पेंशनरों को मिलेगा 59 माह का एरियर, हाईकोर्ट ने खारिज की सरकार की अपील
Arun Tiwari | Jun 27, 2026, 18:02 IST
पेंशनरों को मिलेगा 59 माह का एरियर 2026
छत्तीसगढ़ के हजारों पेंशनभोगियों को बिलासपुर हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए सिंगल बेंच के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें छठवें और सातवें वेतन आयोग के तहत 59 माह के लंबित एरियर भुगतान का निर्देश दिया गया था।
छत्तीसगढ़ के हजारों पेंशनभोगियों को बड़ी राहत देते हुए बिलासपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने साफ किया कि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच वित्तीय दायित्वों को लेकर कोई भी विवाद पेंशनर्स के वैधानिक अधिकारों में बाधा नहीं बन सकता।
अदालत ने सिंगल बेंच के उस फैसले को बरकरार रखा है जिसमें छठवें और सातवें वेतन आयोग के तहत 59 माह के लंबित एरियर का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था।
इस फैसले के बाद राज्य के पेंशनरों के लिए वर्षों से लंबित एरियर मिलने पर मुहर लग गई है। हाईकोर्ट का यह निर्णय उन पेंशनर्स के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो लंबे समय से वेतन आयोग की सिफारिशों का पूरा लाभ मिलने का इंतजार कर रहे थे।
यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ पेंशनर्स समाज की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में कहा गया था कि राज्य सरकार ने छठवें और सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करते समय पुराने पेंशनर्स के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया।
सरकार द्वारा निर्धारित कट-ऑफ तिथियों के कारण बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को एरियर का पूरा लाभ नहीं मिल पाया। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि छठवें वेतन आयोग के लिए 1 सितंबर 2008 और सातवें वेतन आयोग के लिए 1 अप्रैल 2018 को कट-ऑफ तिथि निर्धारित करने से हजारों पेंशनर्स को आर्थिक नुकसान हुआ।
इसके चलते उन्हें क्रमशः 32 माह और 27 माह का एरियर नहीं मिला। दोनों अवधियों को मिलाकर कुल 59 माह का भुगतान लंबित रह गया।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत में दलील दी कि मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2000 के तहत पेंशन संबंधी वित्तीय दायित्व दोनों राज्यों के बीच बंटा हुआ है।
सरकार का कहना था कि एरियर का भुगतान करने से पहले मध्य प्रदेश सरकार की सहमति और वित्तीय हिस्सेदारी स्पष्ट होना आवश्यक है। पेंशनर्स की ओर से इस तर्क का विरोध किया गया। उनके अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि एरियर के भुगतान के लिए मध्य प्रदेश सरकार की पूर्व सहमति आवश्यक नहीं है।
यदि वित्तीय हिस्सेदारी का कोई विवाद है तो उसे दोनों राज्य आपसी स्तर पर सुलझा सकते हैं लेकिन इसका असर पेंशनर्स के अधिकारों पर नहीं पड़ना चाहिए।
इससे पहले हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के संबंधित आदेशों को असंवैधानिक और भेदभावपूर्ण माना था।
अदालत ने कहा था कि समान परिस्थितियों में कार्य करने वाले पेंशनर्स के बीच केवल कट-ऑफ तिथि के आधार पर अंतर करना संविधान के समानता के सिद्धांत के विपरीत है।
सिंगल बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि सभी पात्र पेंशनर्स को 120 दिनों के भीतर 59 माह का पूरा एरियर दिया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया था कि यदि भुगतान के बाद मध्य प्रदेश सरकार से वित्तीय हिस्सेदारी प्राप्त करनी हो तो राज्य सरकार अलग से वह प्रक्रिया अपना सकती है।
डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि दो राज्यों के बीच प्रशासनिक या वित्तीय विवाद का भार उन सेवानिवृत्त कर्मचारियों पर नहीं डाला जा सकता, जिन्होंने वर्षों तक सरकारी सेवा देकर राज्य और समाज के लिए योगदान दिया है।
अदालत ने माना कि पेंशन और उससे जुड़े वित्तीय लाभ कर्मचारियों का वैधानिक अधिकार हैं, जिन्हें अनावश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण रोका नहीं जा सकता। इसी आधार पर डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार की अपील को खारिज करते हुए सिंगल बेंच के आदेश को पूरी तरह बरकरार रखा।
हाईकोर्ट के इस फैसले से छत्तीसगढ़ के हजारों पेंशनर्स को सीधा लाभ मिलने की संभावना है। लंबे समय से लंबित एरियर के भुगतान का रास्ता साफ होने के बाद अब सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उम्मीद है कि सरकार जल्द ही न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए भुगतान की प्रक्रिया शुरू करेगी।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला केवल एरियर भुगतान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सिद्धांत भी स्थापित करता है कि प्रशासनि
क और वित्तीय विवादों के नाम पर कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वैधानिक अधिकारों को अनिश्चितकाल तक रोका नहीं जा सकता।
86 माह के एरियर्स भुगतान पर आर-पार की जंग! सीधा सरकार को घेरेगा 'एक मांग एक मंच'
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को HC ने दी बड़ी राहत, 48 महीने का एरियर्स, 6% ब्याज के साथ भुगतान के आदेश
एमपी के लाखों पेंशनर्स को 55% महंगाई राहत का अदेश जारी, एरियर्स को लेकर लगा तगड़ा झटका
90 दिन में चार्जशीट नहीं तो सस्पेंशन समाप्त! छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
अदालत ने सिंगल बेंच के उस फैसले को बरकरार रखा है जिसमें छठवें और सातवें वेतन आयोग के तहत 59 माह के लंबित एरियर का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था।
इस फैसले के बाद राज्य के पेंशनरों के लिए वर्षों से लंबित एरियर मिलने पर मुहर लग गई है। हाईकोर्ट का यह निर्णय उन पेंशनर्स के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो लंबे समय से वेतन आयोग की सिफारिशों का पूरा लाभ मिलने का इंतजार कर रहे थे।
पेंशनर्स की याचिका से शुरू हुआ मामला :
सरकार द्वारा निर्धारित कट-ऑफ तिथियों के कारण बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को एरियर का पूरा लाभ नहीं मिल पाया। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि छठवें वेतन आयोग के लिए 1 सितंबर 2008 और सातवें वेतन आयोग के लिए 1 अप्रैल 2018 को कट-ऑफ तिथि निर्धारित करने से हजारों पेंशनर्स को आर्थिक नुकसान हुआ।
इसके चलते उन्हें क्रमशः 32 माह और 27 माह का एरियर नहीं मिला। दोनों अवधियों को मिलाकर कुल 59 माह का भुगतान लंबित रह गया।
राज्य सरकार ने बताई वित्तीय परेशानी :
सरकार का कहना था कि एरियर का भुगतान करने से पहले मध्य प्रदेश सरकार की सहमति और वित्तीय हिस्सेदारी स्पष्ट होना आवश्यक है। पेंशनर्स की ओर से इस तर्क का विरोध किया गया। उनके अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि एरियर के भुगतान के लिए मध्य प्रदेश सरकार की पूर्व सहमति आवश्यक नहीं है।
यदि वित्तीय हिस्सेदारी का कोई विवाद है तो उसे दोनों राज्य आपसी स्तर पर सुलझा सकते हैं लेकिन इसका असर पेंशनर्स के अधिकारों पर नहीं पड़ना चाहिए।
सिंगल बेंच के फैसले को डिवीजन बेंच ने सही ठहराया :
अदालत ने कहा था कि समान परिस्थितियों में कार्य करने वाले पेंशनर्स के बीच केवल कट-ऑफ तिथि के आधार पर अंतर करना संविधान के समानता के सिद्धांत के विपरीत है।
सिंगल बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि सभी पात्र पेंशनर्स को 120 दिनों के भीतर 59 माह का पूरा एरियर दिया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया था कि यदि भुगतान के बाद मध्य प्रदेश सरकार से वित्तीय हिस्सेदारी प्राप्त करनी हो तो राज्य सरकार अलग से वह प्रक्रिया अपना सकती है।
डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि दो राज्यों के बीच प्रशासनिक या वित्तीय विवाद का भार उन सेवानिवृत्त कर्मचारियों पर नहीं डाला जा सकता, जिन्होंने वर्षों तक सरकारी सेवा देकर राज्य और समाज के लिए योगदान दिया है।
अदालत ने माना कि पेंशन और उससे जुड़े वित्तीय लाभ कर्मचारियों का वैधानिक अधिकार हैं, जिन्हें अनावश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण रोका नहीं जा सकता। इसी आधार पर डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार की अपील को खारिज करते हुए सिंगल बेंच के आदेश को पूरी तरह बरकरार रखा।
हजारों पेंशनर्स को मिलेगा लाभ :
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला केवल एरियर भुगतान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सिद्धांत भी स्थापित करता है कि प्रशासनि
क और वित्तीय विवादों के नाम पर कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वैधानिक अधिकारों को अनिश्चितकाल तक रोका नहीं जा सकता।
ये खबरें भी पढ़ें...
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को HC ने दी बड़ी राहत, 48 महीने का एरियर्स, 6% ब्याज के साथ भुगतान के आदेश
एमपी के लाखों पेंशनर्स को 55% महंगाई राहत का अदेश जारी, एरियर्स को लेकर लगा तगड़ा झटका
90 दिन में चार्जशीट नहीं तो सस्पेंशन समाप्त! छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari