14 नवंबर तक पुलिस रिमांड में रहेगा वीरेंद्र तोमर, पूछताछ में होंगे बड़े खुलासे

Harrison Masih | Nov 10, 2025, 18:26 IST
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रायपुर पुलिस ने आखिरकार उस सूदखोर को पकड़ लिया, जो सालों से शहर की दहशत बना हुआ था। ग्वालियर से गिरफ्तारी के बाद उसका जुलूस निकला। कोर्ट ने रिमांड बढ़ा दी है। पूछताछ में कौन से बड़े नाम सामने आएंगे?

Raipur. लंबे समय से फरार चल रहे रायपुर के सूदखोर वीरेंद्र तोमर को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को ग्वालियर से दबोचा गया और रायपुर लाने के बाद पुलिस ने पूरे शहर में उसका जुलूस निकाला, ताकि लोगों में जागरूकता बढ़ाई जा सके और कर्जखोरी व अवैध वसूली के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई का संदेश दिया जा सके।

गिरफ्तारी के बाद आज वीरेंद्र तोमर को रायपुर कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने पुलिस की दलीलें मान लीं और वीरेंद्र तोमर को 5 दिनों की अतिरिक्त पुलिस रिमांड पर भेज दिया। अब उसकी अगली पेशी 14 नवंबर को होगी।

लंबे समय से फरार चल रहे तोमर ब्रदर्स

रायपुर की तेलीबांधा और पुरानी बस्ती पुलिस लंबे समय से सूदखोरी, रंगदारी, मारपीट और अवैध हथियार रखने के मामलों में दोनों भाइयों- वीरेंद्र और रोहित तोमर की तलाश कर रही थी। इनके खिलाफ अलग-अलग थानों में एक दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस की कई टीमें राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और मध्यप्रदेश में दबिश दे चुकी थीं, लेकिन दोनों फरार थे। ग्वालियर के सिरोल इलाके की विंडसर हिल्स टाउनशिप में एक आलीशान फ्लैट में पुलिस ने 6-7 दिनों तक निगरानी रखी। कई नौकरों का आना-जाना चलता रहा, लेकिन तोमर कहीं दिखाई नहीं दे रहा था। यहां तक कि वह बालकनी में भी नजर नहीं आया। इसके बाद पुलिस ने एक बड़ा कदम उठाया।

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बिजली काटते ही बालकनी में दिखा आरोपी

शनिवार को पुलिस ने फ्लैट की बिजली काट दी। बिजली जाने के बाद वीरेंद्र बालकनी में आया, और यहीं से पुलिस ने उसकी पहचान कर ली। इसके बाद बिजली विभाग के कर्मी बनने के बहाने पुलिस फ्लैट के अंदर घुसी और उसे दबोच लिया। रविवार को आरोपी को रायपुर ले जाया गया। शुरुआती पूछताछ में वीरेंद्र ने दावा किया कि वह "सरेंडर करने ही वाला था" और पुलिस लगातार उसे तलाशने के कारण दबाव में था।

रायपुर में कभी अंडे बेचने से शुरुआत करने वाले वीरेंद्र सिंह तोमर और उसके भाई रोहित तोमर ने अवैध सूदखोरी और ब्लैकमेलिंग के जरिए अकूत संपत्ति और दहशत का साम्राज्य खड़ा कर लिया था। लेकिन कानून के शिकंजे से आखिरकार वीरेंद्र नहीं बच सका। 151 दिन की फरारी के बाद रायपुर पुलिस ने उसे ग्वालियर से गिरफ्तार किया और उन्हीं गलियों में उसका जुलूस निकाला, जहां कभी उसने लोगों को डर और धमकी से झुकाया था। मर्सिडीज और BMW में घूमने वाला वीरेंद्र अब फटे कपड़ों और बिना चप्पल के पुलिस की गिरफ्त में नजर आया। भीड़ में मौजूद उसकी पत्नी तक ने गुस्से में कहा — “मेरे पति को मार डालो।” यह मामला बताता है कि चाहे कितनी भी ऊँची उड़ान क्यों न हो, कानून के सामने अंततः सिर झुकाना ही पड़ता है। पुलिस अब उसके भाई रोहित की तलाश में भी जुट गई है और उनके काले कारोबार की पूरी परतें खुल रही हैं।

कौन हैं तोमर ब्रदर्स?

वीरेंद्र और रोहित लंबे समय से रायपुर में सूदखोरी और अवैध वसूली के धंधे में सक्रिय थे। ये दोनों भाई हिस्ट्रीशीटर हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, पैसे और राजनीतिक प्रभाव के दम पर उन्होंने शहर में खौफ का माहौल बना रखा था। दोनों भाई पहले अंडे का ठेला लगाते थे। फिर धीरे-धीरे उन्होंने सूदखोरी, मारपीट, अवैध वसूली, धोखाधड़ी जैसे संगीन अपराधों को अंजाम देना शुरू किया। वीरेंद्र तोमर इलाके में “रूबी सिंह” नाम से जाना जाता था। करोड़ों की संपत्ति उनकी गिरफ्त के चलते कई कमजोर परिवारों से छीनी गई, ऐसा पुलिस को संदेह है। प्रशासन अब इन संपत्तियों पर कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

रोहित तोमर के फरार होने से शुरू हुई कहानी

करीब 5 महीने पहले प्रॉपर्टी डीलर दशमीत चावला ने रोहित तोमर पर मारपीट का आरोप लगाया था और तेलीबांधा थाने में FIR दर्ज कराई थी। इसके बाद रोहित फरार हो गया। इसी बीच उसका भाई वीरेंद्र भी छिप गया। पुलिस ने वीरेंद्र के घर की तलाशी ली थी, जिसमें अवैध हथियार मिला। इस पर आर्म्स एक्ट के तहत FIR दर्ज की गई। यह गिरफ्तारी उसी मामले में की गई भारी सर्च ऑपरेशन का हिस्सा है।

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रेड में करोड़ों की संपत्ति से जुड़े दस्तावेज बरामद

तोमर भाइयों की फरारी के बाद पुलिस ने उनके करीबियों के घरों पर भी लगातार छापे मारे। रेड में 40 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की संपत्ति की रजिस्ट्री, साढ़े 3 करोड़ का सोना और 10 लाख की चांदी जब्त की गई। साथ ही बैंक पासबुक, चेक और एटीएम कार्ड भी जब्त किए गए। पुलिस को शक है कि ये दस्तावेज उन लोगों के हैं, जिन्हें तोमर ब्रदर्स ने ऊंची ब्याज दर पर पैसे देकर बाद में ब्लैकमेलिंग के जरिए उनकी संपत्ति अपने कब्जे में कर ली।

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