रायपुर ड्रग्स केस: सालभर थाने में पड़े रहे 17 गैजेट्स, अब भेजे गए फॉरेंसिक लैब

Harrison Masih | Aug 25, 2026, 12:24 IST
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रायपुर ड्रग्स केस
रायपुर ड्रग्स केस

रायपुर ड्रग्स केस में पुलिस की जांच पर सवाल उठे हैं। नव्या मलिक और विधि अग्रवाल समेत 9 आरोपियों के मोबाइल, आईपैड और लैपटॉप करीब एक साल बाद फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं। कार्रवाई सिर्फ 11 पर हुई है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • 17 इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स करीब एक साल तक थाने में पड़े रहे।
  • अब मोबाइल, आईपैड और लैपटॉप फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए।
  • पूछताछ में 325 से ज्यादा लोगों के नाम सामने आए।
  • कार्रवाई सिर्फ 11 लोगों पर होने से जांच पर सवाल उठे।
  • पुलिस की लापरवाही थी या जानबूझकर अनदेखी, अब जांच रिपोर्ट से होगा साफ।
राजधानी रायपुर के हाई-प्रोफाइल टेको पार्टियों में कोकीन और एमडीएमए सप्लाई के मामले में कोंकोणी आरोपियों के 17 इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स साल भर थाने में रखे रहे, लेकिन पुलिस ने उनकी चैट तक नहीं खंगाली। इनमें मुख्य आरोपी नव्या मलिक और विधि अग्रवाल के मोबाइल भी शामिल हैं। इसके अलावा आईपैड और लैपटॉप भी बरामद हुए थे।

अब जांच में इस लापरवाही या साजिश का मामला सामने आने के बाद नव्या मलिक और विधि अग्रवाल समेत 9 आरोपियों के मोबाइल, आईपैड और लैपटॉप जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजे गए हैं।

यह मामला अब यह सवाल खड़ा कर रहा है कि क्या यह प्रशासनिक लापरवाही थी या जानबूझकर सबूतों को दबाने की कोशिश।

चार्जशीट कमजोर, तस्करों को मिल सकता है लाभ

पुलिस ने नवंबर में चार्जशीट पेश की थी। जांच में सामने आया कि पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ के दौरान मिली कई बड़े लोगों की जानकारी को गंभीरता से नहीं लिया।

पुलिस का दावा है कि दोनों प्रमुख आरोपियों का कनेक्शन शहर के बड़े कारोबारियों और उनके ऑफिसनगर से है। इसी वजह से दोनों की उठ-बैठ बड़े लोगों के बीच थी।

एक नेता के परिवार से भी जुड़े तार

एक नेता के परिवार से भी आरोपियों के संबंध होने की बात सामने आई है, लेकिन चार्जशीट में इसका जिक्र नहीं है। पुलिस डायरी में नव्या से जुड़े लोगों, ड्रग खरीदने वालों और सप्लाई चेन की जानकारी का भी उल्लेख नहीं है।

यह बताता है कि जांच में कई अहम कड़ियां छूट गई हैं।

325 से ज्यादा नाम, कार्रवाई सिर्फ 11 पर

प्रारंभिक जांच में नव्या मलिक, विधि अग्रवाल समेत अन्य आरोपियों से पूछताछ में 325 से ज्यादा लोगों की जानकारी मिली थी। ये लोग या तो आरोपियों के साथ पार्टी करते थे, या इनमें कुछ विधायकों के रिश्तेदार और अधिकारियों के बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं।

पुलिस ने संभ्रांत परिवारों से जुड़े होने के बावजूद इन 325 से ज्यादा लोगों में से ज्यादातर को पूछताछ के लिए नहीं बुलाया। सिर्फ 11 लोगों पर ही आगे कार्रवाई हुई। कार्रवाई नहीं करने वाले तत्कालीन पुलिस अधिकारियों की भूमिका भी अब सवालों के घेरे में है।

एक्सपर्ट बोले, मोबाइल बड़ा सबूत, अनदेखी गलत

पुलिस विशेषज्ञों के मुताबिक किसी भी मामले में मोबाइल फोन और लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस सबसे महत्वपूर्ण सबूत होते हैं। खासतौर पर ड्रग तस्करी के मामलों में, क्योंकि यह नेटवर्क ज्यादातर ऑनलाइन ही चलता है।

व्हाट्सएप जैसे मैसेंजर ऐप से ही सौदेबाजी होती है। इससे यह पता चलता है कि आरोपी किस-किस के संपर्क में है, जिससे तस्करों की पहचान की जा सकती है। यही वजह है कि केंद्रीय एजेंसियां फोन जब्त कर तुरंत फॉरेंसिक जांच के लिए भेजती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक इस मामले में भी पुलिस को मोबाइल फोन तुरंत जांच के लिए भेजना था।

पुलिस का पक्ष

इस मामले में डीआईजी सेंट्रल रेंज ताकेश्वर पटेल के मुताबिक ड्रग्स मामले में सभी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जांच के लिए भेज दिए गए हैं। उनके मुताबिक पहले 9 तस्करों के मोबाइल जांच के लिए भेजे गए थे, लेकिन नव्या और विधि के डिवाइस लैब नहीं भेजे गए थे।

उनके अनुसार अब रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। नव्या को 23 अगस्त 2025 को गिरफ्तार किया गया था।

अब आगे क्या

फॉरेंसिक लैब से रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इन डिवाइस में क्या अहम जानकारी छुपी है। इससे 325 से ज्यादा नामों की सूची में शामिल बाकी लोगों की भूमिका पर भी नई रोशनी पड़ सकती है।

आने वाले दिनों में यह भी देखा जाएगा कि लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई होती है या नहीं।

FAQ

  1. रायपुर ड्रग्स केस में कितने लोगों के नाम सामने आए हैं?
    पूछताछ के दौरान 325 से ज्यादा लोगों की जानकारी सामने आने की बात कही गई है। हालांकि, इनमें से सिर्फ 11 लोगों पर आगे कार्रवाई हुई।
  2. रायपुर ड्रग्स केस में पुलिस की जांच पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?
    रायपुर ड्रग्स केस में जब्त किए गए 17 इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स करीब एक साल तक थाने में रखे रहे और उनकी फॉरेंसिक जांच नहीं हुई। इसी वजह से पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।


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