कुलसचिव विवाद में सुप्रीम कोर्ट से डॉ. पटेल को बड़ी राहत, सरकार को झटका

VINAY VERMA | Aug 20, 2026, 16:06 IST
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PRSU रजिस्ट्रार की नियुक्ति - सुप्रीम कोर्ट
PRSU रजिस्ट्रार की नियुक्ति - सुप्रीम कोर्ट

पं. रविशंकर शुक्ल वि.वि. के प्रभारी कुलसचिव डॉ. शैलेंद्र पटेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने अनुभव की कमी के आधार पर नियुक्ति अवैध बताने वाले हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया है।

RAIPUR : पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलसचिव डॉ. शैलेंद्र कुमार पटेल की नियुक्ति को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई ने नया मोड़ ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए डॉ. पटेल को बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट के अयोग्य बताने के बाद नियुक्ति को लेकर सवाल उठने लगे थे। जिसके बाद डॉ. शैलेंद्र पटेल सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे।

योग्यता पर था पूरा विवाद

विवाद की जड़ कुलसचिव पद के लिए तय योग्यता और प्रशासनिक अनुभव से जुड़ी थी। 27 दिसंबर 2011 के गजट नोटिफिकेशन में कुलसचिव पद के लिए 15 साल का प्रशासनिक अनुभव और उसमें कम से कम 8 साल का अनुभव उपकुलसचिव या समकक्ष पद पर होना जरूरी बताया गया था। डॉ. पटेल को 2016 में उपकुलसचिव बनाया गया था। इसी आधार पर उनकी पात्रता पर सवाल खड़े किए गए।

2022 की नियुक्ति बनी सवाल

विवादित नियुक्ति के समय उनके अनुभव को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई। सवाल यह था कि जब उपकुलसचिव के पद पर नियुक्ति ही 2016 में हुई थी, तो 2022 तक अनिवार्य 8 साल का अनुभव कैसे पूरा हो गया। इसी बिंदु को लेकर नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे।

जांच समिति ने भी उठाए सवाल

2024 में राहुल गिरी गोस्वामी की ओर से डॉ. पटेल की प्रभारी कुलसचिव पद पर नियुक्ति को चुनौती दी गई। मामले की जांच के लिए समिति बनाई गई। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद समिति ने भी पात्रता को लेकर सवाल उठाए। विवाद बढ़ा तो मामला न्यायालय तक पहुंच गया।

हाईकोर्ट ने नियुक्ति को माना अवैध

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान डॉ. पटेल की ओर से दायर याचिकाओं को राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट ने पात्रता शर्तों को महत्वपूर्ण मानते हुए कहा था कि सिर्फ चयन या नियुक्ति हो जाना पद पर बने रहने का अधिकार नहीं देता, यदि उम्मीदवार निर्धारित योग्यता पूरी नहीं करता। इसके बाद उनकी नियुक्ति को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई भी हुई।

अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पलटा समीकरण

हाईकोर्ट के फैसले के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और अब सर्वाेच्च अदालत के फैसले ने पूरे विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है। डॉ. पटेल के पक्ष में आए फैसले को उनके लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है। इससे पहले नियुक्ति को लेकर जो कानूनी स्थिति बनी थी, उस पर अब नए सिरे से बहस शुरू हो गई है।

विश्वविद्यालय में बढ़ी हलचल

प्रभारी कुलसचिव की नियुक्ति का मामला केवल एक पद तक सीमित नहीं है। इसका असर विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था और उच्च शिक्षा विभाग के फैसलों पर भी पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब निगाहें इस बात पर हैं कि आदेश के आधार पर विश्वविद्यालय और राज्य सरकार आगे क्या कदम उठाते हैं।

फैसले ने खोले नए सवाल

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद डॉ. पटेल की नियुक्ति की प्रशासनिक स्थिति क्या होगी और हाईकोर्ट के पुराने फैसले का क्या प्रभाव रहेगा। फिलहाल इतना साफ है कि वर्षों से चल रहे नियुक्ति विवाद में सुप्रीम कोर्ट का फैसला एक बड़ा कानूनी मोड़ लेकर आया है।

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