लक्ष्मी वर्मा होंगी बीजेपी की राज्यसभा उम्मीदवार, दिल्ली के फैसले ने फिर चौंकाया
Arun Tiwari | Mar 03, 2026, 15:59 IST
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रायपुर में भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने छत्तीसगढ़ से राज्यसभा चुनाव के लिए लक्ष्मी वर्मा को उम्मीदवार घोषित किया है। लंबे समय से संगठन से जुड़ी लक्ष्मी वर्मा ने भाजपा के विभिन्न पदों पर जिम्मेदारी निभाई है।
Raipur. बीजेपी की केंद्रीय चुनाव समिति ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की आधिकारिक सूची जारी कर दी है। इस सूची में छत्तीसगढ़ से पार्टी ने अनुभवी नेत्री लक्ष्मी वर्मा को राज्यसभा के लिए अपना प्रत्याशी घोषित किया है।
पार्टी के इस फैसले को सामाजिक संतुलन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के लिहाज से देखा जा रहा है।
बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने लक्ष्मी वर्मा के नाम पर मुहर लगाते हुए एक बार फिर चौकाया है। साथ ही यह भी संदेश दिया है कि संगठन के ज़मीनी कार्यकर्ता पर उनकी नज़र है। बीजेपी नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि उम्मीदवारों के चयन में जमीनी कार्य, संगठन के प्रति निष्ठा और सामाजिक सहभागिता को प्राथमिकता दी गई है।
इन्हीं मानकों पर खरा उतरते हुए लक्ष्मी वर्मा के नाम पर मुहर लगाई गई। वे लंबे समय से पार्टी से जुड़ी रही हैं और संगठन के विभिन्न स्तरों पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन कर चुकी हैं।
बलौदाबाजार जिले के सिमगा ब्लॉक के ग्राम मुढ़पार की निवासी लक्ष्मी वर्मा का राजनीतिक सफर संघर्ष और सक्रियता से भरा रहा है। उन्होंने वर्ष 1990 में भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्य के रूप में राजनीति में कदम रखा।'
साल 2000 में उन्हें तत्कालीन रायपुर सांसद रमेश बैस का सांसद प्रतिनिधि नियुक्त किया गया। इसके बाद 2001 में उन्हें भाजपा महिला मोर्चा की कार्य समिति का सदस्य चुना गया। इस पद पर रहते हुए उन्होंने चार वर्षों तक संगठन विस्तार के लिए सक्रिय भूमिका निभाई।
वर्ष 2010 में उन्हें भाजपा पंचायती राज प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय कार्य समिति का सदस्य बनाया गया, जहाँ उन्होंने 2014 तक कार्य किया। इसी दौरान वे भाजपा महिला मोर्चा की कार्य समिति की भी सदस्य रहीं, यह जिम्मेदारी उन्होंने 2010 से 2022 तक निभाई।
लक्ष्मी वर्मा को वर्ष 2021 में भाजपा ने प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी। इस दौरान उन्हें गरियाबंद जिले का संगठन प्रभारी भी नियुक्त किया गया। साथ ही 2021 से 2024 तक वे भाजपा की प्रदेश मीडिया प्रवक्ता रहीं।
राजनीतिक संगठन के साथ-साथ लक्ष्मी वर्मा का संवैधानिक और प्रशासनिक अनुभव भी है। वर्ष 1994 में वे रायपुर नगर पालिका निगम के वार्ड क्रमांक 07 से पार्षद निर्वाचित हुईं। इसके बाद 2010 में रायपुर जिला पंचायत की अध्यक्ष के रूप में उन्होंने ग्रामीण विकास के क्षेत्र में कार्य किए।
वर्ष 2019 में उन्हें भारत सरकार के इस्पात मंत्रालय के अंतर्गत एफएसएनएल में स्वतंत्र निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया। इसके अलावा 7 अक्टूबर 2024 से वे छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य के रूप में काम कर रही हैं।
लक्ष्मी वर्मा की पहचान केवल राजनीति तक सीमित नहीं है। सामाजिक क्षेत्र में भी उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई है। वर्ष 1998 में वे शक्ति महिला मंच रायपुर की अध्यक्ष बनीं। 1999 में उन्हें नेहरू युवा केंद्र रायपुर द्वारा जिला युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
2004 में वे श्रम पुनर्वास समिति, जिला रायपुर की सदस्य मनोनीत की गईं। वर्ष 2009 से वे एकता मजदूर कल्याण संघ की प्रधान संरक्षक हैं। 2011 से वे कुटुंब न्यायालय रायपुर में परामर्शदाता सदस्य के रूप में कार्य कर रही हैं।
2014 से किसान संघर्ष समिति रायपुर, छत्तीसगढ़ की विशेष आमंत्रित सदस्य भी हैं। वर्तमान में वे अखिल भारतीय पंचायत परिषद की राष्ट्रीय महासचिव और छत्तीसगढ़ स्काउट गाइड की उपाध्यक्ष के पद पर भी कार्यरत हैं।
लक्ष्मी वर्मा (Lakshmi Verma) की मनवा कुर्मी समाज में भी मजबूत पकड़ मानी जाती है। वे 2000 से 2006 तक मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज छत्तीसगढ़ प्रदेश की महिला महामंत्री रहीं।
इसके बाद 2006 से 2008 तक प्रदेश संगठन मंत्री, 2008 से 2010 तक प्रदेश महिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाई। वर्तमान में वे अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा की महिला राष्ट्रीय महासचिव हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लक्ष्मी वर्मा को राज्यसभा उम्मीदवार बनाकर भाजपा ने संगठन, सामाजिक समीकरण और महिला नेतृत्व तीनों को साधने का प्रयास किया है।
रायपुर। बीजेपी की और से राज्यसभा की संभावित दावेदारी के बाद लक्ष्मी वर्मा ने राज्य महिला आयोग के सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र पार्टी नेतृत्व को सौंपते हुए नई जिम्मेदारियों के प्रति पूर्ण समर्पण की बात कही है।
लक्ष्मी वर्मा ने औपचारिक रूप से अपना इस्तीफा देते हुए लिखा है कि पार्टी ने उन्हें जो भी दायित्व सौंपे, उन्हें उन्होंने पूरी निष्ठा से निभाने का प्रयास किया।
हालांकि, भारतीय जनता पार्टी की और से उम्मीदवार बनने के बाद अपने पद से इस्तीफा औपचारिक प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व ने साफ संकेत दिए थे कि एक व्यक्ति एक पद की नीति के तहत उन्हें नई भूमिका से पहले वर्तमान दायित्व छोड़ना होगा।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में लक्ष्मी वर्मा का नाम पिछले कुछ दिनों से लगातार सुर्खियों में है। विभिन्न पदों पर रहने के दौरान पार्टी ने उन पर भरोसा कायम रखा और अब उन्हें उच्च सदन में भेजने की तैयारी को उसी भरोसे की कड़ी माना जा रहा है। वैसे बीजेपी की एक सीट पर जीत तय है, इस लिहाज से औपचारिक घोषणा होते ही वे जल्द ही राज्यसभा में प्रदेश का प्रतिनिधित्व करती नजर आएंगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम पार्टी के भीतर संतुलन साधने और महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है। इस्तीफा देकर लक्ष्मी वर्मा ने यह भी स्पष्ट कर दिया दिया है कि वे पार्टी लाइन के अनुरूप हर निर्णय को स्वीकार करने को तैयार हैं। अब सभी की निगाहें आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं, जो आने वाले दिनों में होगी।
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पार्टी के इस फैसले को सामाजिक संतुलन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के लिहाज से देखा जा रहा है।
संगठन को तवज्जो
इन्हीं मानकों पर खरा उतरते हुए लक्ष्मी वर्मा के नाम पर मुहर लगाई गई। वे लंबे समय से पार्टी से जुड़ी रही हैं और संगठन के विभिन्न स्तरों पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन कर चुकी हैं।
जमीनी राजनीति से राष्ट्रीय पहचान तक
साल 2000 में उन्हें तत्कालीन रायपुर सांसद रमेश बैस का सांसद प्रतिनिधि नियुक्त किया गया। इसके बाद 2001 में उन्हें भाजपा महिला मोर्चा की कार्य समिति का सदस्य चुना गया। इस पद पर रहते हुए उन्होंने चार वर्षों तक संगठन विस्तार के लिए सक्रिय भूमिका निभाई।
वर्ष 2010 में उन्हें भाजपा पंचायती राज प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय कार्य समिति का सदस्य बनाया गया, जहाँ उन्होंने 2014 तक कार्य किया। इसी दौरान वे भाजपा महिला मोर्चा की कार्य समिति की भी सदस्य रहीं, यह जिम्मेदारी उन्होंने 2010 से 2022 तक निभाई।
प्रदेश नेतृत्व में अहम भूमिका
राजनीतिक संगठन के साथ-साथ लक्ष्मी वर्मा का संवैधानिक और प्रशासनिक अनुभव भी है। वर्ष 1994 में वे रायपुर नगर पालिका निगम के वार्ड क्रमांक 07 से पार्षद निर्वाचित हुईं। इसके बाद 2010 में रायपुर जिला पंचायत की अध्यक्ष के रूप में उन्होंने ग्रामीण विकास के क्षेत्र में कार्य किए।
वर्ष 2019 में उन्हें भारत सरकार के इस्पात मंत्रालय के अंतर्गत एफएसएनएल में स्वतंत्र निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया। इसके अलावा 7 अक्टूबर 2024 से वे छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य के रूप में काम कर रही हैं।
सामाजिक क्षेत्र में पकड़
2004 में वे श्रम पुनर्वास समिति, जिला रायपुर की सदस्य मनोनीत की गईं। वर्ष 2009 से वे एकता मजदूर कल्याण संघ की प्रधान संरक्षक हैं। 2011 से वे कुटुंब न्यायालय रायपुर में परामर्शदाता सदस्य के रूप में कार्य कर रही हैं।
2014 से किसान संघर्ष समिति रायपुर, छत्तीसगढ़ की विशेष आमंत्रित सदस्य भी हैं। वर्तमान में वे अखिल भारतीय पंचायत परिषद की राष्ट्रीय महासचिव और छत्तीसगढ़ स्काउट गाइड की उपाध्यक्ष के पद पर भी कार्यरत हैं।
समाज में भूमिका
इसके बाद 2006 से 2008 तक प्रदेश संगठन मंत्री, 2008 से 2010 तक प्रदेश महिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाई। वर्तमान में वे अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा की महिला राष्ट्रीय महासचिव हैं।
भाजपा के लिए रणनीतिक चयन
राज्यसभा उम्मीदवारी के बाद लक्ष्मी वर्मा का इस्तीफा
लक्ष्मी वर्मा ने औपचारिक रूप से अपना इस्तीफा देते हुए लिखा है कि पार्टी ने उन्हें जो भी दायित्व सौंपे, उन्हें उन्होंने पूरी निष्ठा से निभाने का प्रयास किया।
हालांकि, भारतीय जनता पार्टी की और से उम्मीदवार बनने के बाद अपने पद से इस्तीफा औपचारिक प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व ने साफ संकेत दिए थे कि एक व्यक्ति एक पद की नीति के तहत उन्हें नई भूमिका से पहले वर्तमान दायित्व छोड़ना होगा।
राजनीति में बढ़ती सक्रियता
महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाया
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