NEET-UG Paper Leak : कई सरगना, भूपेश बोले, cbse अध्यक्ष और सचिव का ट्रांसफर हेडलाइन मैनेजमेंट
Arun Tiwari | Jun 03, 2026, 16:50 IST
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नीट-यूजी 2026 पेपर लीक और सीबीएसई ओएसएम विवाद पर सियासी पारा गर्म है। विपक्ष ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए अधिकारियों के तबादले को 'हेडलाइन मैनेजमेंट' बताया है।
RAIPUR : देश में इन दिनों नीट पेपर लीक (neet ug paper leak) और सीबीएसई ओएसएम विवाद को लेकर युवा नाराज हैं। वहीं इस मुद्दे पर सियासी पारा भी चढ़ गया है। लोग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाने की मांग कर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है। भूपेश बघेल ने कहा कि सरकार सिर्फ हैडलाइन मैनेजमेंट कर रही है।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर मेहरबानी क्यों हो रही है, इस खेल में कई सरगना शामिल हैं। ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सेवाओं की खरीद को लेकर उठे विवाद के बीच केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। बोर्ड के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया गया है। वहीं, OSM सेवाओं की खरीद प्रक्रिया से जुड़े मामलों की जांच के लिए एक समिति का गठन किया गया है, जो पूरे प्रकरण की पड़ताल करेगी।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बघेल ने एक्स पर लिखा कि जब NEET-UG पेपर लीक के लिए छात्र सीधे तौर पर शिक्षा मंत्री को जिम्मेदार मान रहे हैं। जब छात्रों समेत पूरा देश शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांग रहा है। तब CBSE अध्यक्ष और सचिव का ट्रांसफ़र केवल और केवल हेडलाइन मैनेजमेंट का तमाशा है। नैतिकता नाम की चीज निर्लज्ज मोदी सरकार को छूकर भी नहीं निकलती है। इस खेल में धर्मेंद्र प्रधान को लगातार बचाना, लगता है कि इस खेल में कई सरगना हैं। ताश के पत्तों की ये इमारत GEN-Z ही खिसकाएँगे, आप देखते जाइए।
राहुल ने बताया लीपापोती :
CBSE अध्यक्ष - ट्रांसफ़र।
CBSE सचिव - ट्रांसफ़र।
एक-सदस्यीय “जाँच” समिति - गठित।
और असल ज़िम्मेदार, धर्मेंद्र प्रधान - सुरक्षित। अधिकारियों को हटा दिया। मंत्री को बचा लिया। यह जवाबदेही नहीं - यह cover-up है। हमारी माँग आज भी वही है, शिक्षा मंत्री को बर्ख़ास्त किया जाए और स्वतंत्र न्यायिक जाँच हो । ये मांगें कोई मोदी सरकार की एक महीने पुरानी अंदरूनी फ़ाइल नहीं जो यूं ही भुला दी जाए।
अगर प्रधानमंत्री को 18.5 लाख CBSE छात्रों की परवाह होती तो धर्मेंद्र प्रधान जी कब के हटाए जा चुके होते।
विपक्ष के गंभीर आरोप :
विपक्ष का आरोप है कि केवल अधिकारियों के तबादले से मामले की गंभीरता कम नहीं हो जाती। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदारी तय कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
वहीं केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियां जांच प्रक्रिया पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रही हैं। नीट-यूजी पेपर लीक और OSM विवाद ने देश की परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा जगत की नजर अब जांच के नतीजों और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
NEET-UG पेपर लीक मामला देश की मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 से जुड़ा विवाद है, जिसमें आरोप लगे कि परीक्षा से पहले कुछ अभ्यर्थियों और बिचौलियों तक प्रश्नपत्र या उससे मिलते-जुलते प्रश्न पहुंच गए थे। मामले की शुरुआत तब हुई जब परीक्षा के बाद कुछ राज्यों में छात्रों और अभिभावकों ने दावा किया कि परीक्षा से पहले प्रसारित किए गए तथाकथित गेस पेपर के कई सवाल वास्तविक प्रश्नपत्र से मेल खाते थे। इसके बाद जांच शुरू हुई और राजस्थान एसओजी तथा बाद में सीबीआई ने मामले की जांच अपने हाथ में ली।
जांच एजेंसियों के अनुसार, प्रश्नपत्र लीक कराने और अभ्यर्थियों तक पहुंचाने के लिए एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। इस मामले में कई लोगों की गिरफ्तारी हुई, जिनमें कोचिंग संस्थानों से जुड़े लोग, बिचौलिए और कथित सरगना शामिल बताए गए हैं। जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले किस स्तर पर बाहर आया और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे।
CBSE का OSM (ऑन स्क्रीन मार्किंग) विवाद बोर्ड की उत्तरपुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन से जुड़ी सेवाओं की खरीद प्रक्रिया को लेकर सामने आया है।
OSM यानी On-Screen Marking ऐसी व्यवस्था है जिसमें परीक्षक उत्तरपुस्तिकाओं को डिजिटल रूप में कंप्यूटर स्क्रीन पर जांचते हैं। CBSE हर साल लाखों कॉपियों के मूल्यांकन के लिए इस तरह की तकनीकी सेवाएं लेता है।
विवाद तब शुरू हुआ जब OSM सेवाओं की खरीद प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और प्रक्रियागत सवालों की शिकायतें सामने आईं। इसके बाद मामले ने प्रशासनिक और राजनीतिक रूप ले लिया। विवाद के बीच CBSE के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया गया। इसके साथ ही CBSE ने OSM सेवाओं की खरीद प्रक्रिया की जांच के लिए एक समिति गठित की है। समिति को यह जांचने का जिम्मा दिया गया है कि खरीद प्रक्रिया में सभी नियमों और प्रक्रियाओं का पालन हुआ था या नहीं तथा कहीं कोई अनियमितता तो नहीं हुई।
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शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर मेहरबानी क्यों हो रही है, इस खेल में कई सरगना शामिल हैं। ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सेवाओं की खरीद को लेकर उठे विवाद के बीच केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। बोर्ड के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया गया है। वहीं, OSM सेवाओं की खरीद प्रक्रिया से जुड़े मामलों की जांच के लिए एक समिति का गठन किया गया है, जो पूरे प्रकरण की पड़ताल करेगी।
प्रधान पर मेहरबानी क्यों :
राहुल ने बताया लीपापोती :
CBSE अध्यक्ष - ट्रांसफ़र।
CBSE सचिव - ट्रांसफ़र।
एक-सदस्यीय “जाँच” समिति - गठित।
और असल ज़िम्मेदार, धर्मेंद्र प्रधान - सुरक्षित। अधिकारियों को हटा दिया। मंत्री को बचा लिया। यह जवाबदेही नहीं - यह cover-up है। हमारी माँग आज भी वही है, शिक्षा मंत्री को बर्ख़ास्त किया जाए और स्वतंत्र न्यायिक जाँच हो । ये मांगें कोई मोदी सरकार की एक महीने पुरानी अंदरूनी फ़ाइल नहीं जो यूं ही भुला दी जाए।
अगर प्रधानमंत्री को 18.5 लाख CBSE छात्रों की परवाह होती तो धर्मेंद्र प्रधान जी कब के हटाए जा चुके होते।
विपक्ष के गंभीर आरोप :
विपक्ष का आरोप है कि केवल अधिकारियों के तबादले से मामले की गंभीरता कम नहीं हो जाती। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदारी तय कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
वहीं केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियां जांच प्रक्रिया पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रही हैं। नीट-यूजी पेपर लीक और OSM विवाद ने देश की परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा जगत की नजर अब जांच के नतीजों और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
ये है नीट पेपर लीक मामला :
जांच एजेंसियों के अनुसार, प्रश्नपत्र लीक कराने और अभ्यर्थियों तक पहुंचाने के लिए एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। इस मामले में कई लोगों की गिरफ्तारी हुई, जिनमें कोचिंग संस्थानों से जुड़े लोग, बिचौलिए और कथित सरगना शामिल बताए गए हैं। जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले किस स्तर पर बाहर आया और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे।
ये है सीबीएसई विवाद :
OSM यानी On-Screen Marking ऐसी व्यवस्था है जिसमें परीक्षक उत्तरपुस्तिकाओं को डिजिटल रूप में कंप्यूटर स्क्रीन पर जांचते हैं। CBSE हर साल लाखों कॉपियों के मूल्यांकन के लिए इस तरह की तकनीकी सेवाएं लेता है।
विवाद तब शुरू हुआ जब OSM सेवाओं की खरीद प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और प्रक्रियागत सवालों की शिकायतें सामने आईं। इसके बाद मामले ने प्रशासनिक और राजनीतिक रूप ले लिया। विवाद के बीच CBSE के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया गया। इसके साथ ही CBSE ने OSM सेवाओं की खरीद प्रक्रिया की जांच के लिए एक समिति गठित की है। समिति को यह जांचने का जिम्मा दिया गया है कि खरीद प्रक्रिया में सभी नियमों और प्रक्रियाओं का पालन हुआ था या नहीं तथा कहीं कोई अनियमितता तो नहीं हुई।
TIMELINE
- धर्मेंद्र प्रधान (केंद्रीय शिक्षा मंत्री): विपक्ष और छात्र सीधे तौर पर इन्हें जिम्मेदार मानकर इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
- भूपेश बघेल (पूर्व मुख्यमंत्री) और राहुल गांधी: सरकार पर "हेडलाइन मैनेजमेंट" और "लीपापोती (Cover-up)" का आरोप लगा रहे हैं।
- राहुल सिंह (CBSE चेयरमैन) और हिमांशु गुप्ता (CBSE सचिव): विवाद के बीच इनका ट्रांसफर कर दिया गया है।
- जांच एजेंसियां (SOG और CBI): पेपर लीक के संगठित नेटवर्क और सरगनाओं की तलाश में जुटी हैं।
FAQ
- NEET-UG का पूरा नाम क्या है और यह परीक्षा कौन आयोजित कराता है?
उत्तर: NEET-UG का पूरा नाम National Eligibility cum Entrance Test (Undergraduate) है। देश में यह परीक्षा NTA (National Testing Agency) द्वारा मेडिकल (MBBS/BDS आदि) पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित की जाती है। - CBSE का पूरा नाम क्या है
CBSE का पूरा नाम Central Board of Secondary Education (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) है। - NEET-UG पेपर लीक मामले की जांच देश की कौन सी मुख्य एजेंसियां कर रही हैं?
उत्तर: शुरुआत में इसकी जांच राजस्थान SOG (Special Operations Group) ने की थी, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए अब इसकी मुख्य जांच CBI (Central Bureau of Investigation) कर रही है। - "GEN-Z" (जेन-ज़ी) का क्या अर्थ है?
उत्तर: यह मध्य-1990 के दशक से लेकर 2010 के दशक की शुरुआत के बीच पैदा हुई आज की युवा पीढ़ी को दर्शाता है। भूपेश बघेल ने अपने बयान में इसी युवा छात्र पीढ़ी का जिक्र किया है।
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