छत्तीसगढ़ के मुंगेली में जन्में हैं सांसद संदीप पाठक, क्या सूबे की सियासत पर डालेंगे असर
Arun Tiwari | Apr 24, 2026, 21:25 IST
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संदीप पाठक, जो छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में जन्मे हैं, अब बीजेपी में शामिल हो गए हैं, जो छत्तीसगढ़ की सियासत में बड़ा असर डाल सकते हैं। पहले AAPपार्टी में रहते हुए वे राज्य के प्रभारी थे और पार्टी के चुनावी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।
Raipur : आपके सांसद अब पीएम मोदी के हो गए हैं। आप का दामन छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए राज्यसभा सदस्य संदीप पाठक का छत्तीसगढ़ से खास नाता है।
वे मूलतः छत्तीसगढ़िया हैं। उनका जन्म मुंगेली में हुआ है। अब यह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि क्या वे छत्तीसगढ़ की सियासत पर भी असर डालेंगे।
छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में जन्मे आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संदीप पाठक के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने की खबर ने न केवल राष्ट्रीय बल्कि छत्तीसगढ़ की सियासत में भी खासा असर डाला है।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा उनके “छत्तीसगढ़ कनेक्शन” की हो रही है, जिसने इस राजनीतिक बदलाव को और अहम बना दिया है। संदीप पाठक का जन्म और शुरुआती जीवन छत्तीसगढ़ की जमीन पर बीता।
उनकी प्राम्भिक शिक्षा भी यहीं हुई। छत्तीसगढ़ के एक सामान्य परिवेश से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पहचान बनाना उनकी बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। मुंगेली जैसे अपेक्षाकृत छोटे जिले से निकलकर वे देश की राजनीति के केंद्र तक पहुंचे हैं।
आम आदमी पार्टी में रहते हुए संदीप पाठक संगठन के अहम रणनीतिकारों में शामिल थे। उन्होंने कई राज्यों में पार्टी के चुनावी अभियान को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वे आप के छत्तीसगढ़ प्रभारी भी रहे हैं। अब उनका बीजेपी में जाना एक बड़े राजनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें उनका छत्तीसगढ़ से जुड़ाव एक अहम फैक्टर बनकर उभरा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी के लिए संदीप पाठक का छत्तीसगढ़ कनेक्शन खास मायने रखता है। राज्य में बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर रहती है
ऐसे में स्थानीय जड़ों से जुड़े किसी राष्ट्रीय चेहरे का पार्टी में शामिल होना संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूती दे सकता है। खासकर मुंगेली और आसपास के क्षेत्रों में उनके नाम और पहचान का प्रभाव बीजेपी के लिए फायदेमंद हो सकता है।
वहीं, इस घटनाक्रम ने छत्तीसगढ़ के राजनीतिक माहौल को भी गरमा दिया है। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि क्या संदीप पाठक भविष्य में राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं या वे राष्ट्रीय राजनीति में ही सक्रिय रहेंगे।
AAP के लिए यह झटका इसलिए भी बड़ा माना जा रहा है क्योंकि संदीप पाठक जैसे नेता, जिनकी जड़ें छत्तीसगढ़ में हैं, पार्टी को नए क्षेत्रों में विस्तार देने में मदद कर सकते थे।
उनके जाने से पार्टी के संगठनात्मक ढांचे पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। आप का छत्तीसगढ़ में पैर पसारना अब दूर की कौड़ी रह गया है।(आप सांसद संदीप पाठक का बयान )
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वे मूलतः छत्तीसगढ़िया हैं। उनका जन्म मुंगेली में हुआ है। अब यह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि क्या वे छत्तीसगढ़ की सियासत पर भी असर डालेंगे।
मुंगेली में जन्में हैं पाठक:
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा उनके “छत्तीसगढ़ कनेक्शन” की हो रही है, जिसने इस राजनीतिक बदलाव को और अहम बना दिया है। संदीप पाठक का जन्म और शुरुआती जीवन छत्तीसगढ़ की जमीन पर बीता।
उनकी प्राम्भिक शिक्षा भी यहीं हुई। छत्तीसगढ़ के एक सामान्य परिवेश से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पहचान बनाना उनकी बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। मुंगेली जैसे अपेक्षाकृत छोटे जिले से निकलकर वे देश की राजनीति के केंद्र तक पहुंचे हैं।
आप के छत्तीसगढ़ प्रभारी रहे
वे आप के छत्तीसगढ़ प्रभारी भी रहे हैं। अब उनका बीजेपी में जाना एक बड़े राजनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें उनका छत्तीसगढ़ से जुड़ाव एक अहम फैक्टर बनकर उभरा है।
क्या कहते हैं जानकार
ऐसे में स्थानीय जड़ों से जुड़े किसी राष्ट्रीय चेहरे का पार्टी में शामिल होना संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूती दे सकता है। खासकर मुंगेली और आसपास के क्षेत्रों में उनके नाम और पहचान का प्रभाव बीजेपी के लिए फायदेमंद हो सकता है।
वहीं, इस घटनाक्रम ने छत्तीसगढ़ के राजनीतिक माहौल को भी गरमा दिया है। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि क्या संदीप पाठक भविष्य में राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं या वे राष्ट्रीय राजनीति में ही सक्रिय रहेंगे।
आप को झटका
उनके जाने से पार्टी के संगठनात्मक ढांचे पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। आप का छत्तीसगढ़ में पैर पसारना अब दूर की कौड़ी रह गया है।(आप सांसद संदीप पाठक का बयान )
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