जुर्माना न भरने से रायपुर क्रिकेट स्टेडियम पर लगा ताला
Aishwarya Dwivedi | Jul 11, 2026, 12:35 IST
रायपुर क्रिकेट स्टेडियम पर ताला और जुर्माना
एनजीटी ने नियमों की अनदेखी पर रायपुर समेत देश के तीन बड़े क्रिकेट स्टेडियमों में खेल पर रोक लगा दी है। रायपुर में सवा लाख का जुर्माना न भरने से यह नौबत आई।
समझें क्या है पूरा मामला
पर्यावरण नियमों की अनदेखी पड़ी भारी
जिन स्टेडियमों पर यह गाज गिरी है उनके नाम भी सामने आए हैं। इनमें छत्तीसगढ़ के रायपुर का वीर नारायण सिंह इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम शामिल है। इसके साथ ही राजस्थान के जयपुर का सवाई मानसिंह स्टेडियम भी इसमें शामिल है। महाराष्ट्र के मुंबई का डीवाई पाटिल स्टेडियम भी इस सूची में आता है।
पर्यावरण नियमों की अनदेखी पड़ी भारी
स्टेडियमों में एसटीपी (Sewage Treatment Plant) के शोधित जल का इस्तेमाल होना चाहिए था। पर्यावरण संरक्षण के लिए यह बेहद जरूरी कदम माना जाता है। ट्रिब्यूनल ने साल 2021 में इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसके बावजूद इन बड़े स्टेडियमों ने इन नियमों का गंभीरता से पालन नहीं किया।
एनजीटी ने इस लापरवाही पर बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। ट्रिब्यूनल की प्रधान पीठ के अध्यक्ष न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव ने चिंता जताई है। उनके साथ विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद भी इस पीठ में शामिल थे। उन्होंने दो जुलाई को हुई सुनवाई में देश के जल संकट पर बात की।
जल संकट के बीच लापरवाही पर नाराजगी
इस कारण एनजीटी ने अंतरिम आदेश के तहत खेल गतिविधियों पर रोक लगाई है। ट्रिब्यूनल ने साफ किया कि अभी स्टेडियमों को पूरी तरह दोषी नहीं माना है। यह रोक केवल आवश्यक जानकारी प्रस्तुत न करने और नोटिस का जवाब न देने पर लगी है। एनजीटी ने सीजीडब्ल्यूए को नए सिरे से अपडेटेड रिपोर्ट तैयार करने को कहा है।
रायपुर क्रिकेट स्टेडियम पर लगा ताला
डिजिटल ढिलाई से रायपुर स्टेडियम में ताला
हैरान करने वाली बात यह है कि यह जुर्माना पिछले दो साल से लंबित था। लोक निर्माण विभाग यानी पीडब्ल्यूडी (Public Works Department) के अधिकारी इसके जिम्मेदार माने जा रहे हैं। वे विभाग के दफ्तर जाकर मैनुअल तरीके से जुर्माना जमा करने से बचते रहे। इसके बजाय वे गूगल-पे और फोन-पे जैसी यूपीआई सुविधाओं को तलाशते रहे।
पेनल्टी चूकी, स्टेडियम सील
छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ के अधिकारियों ने इस मामले पर अपना पक्ष रखा है। उन्होंने बताया कि पहले स्टेडियम का संचालन पीडब्ल्यूडी के पास होता था। इस वजह से क्रिकेट संघ कई मामलों में सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकता था। अब संघ को एनजीटी के इस सख्त नोटिस की पूरी जानकारी मिल चुकी है।
क्रिकेट संघ ने अब इस मामले में जल्द से जल्द कदम उठाने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि अगली सुनवाई से पहले पूरी पेनल्टी जमा कर दी जाएगी। इसके साथ ही एनजीटी के समक्ष अनुपालन रिपोर्ट भी पेश की जाएगी। संघ का प्रयास है कि स्टेडियम से प्रतिबंध हटाने का अनुरोध किया जा सके।
देश के अन्य स्टेडियमों के लिए बड़ा सबक
अब सभी की नजरें सत्रह अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। तब तक इन तीनों ही मैदानों में सन्नाटा पसरा रहने की उम्मीद है। खेल प्रेमियों के लिए भी यह एक बेहद निराशाजनक और चौंकाने वाली खबर है। देखना होगा कि स्टेडियम प्रबंधन कब तक अपनी गलतियों को सुधार पाते हैं।
FAQ
- नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की स्थापना कब हुई थी और इसका मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: एनजीटी की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम 2010 के तहत 18 अक्टूबर 2010 को की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, वनों के बचाव और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े कानूनी मामलों का तेजी से निपटारा करना है। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है। - भारत का पहला पूरी तरह से 'ग्रीन' या पर्यावरण अनुकूल माना जाने वाला इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम कौन सा है?
उत्तर: केरल के तिरुवनंतपुरम में स्थित 'ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल स्टेडियम' देश के सबसे पर्यावरण अनुकूल स्टेडियमों में से एक है। खेल मैदानों में पर्यावरण नियमों के तहत रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, सौर ऊर्जा का उपयोग और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के पानी का दोबारा इस्तेमाल करना अब अनिवार्य किया जा रहा है। - केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA) किस केंद्रीय मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है?
उत्तर: केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA) भारत सरकार के 'जल शक्ति मंत्रालय' (Ministry of Jal Shakti) के अंतर्गत कार्य करता है। इसका मुख्य कार्य देश में भूजल (Groundwater) के विकास और प्रबंधन को नियंत्रित करना तथा पर्यावरण सुरक्षा के लिए इसके अंधाधुंध दोहन पर रोक लगाना है।
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