राहुल गांधी का अगले चुनाव में आदिवासी एजेंडा, न हसदेव पर आरी न आदिवासी पर डंडा
Arun Tiwari | Jun 23, 2026, 16:50 IST
राहुल गांधी का आदिवासी एजेंडा
राहुल गांधी ने छत्तीसगढ़ कांग्रेस को आदिवासी मुद्दों पर फोकस करने की रणनीति दी है। हसदेव में पेड़ों की कटाई और जमीन अधिग्रहण जैसे मुद्दों पर जनआंदोलन करने के निर्देश दिए गए हैं।
Raipur : छत्तीसगढ़ का अगला विधानसभा चुनाव जीतने के लिए राहुल गांधी ने कांग्रेस को एक सूत्रीय एजेंडा दे दिया है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से साफ कहा कि न हसदेव के पेड़ कटने चाहिए और न आदिवासियों पर डंडा चलना चाहिए। आदिवासियों के समर्थन में पूरी कांग्रेस पूरी ताकत के साथ जुटेगी।
हसदेव बचाने के लिए आदिवासियों के साथ कांग्रेस आंदोलन करेगी। हसदेव बचाने के लिए राहुल गांधी भी मैदान में उतरेंगे। इस पूरे अभियान के पीछे उन आदिवासियों को कांग्रेस से जोड़ना है जो पार्टी से छिटक चुके हैं। छत्तीसगढ़ में सत्ता की चाबी आदिवासियों की जेब में ही रहती है। आदिवासियों को साथ लाने का सबसे बड़ा जरिया जल जंगल और जमीन की लड़ाई में उनका साथ देना ही हो सकता है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छत्तीसगढ़ कांग्रेस को आने वाले तीन महीनों के लिए जन आंदोलनों और जन सरोकारों पर केंद्रित व्यापक राजनीतिक कार्यक्रम का खाका दिया है। रायपुर प्रवास के दौरान कांग्रेस नेताओं और पदाधिकारियों के साथ हुई बैठकों में राहुल गांधी ने साफ कहा कि पार्टी प्रदेश में जल, जंगल और जमीन से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ बड़े औद्योगिक घरानों को लाभ पहुंचाने वाली नीतियों के खिलाफ व्यापक जनआंदोलन खड़ा करेगी।
बैठकों में प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, विधायकों, पूर्व मंत्रियों और संगठन पदाधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे भूमि अधिग्रहण, औद्योगिक परियोजनाओं, खनन गतिविधियों और आदिवासी अधिकारों से जुड़े मामलों को प्रमुखता से उठाया गया। राहुल गांधी ने कहा कि जिन क्षेत्रों में लोगों की जमीन, जंगल और प्राकृतिक संसाधनों पर संकट खड़ा हो रहा है, वहां कांग्रेस को जनता के साथ खड़े होकर संघर्ष करना चाहिए।
राहुल गांधी ने कहा कि किसी भी कीमत पर हसदेव पर अडानी की आरी नहीं चलनी चाहिए। वे खुद भी हसदेव बचाओ अभियान में शामिल हो सकते हैं। सूत्रों के अनुसार आगामी कार्यक्रमों में रायगढ़, तमनार, सरगुजा और अन्य औद्योगिक और खनन प्रभावित क्षेत्रों को विशेष फोकस में रखा जाएगा।
कांग्रेस इन इलाकों में स्थानीय लोगों के साथ मिलकर आंदोलन, जनसभाएं और जनजागरण अभियान चलाएगी। पार्टी का मानना है कि विकास के नाम पर किसानों, आदिवासियों और ग्रामीणों के अधिकारों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
छत्तीसगढ़ की 90 सदस्यीय विधानसभा में 29 सीटें अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं। राज्य की लगभग 32 फीसदी आबादी आदिवासियों की है। कांग्रेस ने 2018 के विधानसभा चुनाव में 25 आदिवासी सीटों पर जीत हासिल की थी जो इस बार यह घटकर 11 रह गई।
यही कारण है 2018 में सत्ता हासिल करने वाली कांग्रेस 2023 में सत्ता से बाहर हो गई। छत्तीसगढ़ में सत्ता की चाबी माने जाने वाली आदिवासी सीटों पर बीजेपी ने इस बार पिछले चुनाव के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया। बीजेपी ने 29 में 17 आदिवासी सीट जीती।
आदिवासी इलाकों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी प्रमुख जेपी नड्डा की रैलियां, आदिवासी इलाकों से पार्टी की दो परिवर्तन यात्राओं की शुरुआत और चुनाव पूर्व वादों ने बीजेपी के पक्ष में काम किया। अब कांग्रेस फिर से इन आदिवासियों के कोर इश्यू को उठाकर फिर से अपने पाले में लाना चाहती है। राहुल ने इसी रणनीति पर काम करने को कहा है।
राहुल गांधी ने छत्तीसगढ़ कांग्रेस को आदिवासी केंद्रित रणनीति अपनाने के निर्देश दिए हैं।
हसदेव क्षेत्र में पेड़ों की कटाई और भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन पर जोर।
जल, जंगल और जमीन से जुड़े मुद्दों को जनआंदोलन बनाने की योजना।
90 सदस्यीय विधानसभा में 29 सीटें आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित हैं।
2023 में कांग्रेस की आदिवासी सीटें 25 से घटकर 11 रह गईं।
2018 में कांग्रेस को आदिवासी क्षेत्रों में मजबूत बढ़त मिली थी।
बीजेपी ने 2023 में 29 में से 17 आदिवासी सीटें जीतकर बढ़त बनाई।
कांग्रेस का लक्ष्य आदिवासी वोट बैंक को फिर से मजबूत करना है।
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हसदेव बचाने के लिए आदिवासियों के साथ कांग्रेस आंदोलन करेगी। हसदेव बचाने के लिए राहुल गांधी भी मैदान में उतरेंगे। इस पूरे अभियान के पीछे उन आदिवासियों को कांग्रेस से जोड़ना है जो पार्टी से छिटक चुके हैं। छत्तीसगढ़ में सत्ता की चाबी आदिवासियों की जेब में ही रहती है। आदिवासियों को साथ लाने का सबसे बड़ा जरिया जल जंगल और जमीन की लड़ाई में उनका साथ देना ही हो सकता है।
सीक्रेट मीटिंग में राहुल का एजेंडा
बैठकों में प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, विधायकों, पूर्व मंत्रियों और संगठन पदाधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे भूमि अधिग्रहण, औद्योगिक परियोजनाओं, खनन गतिविधियों और आदिवासी अधिकारों से जुड़े मामलों को प्रमुखता से उठाया गया। राहुल गांधी ने कहा कि जिन क्षेत्रों में लोगों की जमीन, जंगल और प्राकृतिक संसाधनों पर संकट खड़ा हो रहा है, वहां कांग्रेस को जनता के साथ खड़े होकर संघर्ष करना चाहिए।
राहुल बचाएंगे हसदेव
कांग्रेस इन इलाकों में स्थानीय लोगों के साथ मिलकर आंदोलन, जनसभाएं और जनजागरण अभियान चलाएगी। पार्टी का मानना है कि विकास के नाम पर किसानों, आदिवासियों और ग्रामीणों के अधिकारों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
सत्ता की चाबी आदिवासी
यही कारण है 2018 में सत्ता हासिल करने वाली कांग्रेस 2023 में सत्ता से बाहर हो गई। छत्तीसगढ़ में सत्ता की चाबी माने जाने वाली आदिवासी सीटों पर बीजेपी ने इस बार पिछले चुनाव के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया। बीजेपी ने 29 में 17 आदिवासी सीट जीती।
आदिवासी इलाकों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी प्रमुख जेपी नड्डा की रैलियां, आदिवासी इलाकों से पार्टी की दो परिवर्तन यात्राओं की शुरुआत और चुनाव पूर्व वादों ने बीजेपी के पक्ष में काम किया। अब कांग्रेस फिर से इन आदिवासियों के कोर इश्यू को उठाकर फिर से अपने पाले में लाना चाहती है। राहुल ने इसी रणनीति पर काम करने को कहा है।
IMP FACTS
हसदेव क्षेत्र में पेड़ों की कटाई और भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन पर जोर।
जल, जंगल और जमीन से जुड़े मुद्दों को जनआंदोलन बनाने की योजना।
90 सदस्यीय विधानसभा में 29 सीटें आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित हैं।
2023 में कांग्रेस की आदिवासी सीटें 25 से घटकर 11 रह गईं।
2018 में कांग्रेस को आदिवासी क्षेत्रों में मजबूत बढ़त मिली थी।
बीजेपी ने 2023 में 29 में से 17 आदिवासी सीटें जीतकर बढ़त बनाई।
कांग्रेस का लक्ष्य आदिवासी वोट बैंक को फिर से मजबूत करना है।
FAQ
- राहुल गांधी का आदिवासी एजेंडा क्या है?
राहुल गांधी ने छत्तीसगढ़ कांग्रेस को निर्देश दिए हैं कि जल, जंगल और जमीन से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दी जाए। खासकर आदिवासी क्षेत्रों में हो रहे भूमि अधिग्रहण और हसदेव में पेड़ों की कटाई के खिलाफ जनआंदोलन किया जाए। - हसदेव मुद्दा क्यों अहम है?
हसदेव क्षेत्र में कोयला खनन और पेड़ों की कटाई को लेकर लंबे समय से विरोध चल रहा है। आदिवासी समुदाय इसे अपनी जमीन और पर्यावरण से जुड़ा बड़ा मुद्दा मानता है। कांग्रेस इस मुद्दे को उठाकर आदिवासियों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। - छत्तीसगढ़ की राजनीति में आदिवासियों की क्या भूमिका है?
छत्तीसगढ़ विधानसभा की 90 सीटों में 29 सीटें आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित हैं। राज्य की करीब 32% आबादी आदिवासी है, इसलिए चुनावी जीत-हार में इनका बड़ा असर होता है। यही कारण है कि सभी प्रमुख पार्टियां आदिवासी वोट बैंक पर खास ध्यान देती हैं।
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