राजस्व निरीक्षक पदोन्नति परीक्षा को हाईकोर्ट ने किया निरस्त
VINAY VERMA | Jan 02, 2026, 19:41 IST
cg high court
लंबे से समय से विवादों में रही राजस्व निरीक्षक पदोन्नति परीक्षा को हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया है। इस परीक्षा के जरिए 216 पटवारियों को राजस्व निरीक्षक के पद पर पदोन्नति दी गई थी। लेकिन पदोन्नति परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप लगे और मामला कोर्ट में पहुंच गया।
Bilaspur. लंबे से समय से विवादों में रही राजस्व निरीक्षक पदोन्नति परीक्षा को हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया है। इस परीक्षा के जरिए 216 पटवारियों को राजस्व निरीक्षक के पद पर पदोन्नति दी गई थी। लेकिन पदोन्नति परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप लगे और मामला कोर्ट में पहुंच गया।
हालांकि विवाद समाप्त करने खुद चयनकर्ता कोर्ट गया। लेकिन कोर्ट ने माना है कि पदोन्नति परीक्षा में गड़बड़ी हुई थी। चयन प्रक्रिया में भाई-भतीजावाद, कदाचरण और पक्षपात के संकेत मिले हैं। जस्टिस एनके व्यास की एकलपीठ ने पदोन्नति परीक्षा में गड़बड़ी प्रकरण पर सुनवाई की।
जस्टिस एनके व्यास की कोर्ट ने कहा कि प्रारम्भिक रुप से परीक्षा पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से आयोजित नहंी किया जाना समझ में आ रहा है।। ऐसे में याचिकाकर्ताओं को राजस्व निरीक्षक के प्रोफेशनल पद के लिए ट्रेनिंग पर भेजने का निर्देश जारी नहीं किया जा सकता।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्टने यह भी राज्य शासन को निर्देश दिया है कि राज्य परीक्षा की पवित्रता को बनाए रखते हुए पटवारी पद से राजस्व निरीक्षक के पद पर पदोन्नति के लिए निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से नई परीक्षा आयोजित करने के लिए स्वतंत्रत है।
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रायपुर में ईओडब्ल्यू ने घोटाला में आयुक्त भू-अभिलेख रायपुर के सहायक सांख्यिकी अधिकारी वीरेन्द्र जाटव और क्षेत्रीय उप आयुक्त भू-अभिलेख कार्यालय के सहायक सांख्यिकी अधिकारी हेमन्त कौशिक को गिरफ्तार किया था।
दोनो पर पेपर लीक करने के लिए प्रश्नपत्र करीबी पटवारियों तक पहुंचाया। इसके एवज में जमकर अवैध वसूली की गई। इस रकम को स्वयं और वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाया गया।
7 जनवरी 2024 में पटवारी से आरआई बनने के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी। 90 पदों के लिए 2600 से ज्यादा पटवारी शामिल हुए थे। 29 फरवरी 2024 को परीक्षा का परिणाम जारी किया गया था। इसमें 216 पटवारियों का चयन प्रशिक्षण के लिए हुआ था।
बाद में 13 लोगों का अंतिम चयन हुआ। लेकिन बाद में 22 लोगों का सलेक्शन किया गया। इसे लेकर पटवारियों ने आक्रोेश जताया था। साथ ही लेन-देन कर अपने लोगों को उपकृत करने का आरोप लगाया।
परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की शिकायत को लेकर मामला विधानसभा में उठने पर राज्य सरकार द्वारा इसे जांच के लिए ईओडब्ल्यू को सौंपा था। ईओडब्ल्यू द्वारा रायपुर सहित अन्य जिलों में 19 ठिकानों में छापेमारी के दौरान दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य मिले थे।
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हालांकि विवाद समाप्त करने खुद चयनकर्ता कोर्ट गया। लेकिन कोर्ट ने माना है कि पदोन्नति परीक्षा में गड़बड़ी हुई थी। चयन प्रक्रिया में भाई-भतीजावाद, कदाचरण और पक्षपात के संकेत मिले हैं। जस्टिस एनके व्यास की एकलपीठ ने पदोन्नति परीक्षा में गड़बड़ी प्रकरण पर सुनवाई की।
क्या कहा हाईकोर्ट ने..
छत्तीसगढ़ हाईकोर्टने यह भी राज्य शासन को निर्देश दिया है कि राज्य परीक्षा की पवित्रता को बनाए रखते हुए पटवारी पद से राजस्व निरीक्षक के पद पर पदोन्नति के लिए निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से नई परीक्षा आयोजित करने के लिए स्वतंत्रत है।
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दो अधिकारियों हो चुके हैं गिरफ्तार
दोनो पर पेपर लीक करने के लिए प्रश्नपत्र करीबी पटवारियों तक पहुंचाया। इसके एवज में जमकर अवैध वसूली की गई। इस रकम को स्वयं और वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाया गया।
क्या है पूरा मामला...
बाद में 13 लोगों का अंतिम चयन हुआ। लेकिन बाद में 22 लोगों का सलेक्शन किया गया। इसे लेकर पटवारियों ने आक्रोेश जताया था। साथ ही लेन-देन कर अपने लोगों को उपकृत करने का आरोप लगाया।
परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की शिकायत को लेकर मामला विधानसभा में उठने पर राज्य सरकार द्वारा इसे जांच के लिए ईओडब्ल्यू को सौंपा था। ईओडब्ल्यू द्वारा रायपुर सहित अन्य जिलों में 19 ठिकानों में छापेमारी के दौरान दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य मिले थे।
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