोहित की रिमांड बढ़ी,EOW की जांच जारी
अनिल टुटेजा और निरंजन दास जेल में बंद, रानू साहू और सौम्या चौरसिया जमानत पर, भ्रष्टाचार के खेल की सीएम साय ने दी जानकारी
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari