लक्ष्य हासिल करने छह दिन में सरकार को करनी होगी 44 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी, फसल बेचने के इंतजार में 5 लाख किसान

Arun Tiwari | Jan 22, 2026, 18:09 IST
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छत्तीसगढ़ में धान खरीदी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। 31 जनवरी अंतिम तारीख होने और बीच में तीन दिन अवकाश के कारण अब केवल छह दिन ही बचे हैं। अब तक 160 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले 116 लाख टन धान की खरीदी हो पाई है।

NEWS IN SHORT

  • 31 जनवरी तक धान खरीदी की डेडलाइन, बीच में तीन दिन अवकाश, सिर्फ 6 दिन शेष।
  • 160 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले 116 लाख टन खरीदी, अब 44 लाख टन बाकी।
  • 2740 में से 1358 खरीदी केंद्रों पर बफर लिमिट से ज्यादा धान, भंडारण संकट।
  • 27 लाख पंजीकृत किसानों में से 21 लाख ने ही बेचा धान, 5.5 लाख किसान इंतजार में।
  • 27,414 करोड़ रुपये का भुगतान, लेकिन टोकन और उठाव की धीमी प्रक्रिया बनी चुनौती।

NEWS IN DETAIL

Raipur. छत्तीसगढ़ में धान की खरीदी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। 31 जनवरी खरीदी की आखिरी तारीख है। इस बीच तीन दिन 24, 25 और 26 जनवरी को अवकाश रहेगा। यानी अब सिर्फ छह दिन ही धान खरीदा जाएगा। इस साल कुल 160 लाख टन खरीदी का टारगेट रखा गया था, लेकिन अब सिर्फ 116 लाख टन की खरीदी ही हो पाई है। छह दिन में सरकार को 44 लाख मीट्रिक टन धान खरीदना है। वहीं पांच लाख किसान धान बेचने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।

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धान खरीदी बड़ी चुनौती :

छत्तीसगढ़ में एमएसपी पर धान खरीदी जारी है, लेकिन जमीनी हालात सिस्टम की रफ्तार पर भारी पड़ते नजर आ रहे हैं। खरीदी केंद्रों पर धान का उठाव नहीं होने से भंडारण की समस्या गंभीर होती जा रही है। धान का उठाव नहीं होने से प्रदेश के 2740 खरीदी केंद्रों में से 1358 केंद्रों पर धान की मात्रा तय बफर लिमिट से अधिक हो चुकी है। केंद्रों में जगह की कमी के कारण कई स्थानों पर किसानों को इंतजार करना पड़ रहा है, वहीं खरीदी प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। प्रदेश में 27 लाख पंजीकृत किसानों में से अब तक 21 लाख किसान ही अपना धान बेच पाए हैं। यानी छह दिन में साढ़े पांच लाख किसानों से धान खरीदी बड़ी चुनौती है।

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15 नवंबर से शुरु हुई धान खरीदी :

प्रदेश में धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू हुई है, जो कि 31 जनवरी 2026 तक चलेगी। अभी तक खरीदी में 21 लाख 31 हजार किसानों से 116 लाख टन धान खरीदा जा चुका है। इनमें से 66 लाख टन से ज्यादा धान खरीदी केंद्रों में रखा हुआ है। इसके एवज में किसानों को 27 हजार करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है।

वहीं दूसरी ओर पंजीयन की धीमी गति के कारण अब तक साढ़े पांच लाख से ज्यादा किसान केंद्रों तक पहुंच ही नहीं पाए हैं। जबकि लगभग तीन लाख किसानों का ऑनलाइन टोकन ही नहीं कटा है। पीएफएमएस के माध्यम से किसानों को भुगतान किया जा रहा है। अब तक लगभग 25.34 लाख प्रकरणों की फाइलें तैयार की गई हैं, जिनमें से 24.86 लाख किसानों के भुगतान की पुष्टि हो चुकी है।

केवल 47 हजार के आसपास प्रकरण ऐसे हैं, जिनमें तकनीकी या दस्तावेजी कारणों से भुगतान की पुष्टि लंबित है। राज्य में सबसे अधिक धान खरीदी और भुगतान का दायित्व जिला सहकारी केंद्रीय बैंक रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और राजनांदगांव संभाल रहे हैं। इन जिलों में धान खरीदी की मात्रा और भुगतान दोनों ही सबसे ज्यादा दर्ज किए गए हैं।

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इन जिलों में बफर स्टॉक लिमिट से ज्यादा :

बस्तर के 79 खरीदी केंद्र हैं, सभी में लिमिट बफर स्टॉक से ज्यादा है। इसी तरह दंतेवाड़ा के सभी 15 केंद्र, बीजापुर के 30 में से 26 केंद्र, कांकेर के 149 में से 134, कोंडागांव के 67 में से 65, नारायणपुर के 17 में से 16, सुकमा के 25 में से 24, बालोद के 143 में से 117, राजनांदगांव के 96 में से 86, मोहला-मानपुर के सभी 27 केंद्रों में धान बफर स्टॉक से ज्यादा है।

फैक्ट फिगर :

कुल पंजीकृत किसान : 27,43,135
इतने किसानों ने बेचा : 21,31,843
कुल खरीदी : 116 लाख टन
कितना भुगतान : 27,414 करोड़
कुल खरीदी केंद्र : 2740
जहां बफर लिमिट ज्यादा : 1358

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