कुपोषित बच्चे को सिर्फ 25 रुपए का पोषण, इसमें मिलेगा 1 पाव दूध और 100 ग्राम दाल
Arun Tiwari | Jun 16, 2026, 13:19 IST
भारत में कुपोषण पर NFHS 6 की रिपोर्ट 2026
देश में कुपोषण के खिलाफ सरकारें हर साल हजारों करोड़ रुपये खर्च कर रही हैं। आंगनबाड़ी सेवाएं, पोषण अभियान, सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0, टेक-होम राशन और पूरक पोषण जैसी योजनाओं पर लगातार फंड बढ़ रहा है। इसके बावजूद लाखों बच्चे आज भी कुपोषण से जूझ रहे हैं।
समझें क्या है पूरा मामला
- देश में लगा कुपोषण का कलंक
- एमपी,छत्तीसगढ़,राजस्थान में हालत खराब
- लाखों की संख्या में हैं अंडरवेट बच्चे
- ठिंगनापन कम हो रहा है लेकिन वजन नहीं बढ़ा
- एक बच्चे के पोषण पर रोजाना 25 रुपए खर्च
सरकार कुपोषण दूर करने के लिए एक बच्चे को रोजाना 25 रुपए का पौष्टिक आहार दे रही है। अब इस राशि में तो एक पाव दूध, 100 ग्राम दाल या कुछ फल और सब्जी आ सकती है। जबकि कुपोषित बच्चे तो हर दिन निर्धारित मात्रा में प्रोटीन,विटामिन,मिनरल्स समेत सभी पोषक तत्वों से भरपूर खाना चाहिए।
इस थाली की कीमत बाजार भाव के हिसाब से कम से कम 100 रुपए तक होगी। यह आंकलन हम सिर्फ पोषण आहार के फंड के आधार पर कर रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकार की ओर से कुपोषण के लिए कई तरह के फंड आते हैं। कुपोषण की ताजा स्थिति हाल ही में जारी हुई एनएफएचएस 6 की ताजा रिपोर्ट में आई है। रिपोर्ट में 5 साल तक के बच्चों की गणना की गई है।
यह हैं मध्यप्रदश के हालात :
- 5 साल तक की उम्र के हिसाब से ठिंगने बच्चों की संख्या 31 फीसदी है जो साल 2019-21 के 35.7 फीसदी से कम हुई है।
- प्रदेश में कम लंबाई के बच्चों की संख्या 18 से 19 लाख है।
- लंबाई के हिसाब से कम वजन के बच्चों की संख्या 23.8 फीसदी है जो साल 2019-21 के 18.9 फीसदी से बढ़ गई है।
- लंबाई के हिसाब से कम वजन के बच्चों की संख्या 13-14 लाख है।
- गंभीर कुपोषित बच्चों की संख्या 6.8 है जो साल 2019-21 के 6.5 फीसदी से बढ़ गई है। हालांकि यह बढ़त मामूली है।
- गंभीर कुपोषित बच्चों की संख्या 4 लाख है।
- उम्र के हिसाब से जिन बच्चों का वजन कम है, वे 39.7 फीसदी हैं। यह साल 2019-21 के 33 फीसदी थे। इसमें बड़ा इजाफा हुआ है।
- उम्र के हिसाब से अंडरवेट बच्चों की संख्या 23-24 लाख है।
- मध्यप्रदेश में लगभग 60 लाख बच्चे कुपोषित हैं।
- राज्य सरकार के अनुसार 2026-27 में सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 के लिए लगभग ₹3,768 करोड़ का प्रावधान।
यह है छत्तीसगढ़ की स्थिति :
- 5 साल तक की उम्र के हिसाब से ठिंगने बच्चों की संख्या 27.5 फीसदी है जो साल 2019-21 के 34.6 फीसदी से कम हुई है।
- प्रदेश में कम लंबाई के बच्चों की संख्या 8.5 से 8.7 लाख है।
- लंबाई के हिसाब से कम वजन के बच्चों की संख्या 21.1 फीसदी है जो साल 2019-21 के 18.9 फीसदी से बढ़ गई है।
- लंबाई के हिसाब से कम वजन के बच्चों की संख्या 4.6 से 4.8 लाख है।
- गंभीर कुपोषित बच्चों की संख्या 6.9 फीसदी है जो साल 2019-21 के 7.5 फीसदी से कम हो गई है।
- गंभीर कुपोषित बच्चों की संख्या 2 लाख है।
- उम्र के हिसाब से जिन बच्चों का वजन कम है, वे 34.7 फीसदी हैं। यह साल 2019-21 के 31.3 फीसदी था। इसमें इजाफा हुआ है।
- उम्र के हिसाब से अंडरवेट बच्चों की संख्या 8 लाख है।
- छत्तीसगढ़ में लगभग 24 लाख बच्चे कुपोषित हैं।
- राज्य सरकार के अनुसार 2026-27 में आंगनबाड़ी एवं पोषण संबंधी योजनाओं के लिए ₹2,320 करोड़ करोड़ का प्रावधान।
यह है राजस्थान के हालात :
- 5 साल तक की उम्र के हिसाब से ठिंगने बच्चों की संख्या 29.6 फीसदी है जो साल 2019-21 के 31.8 फीसदी से कम हुई है।
- प्रदेश में कम लंबाई के बच्चों की संख्या 15 लाख है।
- लंबाई के हिसाब से कम वजन के बच्चों की संख्या 31.8 फीसदी है जो साल 2019-21 के 16.8 फीसदी से बढ़ गई है।
- लंबाई के हिसाब से कम वजन के बच्चों की संख्या 8 लाख है।
- गंभीर कुपोषित बच्चों की संख्या 6.4 फीसदी है जो साल 2019-21 के 7.6 फीसदी से कम हो गई है।
- गंभीर कुपोषित बच्चों की संख्या 3.5 लाख है।
- उम्र के हिसाब से जिन बच्चों का वजन कम है वे 33.3 फीसदी हैं। यह साल 2019-21 के 27.6 फीसदी थे। इसमें इजाफा हुआ है।
- उम्र के हिसाब से अंडरवेट बच्चों की संख्या 13 लाख है।
- राजस्थान में लगभग 40 लाख बच्चे कुपोषित हैं।
भारत में कुपोषण
एक बच्चे के हिस्से में 20-25 रुपए का पोषण :
मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में बजट के लिहाज से देखें तो एक कुपोषित बच्चे के हिस्से में रोजाना औसतन 20 से 25 रुपए का पोषण आता है। अलग अलग देखें तो राजस्थान में प्रति बच्चा 10 रूपए, मध्यप्रदेश में 12 रूपए और छत्तीसगढ़ में 20-25 रूपए आता है। हम 25 रूपए को औसत मानकर देखते हैं इसमें यह पोषण कितना है।
25 रूपए में क्या मिल सकता है :
यदि दूध, दाल, अनाज, हरी सब्जियां, फल और पर्याप्त वसा को शामिल किया जाए तो एक सामान्य संतुलित आहार की बाजार लागत इससे काफी अधिक हो सकती है।
बच्चों के लिए जरुरी है रोजाना यह 100 रुपए की थाली :
भोजन
सुबह 1 गिलास (150–200 ml) दूध + दलिया/पोहा/उपमा
मध्याह्न 1 केला या कोई मौसमी फल
दोपहर दाल + चावल/रोटी + हरी सब्जी + थोड़ा घी
शाम भुना चना या मूंगफली या अंकुरित मूंग
रात खिचड़ी/रोटी + दाल + सब्जी + दही
यदि अंडा खाता हो
रोज 1–2 अंडे
200–300 ml दूध
दाल/चना/राजमा
मौसमी फल
हरी सब्जियां
चावल या रोटी
निष्कर्ष :
FAQ
- NFHS-6 रिपोर्ट क्या है?
NFHS-6 (National Family Health Survey-6) एक राष्ट्रीय सर्वे रिपोर्ट है, जो देश में स्वास्थ्य, पोषण और परिवार कल्याण की स्थिति को आंकती है। इसमें बच्चों और महिलाओं के पोषण, कुपोषण, टीकाकरण और स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी शामिल होती है। - बच्चों में कुपोषण की मुख्य वजह क्या है?
मुख्य वजहों में गरीबी, कम पोषण वाला भोजन और सीमित सरकारी पोषण शामिल हैं। इसके अलावा जागरूकता की कमी और स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच भी बड़ी वजह है।
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